जैसलमेर

विष्णु आराधना: पद्मिनी एकादशी पर शुभ संयोगों से बढ़ेगा पूजा और व्रत का महत्व

श्रद्धालुओं के लिए यह दिन आध्यात्मिक उन्नति, सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति का श्रेष्ठ अवसर माना जा रहा है। इस बार एकादशी पर सर्वार्थसिद्धि, आनंद और सिद्धि जैसे शुभ योगों का प्रभाव रहेगा।

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May 21, 2026
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पवित्र पद्मिनी एकादशी इस बार विशेष धार्मिक और ज्योतिषीय संयोगों के कारण अत्यंत फलदायी मानी जा रही है। अधिकमास की पद्मिनी एकादशी 27 मई के अवसर पर हस्त और चित्रा नक्षत्र के साथ बुधवार का दुर्लभ संयोग बनने जा रहा है, जिससे इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना और व्रत का महत्व कई गुना बढ़ जाएगा। श्रद्धालुओं के लिए यह दिन आध्यात्मिक उन्नति, सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति का श्रेष्ठ अवसर माना जा रहा है। इस बार एकादशी पर सर्वार्थसिद्धि, आनंद और सिद्धि जैसे शुभ योगों का प्रभाव रहेगा। ऐसे संयोग वर्षों बाद बनते हैं, इसलिए धार्मिक दृष्टि से यह तिथि बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की उपासना, दान-पुण्य और व्रत करने से सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक पुण्यफल प्राप्त होता है।

भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की करें पूजा

श्रद्धालुओं से कहा गया है कि वे प्रात:काल स्नान के बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधिवत पूजा करें। तुलसी पत्र, पीले पुष्प और पंचामृत से पूजन करने का विशेष महत्व रहेगा। मंदिरों में भी विशेष सजावट और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। शहर के विष्णु और कृष्ण मंदिरों में भजन-कीर्तन तथा आरती के आयोजन होंगे। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस दिन चंद्रमा का प्रभाव भी शुभ स्थिति में रहेगा, जिससे कई राशियों के जातकों के लिए यह समय लाभकारी माना जा रहा है। विशेष रूप से व्यापार, शिक्षा और नौकरी से जुड़े लोगों को सकारात्मक परिणाम मिलने के संकेत बताए जा रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन उपवास रखने और सात्विक जीवनचर्या अपनाने से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।

संयम, ध्यान व हरि स्मरण से सकारात्मक बदलाव संभव

ज्योतिषाचार्य उमेश आचार्य ने बताया कि एकादशी केवल धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि आत्मसंयम और आध्यात्मिक साधना का पर्व भी है। इस दिन संयम, ध्यान और भगवान के स्मरण से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं। श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत एवं पूजा कर इस दुर्लभ संयोग का लाभ उठाएं।

तीन तालाबों के जीर्णोद्धार का कार्य शुरू

पोकरण क्षेत्र के माड़वा, एकां व डिडाणिया गांवों के प्रमुख ऐतिहासिक तालाबों के जीर्णोद्धार का गुरुवार को कार्य शुरू किया गया। गौरतलब है कि गांवों में स्थित तालाबों की वर्षों से खुदाई व सफाई नहीं होने के कारण पायतन में अथाह रेत के भंडार है। जिसके कारण बारिश के बाद पानी कम समय ही टिक पाता है। इसी को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता और ओरण, गोचर, तालाब व आगोर संरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक बलवंतसिंह जोधा की ओर से जनसहयोग से क्षेत्र के प्रमुख तीन गांवों के तालाबों का जीर्णोद्धार के लिए चयन किया गया है। माड़वा, एकां व डिडाणिया गांवों के तालाबों पर जनसहयोग से धनराशि एकत्रित कर खुदाई, सफाई के साथ जीर्णोद्धार का कार्य शुरू किया गया है। गुरुवार को सुबह बांदोलाई तालाब के महंत अनूपपुरी महाराज व पंडित देवीलाल बिस्सा के सानिध्य में विधिवत पूजा-अर्चना की गई। सामाजिक कार्यकर्ता जोधा की ओर से कस्बे व आसपास क्षेत्र के आधा दर्जन से अधिक तालाबों के जीर्णोद्धार का कार्य करवाया गया है। अब तीन तालाबों के जीर्णोद्धार का कार्य शुरू किया गया है। उन्होंने बताया कि भीषण गर्मी के मौसम में तालाबों में पानी सूख जाने पर ग्रामीणों के साथ मवेशी को परेशानी होती है। इसी को लेकर मानसून से पूर्व तालाबों के जीर्णोद्धार का कार्य करवाया जा रहा है, ताकि मानसून सीजन में इन तालाबों में लबालब पानी भर सके और क्षेत्र के ग्रामीणों व मवेशी को राहत मिल सके।

Published on:
21 May 2026 08:49 pm
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