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आसमान से बरसते अंगारों के बीच सरहद के साथ सेहत को सुरक्षित रखना भी चुनौती

रेगिस्तानी चौकियों पर हालात इतने कठोर हैं कि दिन चढ़ने के साथ रेत अंगारों जैसी तपने लगती है। कई बार जवानों के जूतों के मोटे सोल तक अत्यधिक गर्मी से प्रभावित हो जाते हैं। तेज लू और गर्म हवाएं लगातार शरीर की ऊर्जा खत्म करती हैं।

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थार के रेगिस्तान में इस समय गर्मी केवल मौसम नहीं, बल्कि सरहद पर तैनात जवानों के लिए जंग की सी अनुभूति करा रही है। भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तापमान लगातार खतरनाक स्तर छू रहा है। मौसम विशेषज्ञों ने आगामी दिनों में सीमा क्षेत्र में पारा 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की आशंका जताई है, जबकि कई स्थानों पर जमीन का तापमान इससे भी अधिक महसूस किया जा रहा है। ऐसे हालात में सीमा सुरक्षा बल के जवानों के सामने अब दोहरी चुनौती खड़ी है—एक तरफ सीमा की चौकसी और दूसरी तरफ शरीर को भीषण गर्मी से बचाना। रेगिस्तानी चौकियों पर हालात इतने कठोर हैं कि दिन चढ़ने के साथ रेत अंगारों जैसी तपने लगती है। कई बार जवानों के जूतों के मोटे सोल तक अत्यधिक गर्मी से प्रभावित हो जाते हैं। तेज लू और गर्म हवाएं लगातार शरीर की ऊर्जा खत्म करती हैं। विगत वर्षों में गर्मी के कारण कई जवान हीट स्ट्रोक की चपेट में आए थे। इस बार गत अप्रेल माह से ही भीषण गर्मी शुरू हो जाने के बाद सुरक्षा एजेंसियों की चिंता और बढ़ गई है। जून माह अभी बाकी होने से हालात और चुनौतीपूर्ण माने जा रहे हैं।

'हीट मैनेजमेंट मोड’ में सीमा चौकियां

अब ‘हीट मैनेजमेंट मोड’ में सीमा चौकियां

सीमा क्षेत्र में जवानों की सुरक्षा को लेकर बीएसएफ ने विशेष प्रबंधन शुरू किया है। चौकियों पर लगातार स्वास्थ्य निगरानी की जा रही है। जवानों को नियमित अंतराल में आराम, पर्याप्त पानी और इलेक्ट्रोलाइट उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

सुरक्षा के लिए फोकस पॉइंट्स

-दोपहर 1 बजे से शाम 4 बजे तक अतिरिक्त सतर्कता

-नींबू पानी, ग्लूकोज और प्याज सेवन पर जोर

-चेहरे पर पटका और आंखों पर रंगीन चश्मा अनिवार्य

-लगातार ड्यूटी के बजाय रोटेशन सिस्टम लागू

-सीमा चौकियों पर कूलर और कोल्ड रूम सक्रिय

-मिनी एमआइ रूम में तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध

-सीमा क्षेत्र में वाहनों के साथ ऊंट और सेंड स्कूटर्स का उपयोग भी बढ़ाया गया है, ताकि जवानों की शारीरिक थकान कम हो सके।

महिला जवानों की मुस्तैदी बनी प्रेरणा

भीषण गर्मी के बीच महिला जवान भी अग्रिम चौकियों पर बराबरी से तैनात हैं। स्वचालित हथियारों के साथ तपती रेत में गश्त करती महिला प्रहरियों की मौजूदगी सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा बन चुकी है। तेज लू और कठिन हालात के बावजूद उनकी सक्रियता जवानों के मनोबल को मजबूत कर रही है।

फैक्ट फाइल

-संभावित अधिकतम तापमान : 50 डिग्री सेल्सियस

-संवेदनशील समय : दोपहर 1 से शाम 4 बजे

-सक्रिय चिकित्सा इकाइयां : मिनी एमआई रूम और कोल्ड रूम

-सीमा गश्त संसाधन : वाहन, ऊंट, सेंड स्कूटर्स

गर्मी अब सुरक्षा रणनीति का हिस्सा

सीसुब सूत्रों के अनुसार रेगिस्तानी सीमा क्षेत्रों में बढ़ती गर्मी अब केवल मौसमीय चुनौती नहीं रही। लगातार बढ़ते तापमान का सीधा असर जवानों की कार्यक्षमता, सतर्कता और स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। यही कारण है कि सीमा सुरक्षा के साथ अब ‘हीट प्रोटेक्शन मैनेजमेंट’ भी सुरक्षा रणनीति का हिस्सा बनता जा रहा है। सूत्रों के अनुसार सीमा क्षेत्र में इस समय अत्यधिक गर्मी है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह सक्रिय है। जवानों की सेहत को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सभी चौकियों पर पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं। पीने के पानी, इलेक्ट्रोलाइट, चिकित्सा सहायता और आराम की सुविधाओं को लगातार मजबूत किया जा रहा है।