
लाठी वन क्षेत्र में वन्यजीवों के रेस्क्यू और गश्त के लिए लंबे समय से चल रही संसाधनों की कमी के बीच वन विभाग ने क्षेत्रीय वन अधिकारी कार्यालय को रेस्क्यू वाहन उपलब्ध करवाया है। वाहन मिलने से घायल और बीमार वन्यजीवों तक वन विभाग की टीम के समय पर पहुंचने की राह आसान होगी। वनकर्मियों और वन्यजीव प्रेमियों ने इसे वन्यजीव संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। दरअसल, लाठी वन क्षेत्र करीब 200 किलोमीटर में फैला हुआ है। इतने बड़े क्षेत्र में वन्यजीवों की निगरानी, गश्त और रेस्क्यू के लिए लंबे समय से पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं थे। क्षेत्रीय वन अधिकारी कार्यालय के अनुसार, पहले पूरे क्षेत्र में गश्त और रेस्क्यू के लिए केवल एक पुरानी मोटरसाइकिल उपलब्ध थी। ऐसे में किसी वन्यजीव के घायल या बीमार होने की सूचना मिलने पर टीम को मौके तक पहुंचने में परेशानी होती थी।
लाठी वन क्षेत्र की सीमा राष्ट्रीय राजमार्ग-11 पर थईयात से शुरू होकर चाचा गांव तक फैली है। इसके अलावा देवीकोट से बालाना तक का वन क्षेत्र भी विभाग की निगरानी में आता है। विस्तृत क्षेत्र में हिरण सहित विभिन्न वन्यजीव और पक्षियों की कई प्रजातियां पाई जाती हैं। ऐसे में वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए नियमित गश्त और सूचना मिलने पर तत्काल रेस्क्यू की जरूरत रहती है।
लाठी वन क्षेत्र में रेस्क्यू संसाधनों की कमी को लेकर राजस्थान पत्रिका ने लगातार मुद्दा उठाया था। गत 6 अगस्त को भी घायल वन्यजीवों तक समय पर नहीं पहुंच पाती टीम, बढ़ रहा जोखिम शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया गया था। खबर में करीब 200 किलोमीटर के वन क्षेत्र में रेस्क्यू संसाधनों की कमी और विभाग के पास केवल एक बाइक होने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया था। समाचार प्रकाशित होने के बाद जैसलमेर के उप वन संरक्षक कुमार शुभम् ने मामले का संज्ञान लिया। इसके बाद लाठी वन विभाग कार्यालय को रेस्क्यू वाहन उपलब्ध करवाया गया। अब वनकर्मियों को घायल और बीमार वन्यजीवों तक पहुंचने, रेस्क्यू करने तथा विस्तृत वन क्षेत्र में गश्त करने में सुविधा मिलेगी।
नए वाहन से सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम के मौके तक पहुंचने में लगने वाला समय कम होने की उम्मीद जगी है।घायल वन्यजीवों को समय पर प्राथमिक उपचार देकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने में भी सुविधा होगी। नियमित गश्त से वन क्षेत्र में वन्यजीवों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने की उम्मीद है।