
जैसलमेर. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआइ तेजी से कामकाज और रोजगार के तौर-तरीकों को बदल रहा है। ऐसे में युवाओं के सामने चुनौती तकनीक से बचने की नहीं, बल्कि उसे समझकर अपने कौशल का हिस्सा बनाने की है। इसी उद्देश्य से राजस्थान पत्रिका के बाड़मेर संस्करण के 16वें स्थापना दिवस पर युवाओं के लिए विशेष एआइ वर्कशॉप आयोजित की गई। इसमें युवाओं को एआइ के इस्तेमाल, बदलते करियर विकल्प और डिजिटल टूल्स के व्यावहारिक उपयोग की जानकारी दी गई। यहां गीता आश्रम मार्ग स्थित विद्यालय के प्रांगण में मुख्य वक्ता और डिजिटल एक्सपर्ट ललित कुमार ने कहा कि एआइ को लेकर युवाओं के बीच उत्सुकता के साथ रोजगार को लेकर चिंता भी है। तकनीक कई पारंपरिक कार्यों का स्वरूप बदल रही है, लेकिन इसके साथ नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं। ऐसे में युवाओं को एआइ से प्रतिस्पर्धा करने के बजाय इसे अपनी कार्यक्षमता बढ़ाने वाले साधन के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी डिजिटल टूल का महत्व उसके सही इस्तेमाल में है। एआइ की मदद से जानकारी जुटाने, विचारों को व्यवस्थित करने, सामग्री तैयार करने, प्रस्तुतीकरण बनाने और समय बचाने जैसे काम आसान किए जा सकते हैं। हालांकि एआइ से मिली जानकारी की तथ्यात्मक जांच जरूरी है। तकनीक का इस्तेमाल करते समय विवेक और मौलिक सोच बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है।
मुख्य अतिथि के तौर पर करियर काउंसलर एवं मोटिवेटर आलोक थानवी ने कहा कि बदलते दौर में केवल डिग्री रोजगार की गारंटी नहीं है। युवाओं को अपने विषय के ज्ञान के साथ संचार, डिजिटल तकनीक और समस्या समाधान जैसे कौशल भी विकसित करने होंगे। उन्होंने कहा कि करियर में आगे बढ़ने के लिए लगातार सीखते रहना जरूरी है। थानवी ने कहा कि डिजिटल माध्यमों ने युवाओं के लिए सीखने और काम करने की संभावनाओं का दायरा बढ़ाया है। छोटे शहरों और कस्बों में रहने वाले युवा भी डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से देश-दुनिया के अवसरों तक पहुंच बना सकते हैं। इसके लिए जरूरी है कि वे तकनीक को समझें और उसका उपयोग अपने लक्ष्य के अनुरूप करें।
शिक्षाविद डॉ. जयप्रकाश ने कहा कि एआइ शिक्षा और सीखने की प्रक्रिया को आसान बनाने में सहायक हो सकता है, लेकिन इसे ज्ञान का विकल्प नहीं माना जा सकता। युवाओं को तकनीक की सहायता लेते हुए अपनी समझ, तर्क क्षमता और रचनात्मक सोच विकसित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में वही युवा अधिक प्रभावी साबित होंगे, जो तकनीकी बदलावों के साथ खुद को लगातार अपडेट करेंगे। एआइ को लेकर डरने के बजाय इसकी कार्यप्रणाली और उपयोग की सीमाओं को समझना जरूरी है।
वर्कशॉप में युवाओं ने एआइ से जुड़े विभिन्न सवाल पूछे। डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल किस तरह पढ़ाई, रोजगार और रोजमर्रा के काम को आसान बना सकता है, इस पर व्यावहारिक जानकारी दी गई। साथ ही एआइ के इस्तेमाल में तथ्य-जांच और जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार की जरूरत भी बताई गई।
कार्यक्रम का संचालन आशीष थानवी ने किया। इस मौके पर छगनगिरी महाराज भी मौजूद थे।