जैसलमेर

पोकरण परमाणु परीक्षणों ने अट्ठाईस वर्षों पहले दुनिया को दिखाई थी भारत की शक्ति

ऑपरेशन शक्ति केवल वैज्ञानिक परीक्षण नहीं था, बल्कि गोपनीय रणनीति का सबसे सफल उदाहरण भी माना जाता है। अमेरिकी सैटेलाइट लगातार पोकरण क्षेत्र पर नजर रखे हुए थे। इसके बावजूद वैज्ञानिकों और सेना ने ऐसी तैयारी की कि दुनिया की सबसे आधुनिक निगरानी व्यवस्था भी परीक्षणों की भनक नहीं पकड़ सकी।

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May 10, 2026
file photo

11 मई 1998 की दोपहर पोकरण की तपती रेत के नीचे ऐसा इतिहास लिखा गया, जिसकी गूंज पूरी दुनिया ने सुनी। दोपहर 2 बजकर 45 मिनट पर हुए परमाणु विस्फोटों ने केवल धरती नहीं हिलाई, बल्कि वैश्विक सामरिक समीकरण भी बदल दिए। भारत ने ऑपरेशन शक्ति-98 के तहत दुनिया की महाशक्तियों को चौंकाते हुए परमाणु क्षमता का सार्वजनिक प्रदर्शन किया और खुद को वैश्विक परमाणु ताकतों की कतार में खड़ा कर दिया। आज इस ऐतिहासिक घटना को 28 वर्ष पूरे हो चुके हैं, लेकिन पोकरण और खेतोलाई के लोगों के लिए वह दिन अब भी गर्व, रोमांच और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक बना हुआ है।

दुनिया की नजरों से बचाकर बना था मिशन

ऑपरेशन शक्ति केवल वैज्ञानिक परीक्षण नहीं था, बल्कि गोपनीय रणनीति का सबसे सफल उदाहरण भी माना जाता है। अमेरिकी सैटेलाइट लगातार पोकरण क्षेत्र पर नजर रखे हुए थे। इसके बावजूद वैज्ञानिकों और सेना ने ऐसी तैयारी की कि दुनिया की सबसे आधुनिक निगरानी व्यवस्था भी परीक्षणों की भनक नहीं पकड़ सकी। परीक्षण स्थल के आसपास सैन्य गतिविधियों को सामान्य अभ्यास की तरह प्रस्तुत किया गया। परमाणु परीक्षण स्थल से कुछ दूरी पर पिनाका जैसे रॉकेट दागे गए और वायुसेना ने रन-वे विध्वंस अभ्यास भी किया, ताकि वास्तविक गतिविधियां छिपी रहें।

पांच धमाकों ने बदल दी वैश्विक तस्वीर

11 मई 1998 को दो और 13 मई 1998 को तीन परमाणु परीक्षण किए गए। इन पांच धमाकों में एक संलयन और चार विखंडन बम शामिल थे। परीक्षणों के बाद दुनिया भर में भारत की सामरिक क्षमता पर चर्चा शुरू हो गई।

फैक्ट फाइल

-11 मई 1998 : दो परमाणु परीक्षण

-13 मई 1998 : तीन अतिरिक्त परीक्षण

-कुल धमाके : पांच

-पहला विस्फोट : दोपहर 2:45 बजे

-पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज : लगभग 80 किलोमीटर लंबी

-खेतोलाई की दूरी : पोकरण से 25 किलोमीटर

-परीक्षण स्थल की दूरी : खेतोलाई से लगभग 5 किलोमीटर

खेतोलाई बना वैश्विक पहचान का केंद्र

परमाणु परीक्षण के बाद खेतोलाई गांव अचानक अंतरराष्ट्रीय चर्चा में आ गया। गांव से केवल 5 किलोमीटर दूर परीक्षण स्थल होने के कारण यहां के लोग उस ऐतिहासिक क्षण के प्रत्यक्ष साक्षी बने। खेतोलाई निवासी अशोक विश्नोई बताते हैं कि 11 मई को सैनिकों ने गांव में डेरा डाल लिया था। ग्रामीणों को नियमित सैन्य अभ्यास की जानकारी दी गई, लेकिन परमाणु परीक्षण की भनक किसी को नहीं थी। दोपहर में हुए धमाके के बाद कुछ ही घंटों में पूरी दुनिया की नजरें पोकरण और खेतोलाई पर टिक गईं।

असीम विश्नोई का कहना है कि खेतोलाई की धरती पर परमाणु परीक्षण होना गांव के लोगों के लिए आज भी गर्व का विषय है। इस घटना ने पूरे क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।

विज्ञान और नेतृत्व का निर्णायक क्षण

ऑपरेशन शक्ति के मुख्य परियोजना समन्वयक तत्कालीन डीआरडीओ निदेशक डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम थे। उनके साथ डॉ. आर. चिदंबरम और डॉ. के. संथानम की टीम ने परीक्षणों को सफल बनाया। परीक्षणों के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने पोकरण सभा में 'जय जवान, जय किसान' के साथ 'जय विज्ञान' का नारा जोड़कर विज्ञान और सुरक्षा के नए युग का संदेश दिया। रक्षा मामलों के जानकार मानते हैं कि पोकरण परमाणु परीक्षणों ने भारत की रणनीतिक सोच को पूरी तरह बदल दिया। इसके बाद भारत केवल क्षेत्रीय शक्ति नहीं रहा, बल्कि वैश्विक सामरिक विमर्श में निर्णायक उपस्थिति दर्ज कराने लगा। ऑपरेशन शक्ति ने यह भी साबित किया कि वैज्ञानिक क्षमता, राजनीतिक इच्छाशक्ति और सैन्य गोपनीयता का संयोजन किसी भी बड़े मिशन को सफल बना सकता है।

Published on:
10 May 2026 08:22 pm
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