
जैसलमेर. स्वर्णनगरी की पहचान अब केवल पर्यटन, विरासत और रेगिस्तानी संस्कृति तक सीमित नहीं रही है। तेजी से बढ़ते पर्यटन कारोबार, आबादी विस्तार और वाहनों की लगातार बढ़ती संख्या ने शहर के यातायात ढांचे पर दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है। वर्तमान रफ्तार यही रही तो वर्ष 2035 तक जैसलमेर को जाम, पार्किंग संकट, दुर्घटनाओं और प्रदूषण जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। शहर के प्रमुख मार्गों, बाजार क्षेत्रों और चौराहों पर अभी से बढ़ता यातायात दबाव भविष्य की तस्वीर दिखाने लगा है। पर्यटन सीजन में बाहरी वाहनों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है, जिससे सीमित सडक़ नेटवर्क पर अतिरिक्त भार पड़ता है। ऐसे में अगले दशक की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ट्रैफिक मास्टरप्लान तैयार करना समय की मांग बन गया है।
जैसलमेर में पिछले वर्षों में पर्यटन गतिविधियों का तेजी से विस्तार हुआ है। होटल, रिसॉर्ट, टूर ऑपरेटर, कैंप साइट और नई व्यावसायिक गतिविधियों के कारण शहर में रोजाना आने-जाने वाले वाहनों की संख्या बढ़ी है।
वर्तमान में शहर की सडक़ संरचना पुराने यातायात दबाव के अनुसार विकसित हुई थी, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं।
-पर्यटन सीजन में हजारों पर्यटक वाहनों की अतिरिक्त आवाजाही।
-शहर के अंदर पार्किंग स्थलों की सीमित उपलब्धता।
-आबादी विस्तार के साथ निजी वाहनों की संख्या में वृद्धि।
-बाजार क्षेत्रों में सडक़ किनारे अस्थायी पार्किंग और अतिक्रमण।
-प्रमुख मार्गों पर सुबह-शाम पीक ऑवर में बढ़ता यातायात भार।
शहरों में यातायात विशेषज्ञों के अनुसार यदि सडक़ क्षमता और वाहन संख्या के बीच संतुलन नहीं बनाया जाता है तो आने वाले वर्षों में ट्रैफिक समस्या तेजी से बढ़ती है। जैसलमेर जैसे पर्यटन शहर में केवल सडक़चौड़ी करना पर्याप्त समाधान नहीं होगा, बल्कि यातायात प्रबंधन की समग्र योजना तैयार करनी होगी। भविष्य की जरूरतों को देखते हुए शहर में वैकल्पिक मार्ग, पार्किंग हब, पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित क्षेत्र और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर ध्यान देने की दरकार है।
-मुख्य बाजार क्षेत्र
-हनुमान चौराहा और आसपास के मार्ग
-पर्यटन स्थलों तक जाने वाले रास्ते
-रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड क्षेत्र
-शहर के प्रवेश मार्ग
ट्रैफिक मास्टरप्लान की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्ष 2035 को ध्यान में रखते हुए जैसलमेर के लिए वैज्ञानिक ट्रैफिक प्लान तैयार किया जाना चाहिए। इसमें केवल वर्तमान समस्या का समाधान नहीं, बल्कि अगले 10 वर्षों की जरूरतों का आकलन शामिल होना चाहिए।
-शहर के लिए भविष्य आधारित यातायात सर्वे करवाना।
-पार्किंग के लिए अलग जोन विकसित करना।
-पर्यटन वाहनों के प्रवेश और पार्किंग की बेहतर व्यवस्था करना।
-प्रमुख चौराहों पर स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन लागू करना।
-पैदल यात्रियों और साइकिल चालकों के लिए सुरक्षित कॉरिडोर बनाना।
-शहर के बाहरी हिस्सों में वाहन नियंत्रण व्यवस्था विकसित करना।
यातायात विशेषज्ञों के अनुसार पर्यटन आधारित शहरों में भविष्य की योजना वर्तमान समस्या के आधार पर नहीं, बल्कि संभावित वृद्धि को ध्यान में रखकर बनाई जाती है। यदि समय रहते यातायात ढांचे में सुधार नहीं किया गया तो बढ़ते वाहन दबाव से यात्रा समय, दुर्घटना दर और प्रदूषण तीनों में वृद्धि हो सकती है। जैसलमेर को अभी से ऐसा मॉडल तैयार करना होगा, जिसमें पर्यटन विकास और सुगम यातायात व्यवस्था दोनों साथ चल सकें।
- अरविंद शर्मा, शहरी यातायात विशेषज्ञ