जैसलमेर

केरालिया में जलापूर्ति ठप…ग्रामीणों का विरोध प्रदर्शन

लाठी क्षेत्र के केरालिया गांव में पिछले एक पखवाड़े से जलापूर्ति व्यवस्था ठप होने के कारण ग्रामवासियों ने शुक्रवार को विरोध प्रदर्शन किया।

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Apr 17, 2026

लाठी क्षेत्र के केरालिया गांव में पिछले एक पखवाड़े से जलापूर्ति व्यवस्था ठप होने के कारण ग्रामवासियों ने शुक्रवार को विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान ग्रामीणों ने जलदाय विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते जलापूर्ति सुचारू नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन और धरने पर उतरेंगे। गांव के सामाजिक कार्यकर्ता देवी भाटी ने बताया कि कुछ वर्ष पहले केरालिया गांव के राजपूत मोहल्ले, सुथार मोहल्ले, मुस्लिम मोहल्ले, गोस्वामी मोहल्ले, मगणिंयार मोहल्ले एवं भील मोहल्ले के रहवासियों को पेयजल उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से जलदाय विभाग ने एक नलकूप खुदवाया था। यह नलकूप पिछले एक पखवाड़े से खराब है, जिसके कारण गांव के विभिन्न मोहल्लों में जलापूर्ति पूरी तरह से ठप हो गई है। भाटी के अनुसार, इससे मोहल्लेवासियों को महंगे दामों में पानी खरीद कर उपयोग में लेना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि गर्मी के कारण पशुओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने इस समस्या को लेकर कई बार जिम्मेदार विभाग के अधिकारियों को सूचित किया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। मोहल्लेवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते जल आपूर्ति नहीं की गई तो जलदाय विभाग के समक्ष धरना प्रदर्शन किया जाएगा। इस दौरान मगसिंह भाटी, सतार खां, शायब खां, देवीसिंह, आमद खां, घमंडसिंह, मोदे खां, सखि मोहम्मद, रणवीरसिंह भाटी, सालेह मोहम्मद, हसन खां, बरकत खां और ऊमर खां सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

जैसलमेर में ओरण संरक्षण के लिए 22,648 बीघा भूमि आरक्षित

जैसलमेर राज्य सरकार ने जैसलमेर जिले के पारिस्थितिकी संतुलन को बनाए रखने के लिए ओरण भूमि के आरक्षण की कवायद की है। जिले में ओरण के लिए कुल 22648.12 बीघा (3666.2139 हेक्टेयर) भूमि आरक्षित की है। गौरतलब है कि ओरण प्राचीन काल से चली आ रही एक ऐसी व्यवस्था है, जहां सामाजिक-धार्मिक मान्यताओं के कारण स्थानीय लोग इन पवित्र उपवनों को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। ऐसी मान्यता है कि इन क्षेत्रों में पेड़ों को काटना या कुल्हाड़ी का उपयोग करना वर्जित है, जिससे यहां का पारिस्थितिकी तंत्र स्वतः ही सुरक्षित रहता है। 'ओरण' जो संस्कृत शब्द 'अरण्य' से बना है और जिसका अर्थ 'बिना छेड़ा हुआ जंगल' होता है। आरक्षित की गई भूमि में रामगढ़ तहसील के ग्राम दिलावर का गांव में 771.18 बीघा, कुछड़ी में 6701.11 बीघा और पूनमनगर में 3607.14 बीघा भूमि शामिल है। फतेहगढ़ तहसील के ग्राम भीमसर में 5882.16 बीघा और बींजोता में 1583.1 बीघा भूमि ओरण क्षेत्र के लिए आरक्षित की गई है। जैसलमेर तहसील के ग्राम मोकला के तीन खण्डों में क्रमशः 1583.1 बीघा और 1565.9 बीघा तथा बीरमा काणोद में 780.18 बीघा भूमि आरक्षित की जा चुकी है। इसके अतिरिक्त, जैसलमेर तहसील के ग्राम मोकला में 9003.18 बीघा, नाचना तहसील के ग्राम आसकन्द्रा में 1350.18 बीघा, ग्राम दिधू में 1417.16 बीघा और ग्राम मोहनगढ़ बारानी-पन्नोधराय में 2062.16 बीघा क्षेत्रों को भी ओरण के रूप में आरक्षित करने की कार्यवाही की जा रही है।

Updated on:
17 Apr 2026 08:55 pm
Published on:
17 Apr 2026 08:54 pm
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