
अतीत के झरोखे से...
जालोर. राजनीतिक गलियारे लगातार बदलाव के साथ नए क्लेवर में नजर आते हैं। ऐसे में जालोर की राजनीति भी इससे अछूती नहीं रही है। 6 0 से 8 0 के दशक में राजनीतिक कार्यक्रमों में तड़क भड़क नहीं होती थी और कार्यक्रम सादगी से होते थे। यही नहीं नेता जननायक की छवि के रूप में ही पहचाने जाते थे। इस काल में ही जालोर की राजनीति पांच लाल के लिए पहचानी जाती है। 8 0 के दशक की बात करें तो उस समय जालोर की राजनीति पर पांच लाल का पूरा प्रभाव था। ये कांगे्रस में सक्रिय कार्यकर्ता रहे, लेकिन राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं किया। ये पांच चर्चित लाल इंदरलाल, भंवरलाल, छोगालाल, शांतिलाल और मोहनलाल थे और ये राजनीति दिशा तय करते थे। उस दौर में जालोर शहर में राजनीतिक सभाओं का प्रमुख केंद्र अस्पताल चौराहे के आस पास का क्षेत्र ही रहा। नगरपालिका बनने के बाद शुरुआत में ये सभाएं नगरपरिषद भवन के सामने के मैदान में होने लगी। उस समय तक यहां चारदीवारी का निर्माण नहीं था और मैदान हुआ करता था।
उद्योग विकास में राजनीति भूमिका
आज ग्रेनाइट नगरी के नाम से विख्यात जालोर शहर में आजादी के बाद शुरुआती दौर में स्टील उद्योग ही फल फूल रहा था। जालोर में ग्रेनाइट उद्योग के विकास के किस्से खासे चर्चित है, जो भी राजनीतिक रुचि से चर्चा का विषय भी है। 8 0 के दशक के बाद मुख्य रूप से जालोर में गे्रनाइट उद्योग विकास के पायदान पर आगे बढऩे लगा। लेकिन इससे पूर्व 8 0 के दशक की शुरुआत में ही तत्कालीन मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी ने जालोर प्रवास के दौरान इन संभावनाओं को तलाशा था। 8 9 वर्षीय वरिष्ठ कांगे्रस भंवरलाल चौपड़ा अपने संस्मरणों में बताते हैं कि एक समय था, जब जालोर में स्टील उद्योग ही था। एक कार्यक्रम में शरीक होने आए सीएम जोशी को उस समय सुख संपत भंडारी ने यहां की संभावनाओं से अवगत करवाया और उद्योगों की संभावनाओं के लिए कार्य के लिए गुजारिश की। संभवत: यह पहला मौका था, जिसमें औद्योगिक विकास के बिंदु पर जोशी को अवगत करवाया गया, जिसके बाद जालोर में औद्योगिक क्षेत्रप्रथम चरण की स्थापना हुई। यहां पर शुरुआती दौर में ग्रेनाइट उद्योग नहीं थे।
तीन उद्योग बने थे पहचान
चौपड़ा बताते हैं कि उस समय ब्रास सर्कल के लिए जालोर में कस्तूरी मेटल इंडस्ट्रीज, लोहे के अन्य कार्यों के लिए अंबिका इंडस्ट्रीज और स्टील बर्तन निर्माण के लिए राजस्थान इंडस्ट्रीज की स्थापना हो चुकी थी। इन इंडस्ट्रीज की स्थापना करने वालेे क्रमश: नून के टेक चंद, नून के ही नथमल और रेवतड़ा के छगनलाल और भंवरलाल थे। इन लोगों का दक्षिण में भी भी व्यापार था, लेकिन बाद में उन्होंंने जालोर में भी उद्योग स्थापित किए। इस कार्य के लिए उस दौर में पी नारायणन कुट्टी ने भी सहभागिता निभाई।