जालोर

सियासी ‘वैभवÓ के लिए सजे मंच पर नहीं मिली भागीदारी

अपने पुत्र के लिए सियासी जमीन तलाश रहे मुख्यमंत्री को परम्परागत वोट बैंक की नाराजगी और पार्टी पदाधिकारियों की उपेक्षा चुनाव समर में भारी पड़ सकती है
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Mar 11, 2019
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सियासी 'वैभवÓ के लिए सजे मंच पर नहीं मिली भागीदारी

जालोर. सियासत में 'वैभवÓ बढ़ाने आए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पहले ही पायदान पर परम्परागत वोट बैंक की नाराजगी झेलनी पड़ रही है। जालोर में दो दिवसीय कार्यक्रम के तहत आए मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में मंच पर भागीदारी नहीं देने से अनुसूचित जनजाति विभाग के पदाधिकारी क्षुब्ध नजर आए। नाराज हुए ये पदाधिकारी खुद कांग्रेस से जुड़े हुए हैं। ऐसे में अपने पुत्र के लिए सियासी जमीन की तलाश कर रहे मुख्यमंत्री गहलोत के लिए मुश्किल बढ़ सकती है।
मुख्यमंत्री ने शनिवार को जालोर में कार्यकर्ताओं की नब्ज टटोलने के लिए सभा को सम्बोधित किया। इसमें साफ तौर से इसका संकेत भी दिया कि अपने पुत्र को वे जालोर संसदीय क्षेत्र से उम्मीदवार बनाना चाहते हैं। इस माहौल में जहां पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुट करना है और सभी को साथ लेकर चलते हुए सियासी जमीन तलाश करनी है वहीं पार्टी से जुड़े पदाधिकारी केवल इसलिए नाराज हो गए कि सभा में उनकी उपेक्षा की गई है। ऐसे में कमियां कहां रह गई और सुुधार की गुंजाइश क्या रहेगी यह तो समय की गर्त में है, लेकिन परम्परागत वोट बैंक की नाराजगी और पार्टी पदाधिकारियों की उपेक्षा कांग्रेस के लिए चुनाव समर में भारी पड़ सकती है। अपने पुत्र के लिए सियासी जमीन तलाश रहे मुख्यमंत्री को भी पार्टी की अंदरूनी खींचतान और पदाधिकारियों की उपेक्षा करना नुकसानदेह साबित हो सकता है।
उचित नहीं है यह उपेक्षा
कांग्रेस के अनुसूचित जनजाति विभाग अध्यक्ष वचनाराम मीणा ने मुख्यमंत्री के जालोर आगमन पर मीणा समाज की उपेक्षा करने का आरोप लगाया है। इस सम्बंध में उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर बताया कि ९ मार्च को आयोजित सभा में अनुसूचित जनजाति की उपेक्षा की गई है, जिससे वे अपमानित महसूस कर रहे हैं। एसटी प्रकोष्ठ के कार्यकर्ता सैकड़ों की तादाद में कांग्रेस के साथ हैं, लेकिन सभा में मुख्यमंत्री के आगमन से पहले या बाद में भी किसी ने बोलने नहीं दिया।इससे एसटी प्रकोष्ठ कार्यकर्ता व समाज में रोष व्याप्त है तथा नाराजगी जताई है। मुख्यमंत्री के आगमन पर की गईउपेक्षा उचित नहीं है। उन्होंने मांग रखी कि आगामी कार्यक्रमों में अनुसूचित जनजाति के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं को तवज्जो दी जाए।
चापलूसों की चलती है
शनिवार को सीएम की सभा के समय उनके आने से पहले पूर्व जिला प्रमुख मंजू मेघवाल ने कांग्रेस को चापलूसों की पार्टी बताया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि कार्यकर्ताओं की बजाय पार्टी में चापलूसों की चलती है। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार आपसी खींचतान व कार्यकर्ताओं की उपेक्षा से हुई है।
लोढ़ा की मौजूदगी छोड़ गई सवाल
जालोर सर्किट हाउस में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के रात्रि विश्राम के दौरान सिरोही विधानसभा से कांग्रेस से बागी रहकर चुनाव जीतने वाले संयम लोढ़ा की मौजूदगी कांग्रेसजनों के बीच चर्चा में रही। सिरोही जाने से पूर्व कांग्रेस के प्रत्याशी को हराकर विधायक बने संयम लोढ़ा की देर रात को जालोर सर्किट हाउस में मौजूदगी राजनीतिक गलियारों में कई सवाल छोड़ गई।

Updated on:
11 Mar 2019 12:44 pm
Published on:
11 Mar 2019 12:44 pm