- स्टाफिंग पैटर्न लागू करने से जैसलमेर-बाड़मेर जैसे जिलों की उ मीदें बढ़ी- कोरोना काल में सरकारी स्कूलों में बढ़ गया नामांकन
जैसलमेर. प्रदेश में नए शिक्षामंत्री के पदभार संभालने के बाद सरकार को करीब पांच साल बाद स्टाफिंग पैटर्न लागू करने की याद आई है। इससे जैसलमेर और बाड़मेर जैसे सीमावर्ती जिलों में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के नए पद सृजन की प्रक्रिया में तेजी से लाभ मिलने की संभावनाएं जगी है। गौरतलब है कि स्टाफिंग पैटर्न लागू किए जाने से विद्यार्थियों के नामांकन के आधार पर शिक्षकों के पद सृजित किए जाते हैं। कोरोना काल में लोगों को हुए अनुभवों के बाद जिले के सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ गया है। वर्तमान में करीब एक लाख चालीस हजार छात्र-छात्राएं जैसलमेर जिले के सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत हैं। गौरतलब है कि प्रदेश में पूर्ववर्ती वसुंधरा सरकार ने वर्ष 2014 में स्टाफिंग पैटर्न लागू किया था। जिसमें प्रति दो साल बाद समीक्षा करने का प्रावधान था। इसके चलते साल 2016 में इस पैटर्न की समीक्षा हुई, जिससे जैसलमेर जिले में भी सरकारी स्कूलों में प्राथमिक से उच्च माध्यमिक स्तर तक नए शिक्षक मिले। तब से पांच साल बीत जाने के बाद अब शिक्षा विभाग को स्टाफिंग पैटर्न की याद आई है। हालांकि सबसे कम घनत्व वाले जैसलमेर जिले में अपनी समस्याएं हैं। जिसका समाधान सरकार नियमों में शिथिलता देकर ही कर सकती है।
कम आबादी की समस्या
स्टाफिंग पैटर्न से सीमावर्ती जैसलमेर और बहुत हद तक बाड़मेर जैसे कम जन घनत्व वाले जिलों के साथ एक तरह से अन्याय भी होता रहा है। पहले स्कूलों में शिक्षकों के पद आवश्यकता के अनुसार स्थापित किए जाते थे। उस समय जैसलमेर-बाड़मेर जिलों में शिक्षकों की कमी थी। फिऱ सरकार को केवल इन पिछड़े जिलों की हालत को देखकर इन जिलों को डार्क जोन घोषित करना पड़ा। स्टाफिंग पैटर्न व्यवस्था लागू किए जाने से कक्षा एक से आठ तक को पढ़ाने वाले शिक्षकों को एल वन और एल टू में विभाजित किया गया। विद्यालय में नामांकन को आधार बनाकर अध्यापकों के पद सृजित किए गए। एल टू अध्यापक को भी तीन विषय वर्ग में बांट दिया गया। एल टू सामाजिक, एल टू गणित/विज्ञान और एल टू भाषा। इसमें एल टू भाषा को फिर अंग्रेजी, हिन्दी और तृतीय भाषा संस्कृत/उर्दू में विभक्त किया। कई शिक्षक संगठनों ने सरकार का ध्यान इस ओर आकृष्ट करवाया कि नामांकन के आधार पर पद सृजन से ग्रामीण इलाकों में बड़ी समस्याएं हो रही है। यह मापदंड बड़े भौगोलिक और कम जनसं या वाले जिलों जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर आदि के लिए समस्यामूलक है। सरकार ने इसे अनसुना किया।
तीन साल तक यथास्थितिवाद
2018 में नई सरकार बनने के तीन साल तक व्यावहारिक समस्याओं को ध्यान में रखकर बदलाव की प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। अब जबकि प्रदेश में एक शिक्षक को शिक्षामंत्री का दायित्व दिया गया है तो जैसलमेर सहित अन्य वंचित जिलों की उ मीदें परवान पर चढ़ी हैं। पूर्व में शिक्षा विभाग ने जैसलमेर-बाड़मेर जिलों की जमीनी हकीकत को नजरअंदाज ही किया है। शैक्षणिक दृष्टिकोण से पिछड़े इन जिलों में आजादी के 75 साल बाद उपयोगिता के आधार पर कदम बढ़ाए जाने की जरूरत है। गौरतलब है कि कम जनाधिक्य वाले जैसलमेर जैसे जिलों में इसी सरकार ने नई पंचायतों के गठन मे शिथिलता दी थी। शिक्षा के क्षेत्र में स्टाफिंग पैटर्न वही रखा जा रहा है जो पांच सौ व्यक्ति प्रति किलोमीटर से ज्यादा या इसके आसपास वाले जिलों में है। स्टाफिंग पैटर्न में तृतीय भाषा के रूप में संस्कृत के साथ अन्याय होने के तथ्य भी सामने आए हैं।
फैक्ट फाइल -
- 01 लाख 39 हजार 626 विद्यार्थी सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत
- 1290 कुल सरकारी स्कूल जिले में
- 1235 में सहशिक्षा, 58 बालिका स्कूल
जिले के हितों की करेंगे पहरेदारी
सीमावर्ती जिले के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों का नामांकन बढऩा यहां शिक्षा की गुणवत्ता को इंगित भी करता है। यह सिलसिला बना रहे इसके लिए हरसंभव कदम उठाए जाएंगे। जिले के हितों की पहरेदारी करना हमारा कर्तव्य है। भौगोलिक परिस्थितियों के मद्देनजर जिले के विद्यालयों में पद सृजित करवाए जाएंगे।
-शाले मोहम्मद, केबिनेट मंत्री और पोकरण विधायक
कमी नहीं रहने देंगे
जैसलमेर जिला आकांक्षी जिला योजना में शामिल है। इस सीमावर्ती जिले में पदों के अनुपात में नियुक्ति करने की दिशा में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जा रही है। सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्तियां भी कम नामांकन के बावजूद करवाई गई है। भविष्य में भी इसका ख्याल रखा जाएगा।
- रूपाराम धनदेव, विधायक जैसलमेर
शिथिलता दी जाए
स्टाफिंग पैटर्न में शिक्षा निदेशालय को जैसलमेर, बाड़मेर आदि पिछड़े जिलों में शिथिलता दी जानी चाहिए। शिक्षा की कम सुविधाओं के कारण विद्यार्थियों को बाहरी शहरों की तरफ उन्मुख होना पड़ रहा है। गरीब अभिभावकों के बच्चों के साथ अन्याय हो रहा है।
- प्रकाश विश्रोई, प्रदेशमंत्री, राज. शिक्षक एवं पंचायतीराज कर्मचारी संघ