
जैसलमेर. जिला मुख्यालय स्थित राजकीय जिला चिकित्सालय।
जैसलमेर. जिला मुख्यालय के राजकीय जवाहिर चिकित्सालय में सोनोग्राफी सेंटर विगत दो वर्ष से अधिक समय से रेडियोलॉजिस्ट के अभाव में ठप होने के कारण मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट की उपलब्धता नहीं होने से सोनोग्राफी जांच व्यवस्था चरमरा गई है और इसका सीधा असर गर्भवती महिलाओं, बुजुर्ग मरीजों तथा गंभीर बीमारियों की जांच करवाने आने वाले लोगों पर पड़ रहा है। मजबूरी में मरीजों को निजी लैब्स का रुख करना पड़ रहा है, जहां जांच के लिए करीब 800 से 1000 रुपए चुकाने पड़ रहे हैं।
जिला अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्रामीण क्षेत्रों से मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। इनमें गर्भवती महिलाओं की संख्या भी काफी रहती है। चिकित्सकों की ओर से नियमित जांच और प्रसव पूर्व स्वास्थ्य परीक्षण के लिए सोनोग्राफी आवश्यक बताई जाती है, लेकिन अस्पताल में यह सुविधा नहीं होने से महिलाओं को निजी सेंटरों में जाना पड़ रहा है। कई मामलों में मरीजों को जांच के लिए समय लगता है, जबकि गंभीर स्थिति में तत्काल रिपोर्ट की आवश्यकता रहती है। एक अनुमान के अनुसार जिला अस्पताल से प्रतिदिन 30 से 40 मरीज सोनोग्राफी के लिए निजी केंद्रों पर जाते हैं।
निजी लैब्स में सोनोग्राफी जांच की दरें सामान्य परिवारों के लिए परेशानी का कारण बन रही हैं। एक सामान्य सोनोग्राफी के लिए भी सैकड़ों से हजार रुपए तक खर्च करना पड़ रहा है। ग्रामीण इलाकों से आने वाले परिवारों को जांच के साथ यात्रा और अन्य खर्च भी उठाने पड़ते हैं। ऐसे में गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों का स्वास्थ्य बजट पूरी तरह बिगड़ रहा है। कई मरीज आर्थिक तंगी के कारण जांच टालने को मजबूर हो रहे हैं, जिससे बीमारी की समय पर पहचान नहीं हो पा रही। ग्रामीण क्षेत्र से आई एक गर्भवती महिला के परिजनों ने बताया कि जिला अस्पताल में जांच नहीं होने पर उन्हें निजी सेंटर जाना पड़ा, जहां जांच के लिए अपेक्षा से अधिक राशि देनी पड़ी। वहीं कई मरीजों ने बताया कि सरकारी अस्पताल में सुविधा नहीं मिलने से निजी लैब संचालकों की मनमानी बढ़ रही है और मरीजों के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं बचता।
स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े जानकारों का कहना है कि जिला अस्पताल जैसे प्रमुख संस्थान में रेडियोलॉजिस्ट का पद इतने लम्बे समय तक खाली रहना गंभीर चिंता का विषय है। सोनोग्राफी केवल सामान्य जांच नहीं, बल्कि गर्भावस्था, पेट संबंधी बीमारियों, किडनी, लीवर और अन्य रोगों के निदान के लिए अत्यंत आवश्यक जांच मानी जाती है। ऐसे में व्यवस्था प्रभावित होने से मरीजों की उपचार प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है। इधर, आमजन की ओर से कई बार राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग से जिला अस्पताल में स्थायी रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति कर सोनोग्राफी सेवा को नियमित रूप से शुरू कराने की मांग की जा रही है। जिससे मरीजों को राहत मिल सके और उन्हें निजी जांच केंद्रों की महंगी सेवाओं पर निर्भर नहीं रहना पड़े।
जिला अस्पताल में दो वर्ष से अधिक समय से रेडियोलॉजिस्ट का पद रिक्त होने से सोनोग्राफी जांच की सुविधा बंद है। इस समस्या के लिए लगातार उच्च स्तर पर अवगत करवाया जाता रहा है।
- डॉ. रविन्द्र सांखला, पीएमओ, जवाहिर चिकित्सालय, जैसलमेर
Published on:
28 May 2026 09:05 pm
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