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मैदान में सर्वे, शाम को अध्ययन…शिक्षकों पर दोहरी जिम्मेदारी का दबाव

मुद्दा इसलिए भी बड़ा माना जा रहा है क्योंकि बीते महीनों में शिक्षकों का बड़ा वर्ग नियमित शिक्षण के साथ कई प्रशासनिक अभियानों में लगातार सक्रिय रहा। अब परीक्षा से ठीक पहले समय प्रबंधन और तैयारी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

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एक तरफ घर-घर पहुंचकर सरकारी अभियानों का लक्ष्य पूरा करने की जिम्मेदारी, दूसरी तरफ जीवन बदलने वाली प्रतियोगी परीक्षा। प्रदेश के हजारों शिक्षकों के सामने इन दिनों यही सबसे बड़ा समीकरण खड़ा है। 31 मई से शुरू होकर 11 जून तक प्रस्तावित प्राध्यापक (स्कूल शिक्षा), कृषि एवं कोच भर्ती परीक्षा अवसर और प्रशासनिक दायित्वों के संतुलन की बन गई है।

मुद्दा इसलिए भी बड़ा माना जा रहा है क्योंकि बीते महीनों में शिक्षकों का बड़ा वर्ग नियमित शिक्षण के साथ कई प्रशासनिक अभियानों में लगातार सक्रिय रहा। अब परीक्षा से ठीक पहले समय प्रबंधन और तैयारी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। प्रश्न यह उठ रहा है कि क्या लगातार मैदानी जिम्मेदारियों के बीच उच्च स्तरीय प्रतियोगी परीक्षा में समान प्रतिस्पर्धा संभव है?

आंकड़ों में पूरी तस्वीर

-27 विषयों में 3225 पदों पर भर्ती परीक्षा प्रस्तावित

-परीक्षा अवधि : 31 मई से 11 जून 2026

-शिक्षा विभाग में लगभग चार लाख शिक्षक कार्यरत

-अनुमानित 2 लाख शिक्षक परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े

- 60 हजार BLO और 11 हजार सुपरवाइजर अतिरिक्त दायित्व संभाल रहे

- करीब 71 हजार शिक्षक समानांतर प्रशासनिक जिम्मेदारियों में सक्रिय

कहां बन रहा है वास्तविक दबाव ?

शिक्षकों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षा केवल पाठ्यक्रम पूरा करने से नहीं निकलती। निर्णायक भूमिका अंतिम दिनों की तैयारी, नोट्स दोहराने और विषयों की पुनरावृत्ति की होती है। लेकिन पिछले महीनों में बड़ी संख्या में शिक्षक फील्ड आधारित कार्यों में व्यस्त रहे। सुबह विद्यालय, उसके बाद सर्वे, रिकॉर्ड अपडेट, दस्तावेज प्रक्रिया और प्रशासनिक लक्ष्य — ऐसे में दिन का बड़ा हिस्सा नियमित पढ़ाई से बाहर निकल जाता है।

डेटा एनालिसिस : प्रतिस्पर्धा का गणित

यदि अनुमानित दो लाख शिक्षक भर्ती परीक्षा में शामिल होते हैं और कुल पद संख्या 3225 रहती है, तो स्थिति कुछ ऐसी बनती है—

200000 अभ्यर्थी : 3225 पद

यानी लगभग 62 अभ्यर्थियों के बीच एक पद।

बड़ा सवाल: पदोन्नति का रास्ता कितना खुला?

तृतीय श्रेणी शिक्षकों के लिए प्राध्यापक भर्ती केवल परीक्षा नहीं, बल्कि करियर ग्रोथ का महत्वपूर्ण अवसर मानी जाती है। ऐसे में परीक्षा कैलेंडर और प्रशासनिक कार्यों के बीच टकराव को लेकर चर्चाएं तेज हुई हैं।

संभावित विकल्प —

► बड़े सर्वे और भर्ती प्रक्रियाओं के लिए अलग समय खंड तय हों

► मैदानी ड्यूटी वाले कर्मचारियों को तैयारी विंडो मिले

► वार्षिक भर्ती कैलेंडर पहले से सार्वजनिक हो

► प्रशासनिक कार्य और प्रतियोगी परीक्षाओं का ओवरलैप कम किया जाए

एक और द्वितीय श्रेणी भर्ती परीक्षा का समय सारणी जारी होने से जनगणना में लगे शिक्षकों की धड़कने बढ़ी

जिनमें अध्यापक लेवल वन, लेवल द्वितीय आदि शिक्षक परीक्षा में शामिल होंगे मगर जनगणना में लगे होने के कारण उनको तैयारी का अवसर नहीं मिलेगा।

12 जुलाई से होगी वरिष्ठ अध्यापक भर्ती

आरपीएससी ने वरिष्ठ अध्यापक भर्ती के तहत 6500 पद का विषयवार परीक्षा कार्यक्रम जारी किया। परीक्षाएं 12 जुलाई से 18 जुलाई 2026 तक संपादित होगी।

एक्सपर्ट व्यू : स्मार्ट कैलेंडर मॉडल तैयार करने की जरूरत

स्मार्ट कैलेंडर मॉडल तैयार करने की जरूरत है। यह केवल परीक्षा तिथि का विषय नहीं, बल्कि समान अवसर का मुद्दा है। सरकारी अभियानों में सक्रिय शिक्षकों को भी प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं के लिए संतुलित समय मिलना चाहिए। जब प्रतियोगिता इतनी तीखी हो, तब अंतिम सप्ताह की तैयारी कई बार चयन और असफलता के बीच अंतर तय करती है।

- प्रकाश बिश्नोई खारा, प्रदेश उपाध्यक्ष, राजस्थान पंचायती राज एवं माध्यमिक शिक्षक संघ