जालोर

मुस्कुराते मिट्टी के दीये, घर-आंगन में बिखर रही रोशनी

मां लक्ष्मी का स्वागत करने के लिए मिट्टी के दीये ही खरीदे जाते हैं। घर के मुख्यद्वार पर झरोखों में हवा के साथ टिमटिमाते ये दीये सुख-समृद्धि का स्वागत करने को आतुर दिखते हैं।
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Nov 06, 2018
diwali#jalore#lighting
घर के आंगन में मिटटी के दीयों की सजावट करती महिलाएं

जालोर. आधुनिक युग में लोग सस्ती व आसानी से सुलभ होने वाली चाइनीज लाइट को भले ही पसंद कर रहे हो, लेकिन परम्परागत दीयों का क्रेज अब भी बरकरार है। बिक्री का आलम तो यह है कि नवरात्र के बाद से ही मिट्टी के दीपक बनना शुरू हो गए थे। गांव से लेकर शहर तक में दीये बनाए जा रहे हैं। लोग बताते हैं कि मां लक्ष्मी का स्वागत करने के लिए मिट्टी के दीये ही खरीदे जाते हैं। घर के मुख्यद्वार पर झरोखों में हवा के साथ टिमटिमाते ये दीये सुख-समृद्धि का स्वागत करने को आतुर दिखते हैं। घरों व दफ्तरों में भले ही विद्युत लडिय़ां लगाई जाती हो पर परम्परा के रूप में मिट्टी के दीये ही सजते हैं। यही कारण है कि दीपावली पर्व पर हर घर में मिट्टी के दीये मुस्कुराते मिलेंगे।

गांवों में घर-घर पहुंचाते हैं दीपक
सालों से चल रही यह परम्परा आधुनिकता की भागदौड़ के बावजूद जीवंत है। इसके तहत कुम्हार हर घर में दीपक देने जाते हैं। त्योहारी नेग के रूप में वस्त्र, मिठाई, नकदी आदि दी जाती है। मिट्टी के बर्तन बनाने वालों के लिए दीपावली का पर्व सीजन लेकर आता है। इन दिनों में केवल दीपक ही बनाए जाते हंै।


ज्यादातर फुटपाथ पर दुकानें
हालांकि त्योहार भी अब हाइटेक होते जा रहे है, लेकिन परम्परा अब भी कायम है। घर के आंगन में मांडणा सजाने से लेकर दीपक की रोशनी का महत्व कम नहीं हुआ है। यही कारण है कि त्योहारी सीजन में मिट्टी के दीपक भी बाजार में सजने लगे हैं। फुटपाथ पर लगभग हर जगह दीपक सजे नजर आएंगे और इनका मोल-भाव करते लोग भी।
झरोखे से लेकर आंगन तक
इस बार मिट्टी के छोटे दीपक दस में पांच मिल रहे हंै। वहीं डिजाइन किए हुए बड़े दीपक का मूल्य दस रुपए व अन्य दीपक पांच रुपए में मिल रहे हैं। लोगों का क्रेज बड़े दीपकों की ओर भी लग रहा है। लोग अलग-अलग साइज के दीपक खरीदते हैं, ताकि झरोखे से लेकर आंगन तक में अच्छी सजावट हो सके।

आधुनिकता में बदली डिजाइन
इस परम्परा पर आधुनिकता हावी तो हुई है, लेकिन डिजाइन तक ही। परम्परागत दीपकों के साथ ही स्वास्तिक, मयूर, कछुआ, शंख आदि विभिन्न आकृति के दीये बिक रहे हैं। कारीगर बताते हैं कि लोगों की पसंद एवं मांग के मुताबिक अन्य जिलों से इनकी खरीद करते हैं। इससे सीजन में अच्छा मुनाफा मिल जाता है।

Updated on:
06 Nov 2018 01:20 pm
Published on:
06 Nov 2018 01:18 pm