जालोर

रोडवेज का चक्काजाम: न हरिद्वार चली और न कल्याण

कार्मिकों ने आगार डिपो में खड़ी कर दी बसें, स्टैण्ड पर लोग करते रहे इंतजार, यात्रियों ने दिनभर झेली परेशानी
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Jul 26, 2018
Roadways workers strike
Roadways passenger troubled by workers strike

जालोर. राजस्थान रोडवेज में श्रमिक संगठन संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर बुधवार से चक्काजाम किया गया। रोडवेज बसें डिपो में खड़ी कर दी गई।
जालोर आगार से लम्बी दूरी की कई बसें भी संचालित होती है। इन सभी के शेडयूल निरस्त किए गए। इनमें हरिद्वार, कल्याण, वापी, सूरत, झूंझनूं, अहमदाबाद आदि प्रमुख है। इन बसों का संचालन नहीं होने से लम्बी दूरी की यात्रा करने वाले यात्री अन्य साधनों से गंतव्य तक जाने को मजबूर हुए। अन्य जिलों से आई बसें भी हड़ताल के मद्देनजर जालोर डिपो में खड़ी मिली। कर्मचारियों ने डिपो के बाहर ही धरना दिया तथा मांगों के समर्थन में नारेबाजी की। दो दिवसीय हड़ताल से बसों के पहिए थमे रहे। नया बस स्टैंड पर एक भी बस नहीं होने से यात्री निजी वाहनों से यात्रा करने को विवश रहे। जिला मुख्यालय पर नया बस स्टैंड व अस्पताल चौराहा स्टंैड पर यात्री बसों का इंतजार करते नजर आए। मांगों पर सकारात्मक जवाब नहीं मिलने पर गुरुवार को भी लगातार दूसरे दिन चक्काजाम की स्थिति रहेगी। रोडवेज में हड़ताल के चलते 74 शैडयूल निरस्त किए गए। इससे प्रतिदिन मिलने वाला करीब छह से सात लाख रुपए का राजस्व भी प्रभावित हुआ। उधर, रोडवेज में हड़ताल के चलते यात्री परेशान हुए। लोगों को निजी वाहनों से यात्रा करनी पड़ी, लेकिन आवागमन की कोई खास सुविधा नहीं मिली। उधर, रोडवेज के प्रबंधक (वित्त) ओम लीलावत ने बताया कि रोडवेज कर्मचारी हड़ताल पर रहने सेबसों का संचालन नहीं हो पाया। इससे राजस्व अर्जन पर प्रतिकूल असर पड़ा।
गुजरात ने दिया राजस्थान का साथ
गुजरात रोडवेज की बसों ने भी राजस्थान के श्रमिक संगठनों का साथ दिया। गुजरात के आणंद, वापी, सूरत, नवसारी, नडियाद समेत अन्य जगहों से आवाजाही करने वाली गुरात की बसों ने भी इस हड़ताल को समर्थन देते हुए बसें रोक दी। इन बसों ने भी बुधवार को प्रदेश में यात्री भार नहीं उठाया। गुजरात की एक बस तो यहां अन्य बसों के साथ डिपो में ही खड़ी मिली।
चाक-चौबंद रहे प्रबंध
हड़ताल के मददेनजर सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता प्रबंध किए गए। पुलिस दल गश्त पर रहा। पुलिस निरीक्षक नेमीचंद के नेतृत्व में जाब्ता आगार डिपो से बस स्टैंड व अन्य जगह निगरानी करता रहा। आगार प्रबंधक अवधेश शर्मा ने भी विभिन्न रूट पर जायजा लिया, ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।
डिपो के बाहर धरना
यहां रोडवेज डिपो के बाहर धरने पर बैठे कर्मचारियों ने मांगों के समर्थन में नारेबाजी की। सातवें वेतन आयोग की सिफारिश तत्काल लागू करने एवं अन्य मांगों पर भी सकारात्मक निर्णय देने की बात कही। प्रदेशव्यापी हड़ताल के तहत अन्य जिलों में चल रही रोडवेज बसें भी जहां थी वहीं थाम दी गई। कर्मचारियों ने बताया कि श्रमिक संगठन लम्बे अर्से से इन मांगों पर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार ध्यान नहीं दे रही। ऐसे में कार्मिकों को मजबूरन में प्रदेश व्यापी आन्दोलन करना पड़ रहा है।
हड़ताल से अलग रहे भामसं कार्यकर्ता
रोडवेज में भामसं से जुड़े कर्मचारी हड़ताल से अलग रहे। प्रदेश उपाध्यक्ष जयसिंह चांपावत ने बताया कि कार्यकर्ता हड़ताल में शामिल नहीं है। जोधपुर, जयपुर, भीनमाल गईं बसें बुधवार को शांतिपूर्ण तरीके से वापस लौटी। कार्यकर्ताओं ने सुबह आगार के डिपो में एकत्र होकर हड़ताल का विरोध किया तथा प्रशासन से सहयोग मांगा। शाखा अध्यक्ष हितेंद्रसिंह राठौड़, मनोहर राठौड़, भगवानसिंह महेशपुरा, उदयराजसिंह, सुनील बिश्नोई, लक्ष्मणराम बिश्नोई, अब्दुल वहीद, फिरोज खां, भारतसिंह, जबरसिंह मौजूद रहे। इन्होंने गुरुवार को भी हड़ताल पर नहीं रहने की बात कही।

Published on:
26 Jul 2018 11:18 am