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जालौन सड़क दुर्घटना में मृतकों की संख्या हुई आठ; मृतकों में भागवताचार्य और शिक्षक शामिल

Jalaun road accident: जालौन में हुए दर्दनाक हादसे में मरने वालों की संख्या आठ हो गई है। टवेरा गाड़ी में कुल 10 लोग बैठे थे जो अयोध्या से वापस ललितपुर आ रहे थे।

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दुर्घटनाग्रस्त तवेरा, फोटो सोर्स- पत्रिका

फोटो सोर्स- पत्रिका

Tragic accident on Kanpur-Jhansi road: जालौन में हुए दर्दनाक हादसे में मरने वालों की संख्या आठ हो गई है। सभी मृतक छह एक ही मोहल्ले के रहने वाले थे। जैसे ही घटना की जानकारी मोहल्ले में पहुंची, कोहराम मच गया। मृतकों के बच्चों के सर से पिता का साया उठ गया। दुर्घटना जालौन में कानपुर-झांसी मार्ग भोर पहर 5:45 बजे की है। घटना के समय सभी मृतक और घायल अयोध्या से वापस आ रहे थे। अभी गाड़ी कालपी थाना क्षेत्र अंतर्गत पहुंची ही थी कि आगे चल रही ट्रक ने टक्कर मार दी, जिसमें मौके पर 6 लोगों की मौत हो गई थी। चार घायलों को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था, जहां उपचार के दौरान और दो लोगों की मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर प्रशासनिक अधिकारी पहुंच गए। दुर्घटना कालपी थाना क्षेत्र का है। ‌

नेशनल हाईवे 27 की घटना

उत्तर प्रदेश के जालौन के कालपी थाना क्षेत्र अंतर्गत नेशनल हाईवे 27 के चौरासी गुबंद के पास तेज रफ्तार अनियंत्रित टवेरा पहुंची ही थी कि आगे चल रहे ट्रक से टक्कर हो गई। घटना के समय कार में 10 लोग थे, जिनमें भागवताचार्य मनोज भोड़ले पुत्र ओमप्रकाश, देशराज नामदेव, कृष्णकांत नायक, स्वामी प्रसाद तिवारी, शशिकांत तिवारी, और उमेश तिवारी शामिल थे। सभी ललितपुर के रहने वाले थे।

मृतकों के ऊपर परिवार की जिम्मेदारी

उमेश तिवारी की मौत की खबर सुनकर पिता रामगोपाल तिवारी, मां गुड्डी और बड़े भाई उमाकांत का रो-रोकर बुरा हाल था। उमेश तिवारी की अभी शादी नहीं हुई थी। जबकि स्वामी प्रसाद तिवारी प्राइवेट स्कूल में टीचर थे और शिक्षण कार्य से परिवार चलाते थे। अपने पीछे पत्नी चंदा देवी, पुत्र विजेंद्र, अरविंद और बेटियां संगीता, रुचि छोड़ गए हैं। मृतकों में शशिकांत तिवारी भी शामिल हैं, जो ब्रेड बेकरी का काम करते थे। अपने पीछे पत्नी पिंकी के अतिरिक्त पुत्र केतन और पुत्री प्रतिष्ठा को छोड़ गए। ‌

देशराज की बिजली की दुकान थी

जबकि देशराज नामदेव बिजली की दुकान से परिवार का पालन पोषण करते थे, अपने पीछे पत्नी सुषमा और पुत्री रूही और सेजल को छोड़ गए हैं। भगवताचार्य मनोज भोड़ले भागवत कथा से परिवार का पालन पोषण करते थे, अपने पीछे पत्नी नेहा और पुत्री रिद्धि और सिद्धि को छोड़ गए हैं। मनोज के निधन से घर में कोहराम मच गया।

कृष्णकांत संविदा शिक्षक

कृष्णकांत नायक कस्तूरबा आवासीय विद्यालय में संविदा शिक्षक के रूप में कार्य करते थे, जिनके पीछे पत्नी, पुत्र चेतन, पुत्री प्रतीक्षा की जिम्मेदारी थी, जिनके निधन से परिवार वालों का रो-रोकर बुरा हाल है। खास बात यह है कि सभी एक ही मोहल्ले के रहने वाले थे। घटना की जानकारी मिलते ही मोहल्ले में हड़कंप मच गया।