नदी के पुलिया पर पड़ी निर्माण सामग्री से लग रहे जाम, पहले निकलने के चक्कर में झगड़ रहे वाहन चालक
जालोर. जसवंतपुरा टोल रोड स्थित आकोली नदी के पुलिया पर अभी मरम्मत चल रही है, लेकिन निर्माण सामग्री पुलिया पर ही रखी होने से दिक्कत बढ़ रही है। सामग्री के ढेर और निर्माणाधीन जगह के कारण पुलिया के अधिकतर हिस्से पर एकतरफा यातायात बना हुआ है। दिन के उजाले में जाम लगने पर भी किसी तरह एक-एक कर वाहन पार हो रहे हैं, लेकिनरात को वाहन चालकों में अक्सर झगड़े हो रहे हैं। जाम से बचते हुए पहले निकलने की होड़ में पुलिया से नीचे गिरने या आमने-सामने टकरा जाने का खतरा बना हुआ है सो अलग।मरम्मत कार्य टोल कंपनी करवा रही है, लेकिन विभागीय मॉनिटरिंग का अभाव बना हुआ है। ऐसे में लोग यहां से गुजरते समय काफी समस्या झेल रहे हैं।
अधिकारियों ने देखी दुर्दशा
इस रास्ते से गुजर रहे अधिकारियों ने भी शुक्रवार को अव्यवस्था देखी।वाहनों की कतार और जाम के कारण परेशान हो रहे वाहन चालकों को भी देखा।उपखंडअधिकारी राजेंद्रसिंह, तहसीलदार, पीडब्ल्यूडी अधिकारी तक साथ रहे। पुलिया पर कुछदेर रुकने के दौरान एक अधिकारी की कार से दुपहिया वाहन चालक असंतुलित होकर गिरते-गिरते बच गया।यह सब कुछ अधिकारियों की आंखों के सामने हुआ, लेकिन व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हो रहा।
इस तरह सामने आ रही मुश्किल
रात को पुलिया पार करने वाले वाहन चालकों में अक्सर कतार तोडऩे और आगे जाने के चक्कर में झगड़े हो रहे हैं।दो दिन पहले ही एक रोडवेज बस और कार चालक में झगड़ा हो गया।कार चालक ने कहा कि मैं आगे तक आ गया था, जबकि बस चालक ने कहा कि इस तरफ किनारा होने से साइड देना मुश्किल है।बस नदी में गिर सकती है, लेकिन कार चालक नहीं माना।करीब पंद्रह मिनट तक चले इस झगड़े में बस यात्रियों ने समझाइश की।तब जाकर कार चालक रवाना हुआ। इस दौरान दोनों और वाहनों की लम्बी कतार लगी रही।
हल्की चूक हादसे का कारण
नदियों पर बने पुलिया की चौड़ाई निर्धारित रहती है।दोनों ओर किनारों होने से वाहनों को कतारबद्ध निकलना पड़ता है।ऐसे में हल्की सी चूक हादसे को जन्म दे सकती है।नदी के पुलिया पर रखी निर्माण सामग्री से वाहनों को न केवल जाम में फंसना पडऱहा है बल्कि हिचकोले खाते हुए निकलना पड़ रहा है।
ठीक कराया जाएगा...
हां, यह सही है कि सड़क पर निर्माण सामग्री पड़ी होने से जाम लग रहे हैं।वाहनों के टकराने की भी स्थिति बन जाती है।इसे ठीक कराया जाएगा।
-अनिलकुमार माथुर, एईएन, पीडब्ल्यूडी, जालोर