
लाठी. पोकरण विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत लाठी में पंचायतीराज चुनाव के बीच अकाल, पेयजल संकट और पशुओं के लिए चारे की कमी प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं। करीब 8 हजार की आबादी और 3400 मतदाताओं वाली इस ग्राम पंचायत में ग्रामीण लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं के समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इस बार अकाल ने पशुपालकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पशुओं के लिए चारा जुटाना और पेयजल की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती बन गया है। गांव में बड़ी संख्या में गोवंश और हजारों भेड़-बकरियां हैं। आबादी का बड़ा हिस्सा पशुपालन पर निर्भर है। ग्रामीणों के अनुसार, अकाल के कारण खेतों और आसपास के क्षेत्रों में हरा व सूखा चारा उपलब्ध नहीं है। कीमत चुकाने के बावजूद चारा मिलना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में पशुओं को बचाने के लिए पशुपालकों को पानी और चारे की तलाश में दूर-दराज के क्षेत्रों तक जाना पड़ रहा है।
जल जीवन मिशन के तहत गांव में घर-घर पाइपलाइन बिछाकर पेयजल कनेक्शन दिए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कनेक्शन के लिए राशि चुकाने के बावजूद नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित नहीं हो पाई है। कई परिवारों को कनेक्शन मिलने के बाद कुछ ही बार पानी मिला। अकाल के बीच पेयजल की अनियमित आपूर्ति से घरेलू जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो रहा है।.ग्रामीणों की मांग है कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए पेयजल टैंकर शुरू किए जाएं, नर्मदा नहर का पानी नियमित उपलब्ध कराया जाए और पशुओं के लिए चारा डिपो खोले जाएं। उनका कहना है कि समय पर राहत नहीं मिलने से पशुपालकों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।
पशुपालक जयप्रकाश देवड़ा के अनुसार इस बार हालात बेहद कठिन हैं। उनके मुताबिक, गांव में करीब 6 हजार गोवंश के साथ बड़ी संख्या में भेड़-बकरियां हैं। अकाल के कारण पशुओं के लिए चारा जुटाना मुश्किल हो गया है। करीब 1000 रुपए प्रति मण कीमत चुकाने पर भी कुतर उपलब्ध नहीं हो रही है। ऐसे में पशुपालकों को पानी और चारे की उपलब्धता वाले स्थानों तक पशुओं को ले जाना पड़ रहा है।
लाठी के मुख्य बाजार में क्षतिग्रस्त नालियां और जल निकासी की समस्या ग्रामीणों के लिए परेशानी बनी हुई है। राष्ट्रीय राजमार्ग की ओर से बनाए गए नाले लंबे समय से क्षतिग्रस्त बताए जा रहे हैं। बारिश के दौरान इससे पानी की निकासी प्रभावित होती है। दुकानों के सामने इंटरलॉकिंग टाइल्स नहीं होने से कीचड़ फैल जाता है और आवाजाही में परेशानी होती है।
ग्रामीणों के अनुसार, गांव की कई गलियों में अतिक्रमण के कारण आवागमन प्रभावित होता है। आगजनी की स्थिति में तत्काल राहत के लिए स्थानीय स्तर पर दमकल सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में पोकरण या जैसलमेर से दमकल पहुंचने तक आग से नुकसान बढ़ने की आशंका बनी रहती है।
पंचायतीराज चुनाव के बीच गांव में राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं, लेकिन ग्रामीणों की प्राथमिकता पानी, चारा और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का समाधान है। पशुपालक चाहते हैं कि चुनाव के बाद ग्राम पंचायत स्तर पर इन मुद्दों को प्राथमिकता मिले और राहत के साथ स्थायी समाधान की दिशा में काम हो।
ग्राम पंचायत लाठी जिला परिषद के वार्ड संख्या 19 में आती है। इस वार्ड में जिला परिषद सदस्य का पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित है। यहां भाजपा, कांग्रेस और ओरण टीम की ओर से प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। पंचायत समिति रामदेवरा का वार्ड संख्या 1 भी इसी क्षेत्र से शुरू होता है और सामान्य पुरुष के लिए आरक्षित है। ग्राम पंचायत में मुस्लिम, मेघवाल, दर्जी, नाई, सुथार और भील सहित विभिन्न सामाजिक वर्गों की आबादी है। सरपंच पद के लिए आरक्षण के बाद कई दावेदार सक्रिय हैं। चुनावी चर्चा के बीच ग्रामीणों की अपेक्षा है कि नई पंचायत अकाल से प्रभावित पशुपालकों को राहत दिलाने के साथ पेयजल आपूर्ति, सड़क, नालियों और अतिक्रमण जैसी समस्याओं के समाधान पर भी ठोस काम करे।