
पोकरण क्षेत्र में जीएलआर, पशुखेलियों व पशुकुंड की सफाई नहीं हो रही है, जिसके कारण ग्रामीण दूषित पानी पीने को मजबूर है। गांवों व ढाणियों में पेयजल सुविधा को लेकर जीएलआर का निर्माण करवाया जाता है, साथ ही मवेशी के लिए पशुखेली व पशुकुंड बनाए जाते है। कई जगहों पर ग्राम पंचायतों की ओर से भी जीएलआर, पशुखेली व पशुकुंड बनाए जाते है और निर्माण के बाद उन्हें जलदाय विभाग को सुपुर्द कर दिया जाता है। इनकी समय पर सफाई नहीं होने के कारण ग्रामीण दूषित पानी पीने को मजबूर हो रहे है। जबकि जिम्मेदार कोई कार्रवाई नहीं कर रहे है।
छह महिनों में एक बार सफाई का नियम
ग्रामीण क्षेत्रों में निर्मित जीएलआर, पशुखेली व पशुकुंड की छह महिने में एक बार सफाई का नियम है। इसके साथ ही सफाई कर जीएलआर पर तारीख भी अंकित की जाती है। इसके लिए जलदाय विभाग की ओर से कनिष्ठ अभियंता क्षेत्रवार ठेका भी दिया जाता है, ताकि समय पर सफाई हो सके और ग्रामीणों को शुद्ध पानी मुहैया हो सके। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में जीएलआर, पशुखेली व पशुकुंड की समय पर सफाई नहीं हो रही है। हालात यह है कि कई जगहों पर जीएलआर पर लिखी तारीखें तक मिट चुकी है। यही नहीं कई जीएलआरों में महिनों से जलापूर्ति बंद होने की स्थिति में पक्षियों ने घौंसले तक बना दिए है।
दूषित पानी से बीमारियां फैलने की आशंका
ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल सुविधा को लेकर निर्मित जीएलआर, पशुखेली व पशुकुंडों में समय पर सफाई नहीं होने के कारण गंदगी व कचरा जमा पड़ा है। जिसके कारण जलापूर्ति के दौरान पानी दूषित हो जाता है। इसी पानी का ग्रामीण उपयोग करते है। ऐसे में उनमें बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ गया है। बावजूद इसके जिम्मेदारों की ओर से समय पर सफाई को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।