भाजपा नेताओं की गुंडागर्दी कैमरे में हुई कैद, ट्रांसफर रुकवाने के लिये तहसीलदार को कोर्ट में दी धमकी.
जालौन. जहां उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सभी नेताओं व मंत्रियों को अपने पद का रौब न झाड़ने का फरमान देते आ रहे हैं, वहीं सत्ता के नशे में चूर होकर कुछ भाजपाई इसका दुरुपयोग करने से जरा भी गुरेज नहीं कर रहे हैं। मामला जालौन में देखने को मिला है, जहां एक लेखपाल का ट्रांसफर रुकवाने के लिये भाजपा नेताओं ने तहसीलदार उरई पर दबाव बनाने का प्रयास किया। जब तहसीलदार ने भाजपा नेताओं की बात नहीं मानी तो भाजपा नेताओं ने तहसीलदार के साथ अभद्रता करते हुए नोक-झोक की। इस पूरी घटना को कैमरे में कैद कर लिया गया है।
उरई तहसील में तैनात एक लेखपाल लल्लूराम का तबादला पिछले दिन एसडीएम उरई ने दूसरे स्थान पर कर दिया था। इसके बारे में लेखपाल लल्लूराम की पत्नी सुमन वर्मा, जो पूर्व भाजपा महिला मोर्चा जिलामंत्री हैं, को जब पता चला तो वह भाजपा जिला पंचायत सदस्य पुष्पेंद्र सेंगर के साथ भाजपा महामंत्री नागेंद्र गुप्ता और जिला मीडिया प्रभारी इंद्रराज गुर्जर को लेकर तहसीलदार उरई राजेश कुमार वर्मा की कोर्ट में पहुंचीं। यहां उन्होंने लेखपाल लल्लूराम का तबादला रुकवाने के लिये तहसीलदार पर दबाव बनाया। इस पर तहसीलदार राजेश कुमार वर्मा ने बताया कि यह उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है और यह केवल एसडीएम द्वारा ही किया जा सकता है, जिस पर भाजपा नेता अनावश्यक दबाव बनाने लगे।
इस बात को लेकर तहसीलदार ने सभी भाजपा नेताओं को कोर्ट से बाहर जाने के लिये कहा जिस पर भाजपा नेताओं ने अपनी तौहीन समझते हुये तहसीलदार को कोर्ट चैंबर के अंदर ही धमकाना शुरू कर दिया। भाजपा नेताओं द्वारा तहसीलदार को धमकाये जाने का वीडियो कैमरे में कैद हो गया। इसमें स्पष्ट देखा जा रहा है कि किस तरह भाजपा के जिला पंचायत सदस्य पुष्पेंद्र सेंगर और अन्य भाजपाई तहसीलदार को कोर्ट चेम्बर में धमका रहे हैं।
भाजपा नेताओं द्वारा धमकी दिये जाने की जानकारी तहसीलदार ने उच्च अधिकारियों के साथ पुलिस को दी। जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर तत्काल पहुंची और मामले को शांत कराया। जब इस मामले में भाजपा नेता पुष्पेंद्र सेंगर से बात करनी की कोशिश की गई, तो वे कैमरे पर बिना कुछ बोले वहां से चुपचाप निकाल गये। वहीं तहसीलदार राजेश कुमार वर्मा ने भी कैमरे के सामने कुछ नहीं कहा।
फोन पर इतना जरूर कहा कि भाजपा नेता एक लेखपाल लल्लूराम का तबादला रुकवाने के लिये आए थे जिनको बताया कि यह उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। यह केवल एसडीएम द्वारा किया जा सकता है, लेकिन उन्होने कोई बात नहीं सुनी और बत्तमीजी पर आमादा हो गए। मामले में उरई उपजिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी से जानकारी ली तो उन्होंने बताया कि मामला उनकी जानकारी में आया है, लेकिन वह उरई से बाहर है। जब वह आएंगे तो दोनों पक्षों की बात को सुनेंगे और उसके बाद फैसला लेंगे।