जैसलमेर. शहर की सफाई व्यवस्था को आधुनिक बनाने और वैज्ञानिक तरीके से कचरा निस्तारण के लिए बड़ाबाग क्षेत्र में नगरपरिषद के दावों से हकीकत जुदा है। जब पत्रिका टीम मौके पर पहुंची तो डम्पिंग यार्ड में स्थापित मशीनें महज शोपीस बनी दिखाई दी।
जैसलमेर. शहर की सफाई व्यवस्था को आधुनिक बनाने और वैज्ञानिक तरीके से कचरा निस्तारण के लिए बड़ाबाग क्षेत्र में नगरपरिषद के दावों से हकीकत जुदा है। जब पत्रिका टीम मौके पर पहुंची तो डम्पिंग यार्ड में स्थापित मशीनें महज शोपीस बनी दिखाई दी।
मौके पर पाया कि गीले और सूखे कचरे के पृथक्करण तथा निस्तारण के लिए लगाई गई मशीनें महीनों से बंद पड़ी हैं। हालांकि इस संबंध में नगरपरिषद प्रशासन का दावा है कि डम्पिंग यार्ड की चार दीवारी के बाहर हजारों टन कचरा जमा था, उसकी सफाई के लिए संबंधित ठेकेदार की ओर से उक्त मशीन लगाई गई थी। कार्य पूरा होने के बाद उक्त मशीन को ठेकेदार की ओर से ले जाया जाना शेष है। हकीकत यह है कि डम्पिंग यार्ड में कचरे का ढेर लगातार बढ़ रहे हैं और आसपास के क्षेत्र में धूल, दुर्गंध और प्रदूषण की समस्या गंभीर होती जा रही है।
तेज हवाओं के दौरान आसपास के क्षेत्रों तक धूल और दुर्गंध फैलती है, जिससे लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। वहीं बरसात के मौसम में यही कचरा संक्रमण और बीमारियों का कारण बनने की आशंका पैदा करता है। जानकारों के अनुसार मशीनों के नियमित रख-रखाव और संचालन के अभाव में बेशकीमती संसाधन धीरे-धीरे कबाड़ में तब्दील हो रहे हैं। कई उपकरण खुले में पड़े रहने से जंग खा रहे हैं। तकनीकी निगरानी और जिम्मेदारी तय नहीं होने से स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।
शहर में स्वच्छता को लेकर लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं और नगरपरिषद की ओर से सफाई व्यवस्था बेहतर होने के दावे भी किए जाते हैं, लेकिन डम्पिंग यार्ड की वास्तविक स्थिति इन दावों की पोल खोल रही है। कचरा निस्तारण की मूल व्यवस्था ही प्रभावित होने से शहर की संपूर्ण सफाई प्रणाली पर असर पड़ रहा है।
नगरपरिषद की ओर से डम्पिंग यार्ड के बाहर जमा हजारों टन कचरा विगत समय में साफ करवाया जा चुका है। इस कार्य में संबंधित ठेकेदार की तरफ से प्रयुक्त एक मशीन उठाई जानी शेष है। यह नगरपरिषद की सम्पति नहीं है।
-लजपालसिंह, आयुक्त, नगरपरिषद जैसलमेर