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Jaisalmer News: डम्पिंग यार्ड की बदहाली से त्रस्त बड़ाबाग के ग्रामीण, वर्षों से झेल रहे दुर्गंध और बीमारी का संकट

यह समस्या नई नहीं है, बल्कि वर्षों से बड़ाबाग क्षेत्र के करीब डेढ़ हजार लोग डम्पिंग यार्ड से उठने वाली दुर्गंध, मक्खियों की बहुतायत, गंदगी और बीमारियों के खतरे को झेल रहे हैं। नगरपरिषद की ओर से शहर का कचरा और मृत पशुओं को खुले में फेंकने से पूरे इलाके का वातावरण दूषित हो रहा है।
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जैसलमेर

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Deepak Vyas

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Updated: 27 May 2026, 8:42 PM IST

bada bag dumping yard

जैसलमेर. बड़ा बाग डम्पिंग यार्ड में जमा कचरा। पत्रिका

जैसलमेर शहर के निकट बड़ा बाग क्षेत्र में स्थित नगरपरिषद के डम्पिंग यार्ड की अव्यवस्थाएं एक बार फिर चर्चा में हैं। हाल ही में यहां सैकड़ों की संख्या में मृत गोवंश के बिखरे शवों के मामले को राजस्थान पत्रिका ने प्रमुखता से उठाया और उसके बाद प्रशासन और नगरपरिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। यह समस्या नई नहीं है, बल्कि वर्षों से बड़ाबाग क्षेत्र के करीब डेढ़ हजार लोग डम्पिंग यार्ड से उठने वाली दुर्गंध, मक्खियों की बहुतायत, गंदगी और बीमारियों के खतरे को झेल रहे हैं। नगरपरिषद की ओर से शहर का कचरा और मृत पशुओं को खुले में फेंकने से पूरे इलाके का वातावरण दूषित हो रहा है।

गर्मी और बारिश के मौसम में हालात और भी भयावह हो जाते हैं। सड़ते शवों और कचरे से उठने वाली दुर्गंध कई किलोमीटर दूर तक फैलती है। इसके कारण आसपास की आबादी का रहना मुश्किल हो गया है। वहीं चारदीवारी और फेंसिंग नहीं किए जाने से इस डम्पिंग यार्ड में आवारा श्वानों और अन्य जानवरों का जमावड़ा भी लगातार बढ़ रहा है।

कचरा निस्तारण की वैज्ञानिक व्यवस्था नहीं

पत्रिका पड़ताल में यह बात सामने आई है डम्पिंग यार्ड को व्यवस्थित करने और वैज्ञानिक तरीके से कचरा निस्तारण की योजनाएं केवल कागजों तक सीमित रह गई हैं। कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को शिकायतें देने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया। ग्रामीणों ने इसी कारण गत लोकसभा चुनाव के दौरान इस मुद्दे को लेकर क्षेत्रवासियों ने चुनाव बहिष्कार तक की चेतावनी दी थी। उस समय प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने शीघ्र समाधान का भरोसा दिया था, लेकिन आज तक हालात जस के तस बने हुए हैं।

माना जाता है कि डम्पिंग यार्ड के कारण क्षेत्र की जमीन और जल स्रोत भी प्रभावित हो रहे हैं। बरसात के दिनों में गंदा पानी आसपास के क्षेत्रों में फैल जाता है, जिससे संक्रमण और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। वहीं पर्यटन नगरी जैसलमेर की छवि पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ रहा है, क्योंकि बड़ाबाग क्षेत्र पर्यटकों की आवाजाही वाला इलाका माना जाता है।

ग्रामीण बोले- केवल ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई किए जाने से क्या होगा ?

हालिया घटनाक्रम के बाद नगरपरिषद प्रशासन ने संबंधित ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट किया है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि केवल ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई किए जाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने डम्पिंग यार्ड को आबादी से दूर स्थानांतरित करने, मृत पशुओं के वैज्ञानिक निस्तारण और नियमित निगरानी की मांग उठाई है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाए गए तो वे फिर से आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।

कोई सुनवाई नहीं हो रही

बड़ाबाग क्षेत्र में स्थित डम्पिंग यार्ड से ग्रामीण बुरी तरह से परेशान हैं। यह समस्या कोई डेढ़ दशक पुरानी है। हर स्तर पर गुहार लगाए जाने के बावजूद समस्या जस की तस है। वैज्ञानिक ढंग से कचरा निस्तारण और मृत पशुओं के शवों का निस्तारण किए जाने की आवश्यकता है।

- कल्याणाराम, प्रशासक, बड़ाबाग

घरों में रहना मुश्किल हुआ

डम्पिंग यार्ड की बदबू और गंदगी से वर्षों से परेशान हैं। गर्मियों में घरों में बैठना मुश्किल हो जाता है। कई बार शिकायतें की, लेकिन कोई स्थायी कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे ही हालात रहे तो ग्रामीण आंदोलन करने पर विवश होंगे।

- देवकाराम माली, पूर्व सरपंच

कचरा प्रबंधन की उचित व्यवस्था नहीं

शहर में कचरा प्रबंधन की उचित व्यवस्था न होने के कारण कचरा खुले में फेंका जा रहा है। जिससे न केवल बदबू और गंदगी फैल रही है बल्कि बीमारियां फैलने का भी खतरा बढ़ गया है। नगरपरिषद का डंपिंग यार्ड स्थानीय निवासियों के लिए चिंता का विषय बन गया है।

- हाकमदान, सामाजिक कार्यकर्ता