जैसलमेर

Jaisalmer: लाठी रेस्क्यू सेंटर में बढ़ीं सुविधाएं, घायल वन्यजीवों को मिलने लगा नया जीवन लगातार

घायल वन्यजीवों के उपचार और पुनर्वास की दिशा में लाठी वन विभाग का अस्थायी रेस्क्यू सेंटर प्रभावी साबित हो रहा है। संसाधनों में बढ़ोतरी, विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों की उपलब्धता और बेहतर चिकित्सा व्यवस्था के कारण यहां पहुंचने वाले वन्यजीवों के स्वस्थ होकर प्राकृतिक आवास में लौटने की संभावनाएं पहले से कहीं अधिक बढ़ गई हैं।

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Jun 13, 2026
lathi news
लाठी. सुविधाएं बढ़ी, चिकित्सा सुविधा मिली तो फिर वन जीवों को मिलने लगी ज़िंदगी।

लाठी. कभी सीमित संसाधनों और उपचार सुविधाओं के अभाव से जूझने वाला लाठी वन विभाग का अस्थायी रेस्क्यू सेंटर अब घायल वन्यजीवों के लिए नई उम्मीद बन गया है। पशु चिकित्सकों की तैनाती, दवाओं की उपलब्धता, बेहतर देखभाल और वन विभाग की सक्रिय कार्यप्रणाली के चलते घायल वन्यजीवों के स्वस्थ होने की दर में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। अब यहां पहुंचने वाले चिंकारा, नीलगाय, गिद्ध, खरगोश, कुरंजा और अन्य वन्यजीवों को समय पर उपचार मिलने से उनका जीवन बचाया जा रहा है। रेस्क्यू सेंटर की आधारभूत सुविधाओं का विस्तार किया गया है, वहीं स्थानीय जनप्रतिनिधियों और वन्यजीव प्रेमियों की पहल पर पशुपालन विभाग ने दो पशु चिकित्सकों की तैनाती की है।

रेस्क्यू वाहन का अभाव, टीम फिर भी समय पर बचा रही वन्यजीवन

उपचार के लिए आवश्यक दवाएं और संसाधन उपलब्ध कराए गए, जिससे घायल वन्यजीवों की चिकित्सा पहले की तुलना में अधिक प्रभावी हुई। रेस्क्यू सेंटर प्रभारी महेश बिश्नोई के नेतृत्व में टीम को जैसे ही किसी घायल वन्यजीव की सूचना मिलती है, वनकर्मी तत्काल मौके पर पहुंचकर उसे सुरक्षित रेस्क्यू सेंटर लाते हैं। यहां पशु चिकित्साधिकारी डॉ. नदीम, डॉ. लोकेश सारण, पशुधन निरीक्षक मनीष मीणा, जयप्रकाश और मिथिलेश कुमार लगातार उपचार और निगरानी करते हैं। गंभीर मामलों में देर रात तक चिकित्सा कर वन्यजीवों को बचाने का प्रयास किया जाता है।

यह है हकीकत

वन विभाग के अनुसार रेस्क्यू सेंटर में लाठी और आसपास के वन क्षेत्रों से प्रतिदिन घायल वन्यजीव लाए जाते हैं। इनमें चिंकारा, नीलगाय, दुर्लभ प्रजाति के गिद्ध, कुरंजा, कबूतर और अन्य पक्षी शामिल रहते हैं। वर्ष 2025 में रेस्क्यू सेंटर में 20 चिंकारा, एक नीलगाय, चार कबूतर और तीन गिद्ध स्वस्थ किए गए। वर्ष 2026 में अब तक 23 चिंकारा, दो नीलगाय, दो गिद्ध और एक कुरंजा सफल उपचार के बाद स्वस्थ हो चुके हैं। रेस्क्यू वाहन का अभाव अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। इसके बावजूद वन विभाग की टीम उपलब्ध संसाधनों के सहारे दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचकर घायल वन्यजीवों का समय पर रेस्क्यू कर रही है। वन्यजीव प्रेमियों का मानना है कि यदि विभाग को समर्पित रेस्क्यू वाहन उपलब्ध हो जाए तो बचाव कार्य और अधिक प्रभावी हो सकेगा तथा वन्यजीवों के जीवन बचाने की सफलता दर में और वृद्धि होगी।

उपचार और देखभाल की व्यवस्थाएं अब सुदृढ़

रेस्क्यू सेंटर में उपचार और देखभाल की व्यवस्थाओं को लगातार सुदृढ़ किया गया है। बेहतर संसाधनों और टीम के समर्पित प्रयासों से घायल वन्यजीवों के स्वस्थ होने के परिणाम पहले की तुलना में काफी बेहतर हुए हैं।

— जगमालसिंह सोलंकी, क्षेत्रीय वनाधिकारी, लाठी

रेस्क्यू वाहन उपलब्ध हो जाए तो अधिकाधिक घायल वन्यजीवों को मिलेगा नवजीवन

वन विभाग की टीम सीमित संसाधनों के बावजूद सराहनीय कार्य कर रही है। यदि रेस्क्यू वाहन उपलब्ध हो जाए तो दूर-दराज क्षेत्रों से घायल वन्यजीवों को और तेजी से उपचार मिल सकेगा तथा अधिक जीवन बचाए जा सकेंगे।

— गोरीशंकर पुनिया, तहसील अध्यक्ष, अखिल भारतीय जीव रक्षा विश्नोई सभा

Published on:
13 Jun 2026 08:38 pm