
जालोर. आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त जालोर जिले का नाम एक बार फिर नकली नोट प्रकरण को लेकर चर्चा में है। गुरुवार रात को नकली नोट के प्रकरण में पाली जिले की पुलिस शहर में सरावास मोहल्ले में पहुंची। जानकारी के अनुसार सोमवार को सादड़ी में पकड़ में आए युवकों से पीसी रिमांडपर पूछताछ के बाद हुआ। पूछताछ में जालोर के जुड़ाव के संकेत पर पाली पुलिस गुरुवार रात में यहां सरावास पहुंची।
यहां एक कॉम्प्लेक्स में पुलिस ने जांच की तो यहां चौकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। प्रारंभिक पड़ताल में ही यहां नकली नोट बनाने के प्रमाण मिले हैं। इस पूरे मामले में जालोर पुलिस को भनक तक नहीं लगी। मामले में स्थानीय पुलिस ने अनभिज्ञता जाहिर की। इधर, आस पास रहने वाले लोगों का कहना था कि सादे कपड़ों में पुलिस जाब्ता पहुंचा, लेकिन चालक ही पुलिस यूनिफार्म में था। कार्रवाई के बाद पुलिस लौट गई, लेकिन इस बार फिर से कई सवाल छोड़ गई। मामला इसलिए खास है कि जालोर शहर के बीच में यह सबकुछचल रहा था इसके बाद भी स्थानीय पुलिस को इस बारे में भनक तक नहीं लगी।
नकली नोट प्रकरण से जालोर का पुराना नाता
जालोर पुलिस मामले में इनकार कर रही है, लेकिन जालोर जिले की ही बात करें तो एक दशक में नकली नोट के कई बड़े प्रकरणों में जालोर के आरोपित पकड़े जा चुकी हैं। 15 अक्टूबर 2012 को तीन लाख रुपए के नकली नोट पकड़े गए थे और तीन आरोपित भी पकड़े थे, तीनो ही आरोपित जालोर के थे। इन तीनों को जाली नोट मामलों की विशेष अदालत जयपुर ने मई 2018 में ही 4-4 साल की सजा सुनाई है। इसी तरह 2006 में करड़ा थाना क्षेत्र में एक मामला दर्ज हुआ, जो 10 साल फरार रहा और 22 अपे्रल 2016 को उसे गिरफ्तार किया गया। मई 2017 में जोधपुर सरदारपुरा के एक ठेकेदार ने बागरा में मकान का काम पूरा करने के बाद मकान मालिक से 18 हजार रुपए प्राप्त किए, जो नकली निकले। मामले का अभी तक खुलासा नहीं। इसी तरह जनवरी 2009 में गुजरात में 3 लाख रुपए से अधिक के नकली नोट प्रकरण में भी भीनमाल का एक आरोपित पकड़ में आया।
302 नंबर फ्लेट पर कार्रवाई
पुलिस दल इस कॉम्प्लेक्स के 302 नंबर फ्लेट पर पहुंचा। कॉम्प्लेक्स में लगी सूची के अनुसार यह फ्लेट जयपालसिंह के नाम पर था। इस कॉम्प्लेक्स में इन सभी लोगों के नाम और नंबर के अलावा भवन के केयर टेकर्स के नाम और नंबर भी लगे हुए है। लेकिन यह मामला होने पर सभी ने अपना पल्ला झाडऩे में ही भलाई समझी। सूची के अनुसार एक केयर टेकर का नाम अनिल चूडावत और दूसरा सुनील तिवारी है, लेकिन दोनों ने ही किसी तरह की जानकारी देने से इनकार कर दिया।
अनभिज्ञ पुलिस दोपहर में पहुंची
नकली नोट बनाने के संगीन मामले में स्थानीय पुलिस ने अनभिज्ञता जताई या फिर पाली पुलिस ने उन्हें इत्तला नहीं दी।दोनों ही मामले में स्थानीय पुलिस की ढिलाई नजर आ रही है। पूरा घटनाक्रम होने के बाद दूसरे दिन दोपहर में सीआई राजेंद्रसिंह मौके पर पहुंचे और कुछ बाहरी युवकों से भी पूछताछ की।
सोशल मीडिया पर कई तरह के कयास
यह प्रकरण सोशल मीडिया पर छाया रहा। सोशल मीडिया पर लोग कई तरह के कयास लगाते रहे। यहां तक कि लाखों रुपयों के नकली नोट बरामदगी के मैसेज भी वायरल हुए। सोशल मीडिया पर 2 हजार, 500 और 100 रुपए के नकली नोट बरामदगी और नोट छापने की मशीन बरामदगी के मैसेज तक वायरल हुए।अलबत्ता इस पूरे मामले में स्थानीय पुलिस ने मौन धारण करे रखा।
और लोगों की हो सकती है भूमिका
नकली नोट प्रकरण में जालोर के तार जुडऩे के साथ ही पाली पुलिस यहां पहुंची है। मामले में अभी पुलिस कार्रवाई गोपनीय ही रखे हुए हैं। सूत्रों की मानें तो मामले में अभी काफी नाम जुड़े हैं।
नकली स्टाम्प का मामला भी आ चुका सामने
जालोर के तार कई बड़े घटनाक्रमों से जुड़ते रहे हैं। सालों पूर्व जालोर का नाम फर्जी स्टाम्प छापने के मामले में भी काफी चर्चा में आया और मामले में जालोर के स्थानीय लोग पकड़ में आए थे। जालोर में बाहरी लोग अधिक है इसके बावजूद पुलिस के बाद इन लोगों की जानकारी या पुलिस वेरिफिकेशन तक नहीं है।
पत्रिका व्यू-जालोर की साख पर सवाल
जालोर नकल के लिए बदनाम हो रहा है। वह भले परीक्षाओं में हो या नकली नोट बनाने में। नकली घी-तेल का धंधा भी यहां फल-फूल रहा है। यह सीधा जालोर की साख पर सवाल है। जालोर की पहचान ही यह नकल बनकर रह रही है। बीते 12 साल में राजस्थान और गुजरात में सामने आए नकली नोट के बड़े प्रकरणों में हमारे जिले का नाम आया है। इससे जालोर की साख पर सवाल खड़े हो रहे हैं। हैरत की बात है कि नकली नोट के अधिकांश मामले तो पड़ोसी जिले पकड़ रहे हैं। दो बार पाली ने पकड़े और एक बार गुजरात के साबरकांठा ने। इसे जालोर पुलिस की ढिलाई ही कहेंगे कि अपराधी जालोर आकर जिले को संस्थागत अपराधों की शरणस्थली बना रहे हैं।
इनका कहना
पाली पुलिस की ओर से जालोर में कार्रवाई के बारे में किसी तरह की जानकारी हमारे पास मौजूद नहीं है।
- राजेंद्रसिंह राठौड़, कोतवाल, जालोर