
राजस्थान के भीनमाल शहरवासियों के लिए सुखद खबर है कि आगामी गर्मी में लोगों को पेयजल संकट नहीं झेलना पड़ेगा। ईआर प्रोजेक्ट से शहर को वर्तमान में रोजाना 30 लाख लीटर पानी मिल रहा है, जिसकी मात्रा गर्मी की सीजन में बढ़ाकर 60 लाख लीटर तक की जाएगी। जलदाय विभाग की ओर से इसकी तैयारियां शुरू कर दी है।
जलदाय विभाग के अधिकारियों का कहना है कि क्षेमंकरी माता मंदिर पर पंप हाऊस का निर्माण हो गया है। फरवरी माह में पंप हाउस पर पंप इंस्टालेशन का कार्य पूरा हो जाएगा। इसके बाद शहरी पेयजल सुदृढ़ीकरण योजना के तहत बने उच्च जलाशयों की टेस्टिंग होगी। इससे ईआर प्रोजेक्ट से मिल रहे पानी की क्षमता को दोगुना कर दिया जाएगा। ऐसे में उमीद बंधी है कि आगामी गर्मी में शहरवासियों को काफी हद तक पेयजल संकट से छुटकारा मिलेगा।
जलदाय विभाग के अधिकारियों ने बताया कि शहरी पेयजल सुदृढ़ीकरण योजना के तहत शहर में पानी स्टोरेज के लिए आठ टंकी बननी है, जिसमें से सात टंकी बन गई है। कोर्ट परिसर में एक टंकी का निर्माण कार्य चल रहा है।
विभाग के अधिकारियों ने बताया कि शहर के जसवंतपुरा रोड विनायक नगर, नीलकंठ महादेव मंदिर, महावीर नगर, पूनासा रोड, रामसीन रोड, कॉलेज के पीछे बालदिया बस्ती, फाफरिया हनुमान मंदिर के पास उच्च जलाशयों (टंकी) का निर्माण हो गया है। मार्च माह में टेस्टिंग होगी। इसके बाद शहर में पेयजल आपूर्ति तीन दिन के अंतराल में की जाएगी।
भीनमाल शहर सहित क्षेत्र सालों से भयंकर पेयजल संकट झेल रहा है। जलदाय विभाग की पेयजल आपूर्ति भूमिगत जलस्रोतों से हो रही थी। अपर्याप्त बरसात व साल-दर-साल गिरते भूजल स्तर से जलदाय विभाग के जलस्रोत जवाब दे देते है। ऐेसे में खासकर गर्मी में पेयजल की समस्या विकट हो जाती है। गत डेढ साल से शहर को नर्मदा के ईआर प्रोजेक्ट से 30 लाख लीटर पानी मिल रहा है। इस बार पानी की मात्रा बढ़ेगी।
गर्मी की सीजन को देखते हुए जालोर में भी संभावित जल संकट की स्थिति को सुधारने के लिए विभागीय स्तर पर प्लानिंग की जा रही है। नई पाइप लाइन, ट्यूबवैल खुदाई के लिए प्लान तैयार किए जा रहे हैं। बता दें पिछली सीजन में नर्मदा प्रोजेक्ट से जालोर शहर को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाया था। समस्या का प्रमुख कारण वॉल्टेज की समस्या थी। जरुरत मंद गांव टाणियों में जल परिवहन के लिए भी प्लान किया है।
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क्षेमंकरी माता मंदिर पर बने पंप हाउस पर विद्युत कनेक्शन हो गया है। पंप इंस्टालेशन का कार्य भी दस दिन में हो जाएगा। इसके बाद बने उच्च जलाश्यों में पानी की टेस्टिंग होगी। नर्मदा से पानी मात्रा 30 लाख लीटर से बढ़ाकर 60 लाख लीटर कर दी जाएगी।