जैसलमेर में इस साल निरंतर प्रचंड गर्मी के हालात बने हुए हैं। लू के थपेड़ों और सूरज की तपिश से लोगों के हाल बेहाल बने हुए हैं। कई ऐसे पहलू हैं, जिन पर प्रशासन की ओर से मुस्तैदी से काम करते हुए लोगों को राहत दिलाई जा सकती है।
आज का सवाल - जैसलमेर में इस साल प्रचंड गर्मी के हालात बने हुए हैं। ऐसे में आमजन को कई तरह के इंतजामों की दरकार है। प्रशासन इस मोर्चे पर कितना मुस्तैद है?
जैसलमेर में इस साल निरंतर प्रचंड गर्मी के हालात बने हुए हैं। लू के थपेड़ों और सूरज की तपिश से लोगों के हाल बेहाल बने हुए हैं। कई ऐसे पहलू हैं, जिन पर प्रशासन की ओर से मुस्तैदी से काम करते हुए लोगों को राहत दिलाई जा सकती है। प्रतिकूल मौसम की मार लोगों पर कम से कम पड़े, यह सुनिश्चित करना विभिन्न सरकारी महकमों की जिम्मेदारी है।
जैसलमेर में इस बार गर्मी ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। दोपहर के समय सडक़ें सूनी नजर आती हैं। ऐसे में प्रशासन को प्रमुख चौराहों, बस स्टैंड और बाजार क्षेत्रों में ठंडे पेयजल व छायादार विश्राम स्थलों की व्यवस्था बढ़ानी चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों तक राहत उपायों को और प्रभावी ढंग से पहुंचाने की जरूरत है।
भीषण गर्मी में महिलाओं और बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। कई इलाकों में पानी की सप्लाई प्रभावित होने से हालात और कठिन बन जाते हैं। प्रशासन को पेयजल व्यवस्था पर विशेष ध्यान देना चाहिए। अस्पतालों में भी गर्मी जनित बीमारियों के लिए पर्याप्त सुविधाएं और दवाइयां उपलब्ध रहनी चाहिए।
जागरुकता का चले अभियान
दोपहर के समय बाजारों में ग्राहक कम आने लगे हैं। लू के थपेड़ों से आमजन परेशान हैं। नगर परिषद और प्रशासन को सार्वजनिक स्थानों पर पानी के टैंकर, प्याऊ और अस्थायी शेड लगाने चाहिए। प्रशासन की ओर से जागरूकता अभियान भी चलाया जाना चाहिए ताकि लोग लू से बचाव के उपाय अपनाएं।