
जालोर/नारणावास. क्षेत्र के गांवों में बारिश की बेरूखी से किसान चिंतित है। नारणावास, नया नारणावास, धवला, बागरा, नागणी, दीगांव सहित दर्जनों गांवों में इस वर्ष अल्प वर्षा होने के बाद खरीफ की फसल सूख कर चौपट हो गई। पानी की कमी और कर्जे में दबे किसानों को रबी की फसल से भी ज्यादा आस नहीं है।
किसान जोगसिंह राठौड़, फकाराम, भैराराम सरगरा आदि ने बताया कि इस वर्ष वर्षा के पहले दौर में खरीफ की फसल में बाजरी, तिल, मूंग, ग्वार आदि फसलों के महंंगे भावों में उच्च स्तर का बीज खरीद कर बुवाई की थी, लेकिन फसल चौपट हो गई। खेतों में खड़ी फसल खराब होने से हालत खराब है। किसान नेनाराम मेघवाल बताया कि इस बार उम्मीदों पर पूरी तरह से पानी फिर गया है। बैंकों से लिया कर्जा कैसे चुकाएंगे यह भी चिंता है। नारणावास व नया नारणावास के किसानों ने बताया कि को खेतों से पशुओ का चारा भी हासिल नहीं होने वाला है। वर्षा के अभाव में अब पशुओं के चारे की किल्लत होने से पशुपालन की हालत खराब होने लगी है। महंगे दामों में भी चारा नहीं मिल पा रहा है। चारे के भाव इतने अधिक हो गए है कि पशुपालक परेशान है।
ब्याज चुकाने में कमर टूट रही
किसानों ने बताया कि अधिकांश किसानों ने को-ऑपरेटिव व अन्य बैंकों से केसीसी बना रखे हंै। जिससे कर्ज लेकर खेती कर रहे हैं, लेकिन फसलों में खराबे से किसान समय पर पैसे जमा नहीं करवा पा रहे। नियमानुसार समय पर राशि जमा होने पर चार फीसदी तक ब्याज वसूलना चाहिए तथा समय से जमा नहीं होने पर सात प्रतिशत ब्याज वसूलना चाहिए, लेकिन यहां ऐसा नहीं है। बैंक सात के बजाय 12 प्रतिशत ब्याज वसूल रहे हैं, जिससे किसानों की कमर टूट रही है।
गिर गई भैंसों की कीमत भी
पशुपालकों ने बताया कि नया नारणावास, नारणावास सहित आसपास के गांवों में पहले भैंस की कीमत काफी अच्छी थी, लेकिन जैसे ही अकाल की छाया पडऩे लगी वैसे ही भैंसों की कीमतों में भारी गिरावट आई है। भैंस पालना किसानों के लिए काफी महंगा हो रहा है। इसके लिए चारा अधिक व पौष्टिक चाहिए तभी भैस सही मात्रा में दूध देती है, लेकिन चारे की किल्लत को देखते हुए किसान भैंसों का समुचित रूप से पालन नहीं कर पा रहे।
गायों को बेसहारा छोड़ रहे
क्षेत्र में इस बार वर्षा नहीं होने एवं फसल व चारा नही होने से गायों को बेसहारा छोड़ा जा रहा है। किसान एवं पशुपालक घरों में गायों को रखना नहीं चाहते। किसानों का कहना है कि मजूबरी में गायों को छोडऩा पड़ा रहा है। पैसे देने के बाद भी पशुओं के लिए चारा मिलना मुश्किल है। मजबूरी में गायों को खुला छोड़ रहे हैं।
नलकूपों में पैंदे बैठ रहा पानी
क्षेत्र के नलकूपों एवं कुओं का पानी चार सौ फीट तक नीचे चला गया है। साथ ही पानी की मात्रा काफी कम होने से किसानों की हालत खराब है। किसान मंगल सिंह ने बताया कि नलकूप का पानी खत्म होने से बिजली का बिल भरना महंगा पड़ रहा है। दिनों दिन पानी की मात्रा घटने से नलकूपों में पानी खत्म हो गया है। वर्षा नही होने से नलकूप रिचार्ज नहीं हो पाए, जिससे नलकूप भी जवाब देने लगे हैं।