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जालौन में इन चार तरीकों से होगा शवों का विश्लेषण, फील्ड यूनिट फॉरेंसिक फर्स्ट रिस्पांडर को दिया गया प्रशिक्षण

Jalaun Police Training News: जालौन पुलिस ने चयन किए गए पुलिस कर्मियों को मृत्यु के बाद जांच के तरीके बताए गए। वैज्ञानिक तरीके से जांच के लिए प्रत्येक थाने में टीम का गठन किया गया है। ‌
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Oct 05, 2026
पुलिस कर्मियों को दिया गया प्रशिक्षण, फोटो सोर्स- जालौन पुलिस
पुलिस कर्मियों को दिया गया प्रशिक्षण, फोटो सोर्स- जालौन पुलिस

Jalaun police News: जालौन में मिनी फील्ड यूनिट फॉरेंसिक फर्स्ट रिस्पांडर को मृत्यु के बाद करण के एनालिसिस के लिए प्रशिक्षण दिया गया। कुल चार बिंदुओं पर यह प्रशिक्षण दिया गया। जिसमें एल्गोर मोटिंस, राईगर मोटिंस, लिवर मोटिंस और केडेबरीक स्पैज्म (तात्कालिक जकड़न) शामिल है। प्रत्येक थाने के लिए दो पुलिस कर्मियों को चयन किया गया है जिन्हें या प्रशिक्षण दिया जा रहा है प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य वैज्ञानिक निष्पक्ष साक्ष्य एकत्र करना है।

मिनी फील्ड यूनिट फॉरेंसिक फर्स्ट रिस्पांडर का गठन

उत्तर प्रदेश के जालौन में अपराध विवेचना को अधिक वैज्ञानिक, निष्पक्ष और प्रभावी बनाने के लिए पुलिस ने एक बड़ी पहल की है। पुलिस अधीक्षक और अपर पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में जिले के प्रत्येक थाना पर मिनी फील्ड यूनिट का गठन किया गया है। अपने नाम के मुताबिक टीम के सदस्यों को फर्स्ट रिस्पांडर के रूप में कार्य करना है। प्रशिक्षण के दौरान चयन किए गए जवानों को वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्र करने के तरीके बताए गए।

उरई सभागार में दिया गया प्रशिक्षण‍

इसी क्रम में आज 5 अक्टूबर को पुलिस लाइन के सभागार कक्ष में चयनित कर्मियों के लिए एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन कर प्रशिक्षित किया गया। अपर पुलिस अधीक्षक जालौन की उपस्थिति में पुलिस लाइन उरई में मिनी फील्ड यूनिट फॉरेंसिक फर्स्ट रिस्पांडर (Mini Field Unit - Forensic first responders) विषय पर आयोजित कार्यशाला में प्रत्येक थाने के 2-2 पुलिस कर्मियों को फॉरेंसिक कार्यशाला में प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान घटनास्थल पर फर्स्ट रिस्पॉन्डर के दायित्वों की मानक संचालन प्रक्रिया का अभ्यास कराया गया। जिससे हर घटना में वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन सुनिश्चित कर क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम को मजबूत बनाया जा सके।

इन बिंदुओं पर दिया गया प्रशिक्षण

कार्यशाला में अपर पुलिस अधीक्षक ने Post-death analysis के मुख्य बिंदुओं पर विस्तार से बताया गया। उन्होंने बताया कि एल्गोर मोर्टिस (Algor Mortis) में मृत्यु के पहले कुछ घंटों में शरीर का तापमान गिरकर वातावरण के बराबर हो जाता है। राइगर मोर्टिस (Rigor Mortis) मृत्यु के 2 से 4 घंटे बाद मांसपेशियों के लॉक होने से शरीर का अकड़ जाता है। लिवर मोर्टिस (Livor Mortis) में मृत्यु के बाद रक्त परिसंचरण रुकने व गुरुत्वाकर्षण के कारण खून के सबसे निचले हिस्से में जमा होने के कारण त्वचा पर नीले, लाल या बैंगनी धब्बे पड़ने लगते हैं। कैडेवेरिक स्पैज्म (तात्कालिक जकड़न) में व्यक्ति की मृत्यु अत्यधिक तनाव, डर या शारीरिक थकावट में अचानक तीव्रता से अकड़ जाता है। इन विषयों पर विस्तार से बतायागया। ‌

सीन क्रिएट कर दिया गया प्रशिक्षण

इस दौरान सीन क्रिएट कर घटनास्थल को सावधानी पूर्वक सुरक्षित करने, प्रमुख स्पॉट चिन्हित करने, फिंगर प्रिंट, ब्लड व अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्यों को एकत्र करने का अभ्यास कराया गया। पुलिस का कहना है कि वर्तमान में आधुनिक आपराधिक न्याय प्रणाली में केवल पारंपरिक साक्ष्यों पर निर्भर रहने के स्थान पर वैज्ञानिक साक्ष्यों को प्राथमिकता दी जा रही है। जिससे अपराध की निष्पक्ष एवं त्वरित विवेचना संभव हो सके।

Updated on:
05 Oct 2026 10:11 pm
Published on:
05 Oct 2026 07:04 pm