जालौन

जालौन में ड्रग्स फैक्ट्री का भंडाफोड़: गुलाब जल की आड़ में ड्रग्स की फैक्ट्री, अब सरगना और खरीदार की तलाश

डीआरआई के मुताबिक मुख्य परिसर से करीब 184 किलो अर्धनिर्मित पदार्थ और 582 किलो प्रीकर्सर रसायन मिले। प्रीकर्सर ऐसे रसायन होते हैं जिनका इस्तेमाल नशीले पदार्थ बनाने में किया जा सकता है।
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Updated: 31 Oct 2026, 6:51 PM IST
Jalaun Drug Factory Raid
जालौन में ड्रग्स फैक्ट्री का खुलासा (फोटो PIB)

Jalaun Drug Factory Raid: उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के रामपुरा गांव में गुलाब जल बनाने के नाम पर चल रही एक फैक्ट्री में सिंथेटिक ड्रग्स बनाने की लैब मिलने का खुलासा हुआ है। राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) और यूपी एटीएस की संयुक्त टीम ने छापा मारकर 1,102.88 किलो नशीले पदार्थ, अर्धनिर्मित सामग्री और रसायन जब्त किए। बरामदगी का मूल्य 200 करोड़ रुपए से अधिक होने का दावा किया गया है। इस मामले में हेमेन्द्र कुशवाहा और संतोष को गिरफ्तार किया गया है, जबकि प्लॉट मालिक शैलेन्द्र सिंह पाल की तलाश जारी है।

डीआरआई के अनुसार फैक्ट्री और आरोपियों से जुड़े आवासीय ठिकानों की तलाशी में कुल 1,102.88 किलो नशीले पदार्थ, अर्धनिर्मित सामग्री और रसायन जब्त किए गए। मुख्य परिसर से करीब 184 किलो अर्धनिर्मित पदार्थ और 582 किलो प्रीकर्सर रसायन मिले। इसके बाद एक आवासीय ठिकाने से करीब 15.4 किलो तैयार मेथाक्वालोन, लगभग 153 किलो रसायन और निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मशीन बरामद हुई। दूसरे ठिकाने से करीब 168 किलो अतिरिक्त प्रीकर्सर रसायन जब्त किए गए।

जांच एजेंसियां फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारी, जब्त उपकरणों और रसायनों के आधार पर इस फैक्ट्री के संचालन तथा उसके संपर्कों की पड़ताल कर रही हैं। अब जांच एजेंसियां नशे की फैक्ट्री के लिए फंडिंग करने वालों, रसायन के सप्लायर और तैयार माल के खरीदारों की धर पकड़ में जुटी है।

जेल में हुई दोनों की मुलाकात

डीआरआई सूत्रों के अनुसार हेमेन्द्र और संतोष की मुलाकात मुंबई की आर्थर रोड जेल में हुई थी। जेल से बाहर आने के बाद दोनों ने जालौन में एक साथ काम शुरू करने का षड्यंत्र रचा। संतोष के खिलाफ महाराष्ट्र में एनडीपीएस के तहत पहले भी मामला दर्ज हैं।

कच्चा माल के सप्लायर और खरीददार की तलाश

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि ड्रग्स बनाने में इस्तेमाल होने वाले रसायन कहां से खरीदे गए, उनके लिए भुगतान किसने किया और तैयार माल को कौन लेने वाला था। यह भी जांच की जा रही है कि कार्रवाई से पहले नशे की इस फैक्ट्री से कोई खेप बाहर भेजी गई या नहीं। इन सवालों के जवाब के लिए रसायनों की खरीद, उपकरणों की व्यवस्था और कारोबार से जुड़े वित्तीय लेनदेन की पड़ताल जारी है।

यों हुआ नशे के खेल का पर्दाफाश

नशे की खेप को बड़े बाजार में बेचने के मकसद से आरोपियों ने मुंबई में नेटवर्क बढ़ाने की कोशिश की। इसके लिए ड्रग्स का नमूना लेकर मुंबई में सौदा करने की कोशिश भी की गई। इसी दौरान डीआरआई को इसकी भनक लग गई। नतीजतन डीआरआई ने जाल बिछाकर आरोपियों को धार दबोचा।

एक महीने पहले शुरू हुई फैक्ट्री

रामपुर गांव के प्रधान ओमकार पाल ने बताया कि फैक्ट्री करीब एक महीने पहले शैलेन्द्र सिंह पाल के डेढ़ बीघा भूखंड पर शुरू हुई की। स्थानीय लोगों को बताया गया कि यहां गुलाब जल बनाया जाएगा और इसकी सप्लाई दूसरे जिलों व राज्यों में होगी। परिसर के चारों ओर बाउंड्री और बड़ा गेट लगा दिया। ताकि किसी को भीतर चल रहे नशे के खेल की भनक नहीं लगे।

एमडी ड्रग्स और मेथाक्वालोन बरामद

डीआरआई के अनुसार मौके से नशीले पदार्थ के रूप में मेथाक्वालोन बरामद किया गया है। सूत्रों के अनुसार आरोपियों के ठिकाने से मेफेड्रोन (एमडी) ड्रग्स भी बरामद हुई है। बरामद सामग्री के कुल वजन में तैयार पदार्थ के साथ अर्धनिर्मित सामग्री और रसायन भी शामिल हैं।

Updated on:
31 Oct 2026, 6:51 PM IST
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