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छोड़ गांव में हादसा, आग में किसान की वर्षों की कमाई हुई खाक

जैसलमेर जिले के छोड़ गांव के पास तीन झोपड़ों में लगी आग से उसमें रखी किसान की वर्षों की कमाई और अपने सहित पीहर आई बेटी के सोने के आभूषण जल गए।

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जैसलमेर जिले के छोड़ गांव के पास तीन झोपड़ों में लगी आग से उसमें रखी किसान की वर्षों की कमाई और अपने सहित पीहर आई बेटी के सोने के आभूषण जल गए। शुक्रवार को दोपहर बाद ट्यूबवेल पर अचानक लगी आग ने तीन झोपड़ों को चपेट में ले लिया और कुछ ही देर में तीनों झोपड़े पूरी तरह जल गए। बताया जाता है कि इसमें नगदी और आभूषण जल गए।

घटना छोड़ गांव के पास पीरु खान की ढाणी के सामने स्थित हजारीसिंह के ट्यूबवेल पर हुई्, जिसने वहां पास में बने किसान किशनाराम के तीन झोपड़ों को पूरी तरह जला दिया। उपस्थित ग्रामीणों ने अपने स्तर पर पानी और मिट्टी डालकर आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन वे कामयाब नहीं हो सके। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची नागरिक सुरक्षा की फायर ब्रिगेड ने एक घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक सब कुछ जल चुका था। जानकारी के अनुसार झोपड़े में रखा एक गैस सिलेंडर भी आग की चपेट में आ गया, जिससे लपटें और तेज हो गईं। गनीमत रही कि किशनाराम ने सही समय पर बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। जानकारी के अनुसार किशनाराम की एक बेटी, जो पुणे में रहती है, वह परसों ही अपने बच्चों के साथ पिता के घर आई थी। इस आग ने उसकी खुशियों को मातम में बदल दिया। बेटी के पास रखे करीब 1.5 लाख रुपए और सोने-चांदी के गहने भी जल गए। वहीं, स्वयं किसान के 5 लाख रुपए और लगभग 15 से 20 तोला सोना भी जल गया। इसके अलावा घर में रखा अनाज, कपड़े और अन्य सामान आग की भेंट चढ़ गया। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पीडि़त किसान को उचित मुआवजा दिलाया जाए।

कानूनी प्रावधानों पर चर्चा

जैसलमेर. जैसलमेर के एडीआर सेंटर में बाल विवाह रोकथाम के लिए विधिक जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जैसलमेर और सिकोईडिकोन संस्था के संयुक्त तत्वावधान में, राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर की ओर से चलाए जा रहे बाल विवाह निषेध अभियान के तहत हुई। इसका निर्देशन अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जैसलमेर ओमी पुरोहित ने किया, जबकि अध्यक्षता सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने की। कार्यशाला में प्रशिक्षु आरजेएस सिद्धार्थसिंह राजपुरोहित, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रेंवतदान, सहायक निदेशक, बाल अधिकारिता विभाग हिम्म्तसिंह कविया, अध्यक्ष, बाल कल्याण समिति मुकेश कुमार व्यास सहित कई अधिकारी और प्रतिनिधि उपस्थित रहे। सचिव ने बाल विवाह को सामाजिक कुरीति और कानूनी अपराध बताते हुए बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विवाह के लिए लड़के की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और लड़की की 18 वर्ष होनी चाहिए, तथा उल्लंघन पर 2 वर्ष तक का कारावास और 1 लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है। बाल विवाह के दुष्परिणामों पर भी प्रकाश डाला गया। पुलिस विभाग ने बाल विवाह की रोकथाम के लिए जैसलमेर जिला मुख्यालय पर 24 घंटे कार्यरत नियंत्रण कक्ष स्थापित किया है।