
जितेश रावल
जालोर. सहकारी समितियों की ओर से उर्वरक कंपनियों में उधारी बकाया होने से यूरिया की आपूर्ति भी रूक गई है। जिम्मेदारों की यह बेपरवाही किसानों पर भारी पड़ रही है। यूरिया खाद का रुपया कंपनियों को नहीं भेजे जाने से उधारी बढ़ रही है। समितियों में दो कंपनियों से उर्वरक आता है और इन दोनों कंपनियों में करीब डेढ़ करोड़ रुपए की उधारी बकाया चल रही है। पैसे नहीं भेजे जाने से उर्वरक कंपनियां माल भेजने में रुचि नहीं ले रही। ऐसे में बार-बार मांग पत्र भेजे जाने पर भी माल की आपूर्ति नहीं हो रही। सहकारी समितियों में यूरिया की आपूर्ति ठप हो जाने से किसान आए दिन सोसायटियों के चक्कर काट रहे हैं। इन दिनों रबी सीजन में यूरिया की महत्ती आवश्यकता है, जिससे किसान निजी दुकानों से खरीदने को मजबूर हैं।
पैसा फंस जाने पर रोकते हैं आपूर्ति
सहकारी समितियों को उर्वरक की आपूर्ति इफको व कृभको से होती है। इसका भुगतान खाद की बिक्री के बाद किया जाता है। ब्लॉक मुख्यालय पर संचालित होलसेल मार्केटिंग सोसायटी व गांवों में संचालित ग्राम सेवा सहकारी समितियां भी स्वस्तर पर माल मंगवाते हैं। इन दोनों कंपनियों से सालाना लाखों रुपए का माल आपूर्ति होता है। उधारी फंस जाने पर वसूली के लिहाज से कंपनियां माल रोक देती है।
हर बार यही कि रैक आ रही है
उर्वरक कंपनियों में बकाया चल रही राशि को लेकर सहकारी समितियों पर किसी का दबाव नहीं है। इससे समितियां न तो समय पर पैसा जमा करवा रही है और न ही कंपनियां माल भेज रही है। सोसायटी तक आने वाले किसानों को दो-चार दिन में रैक आने का जरूर भरोसा दे रहे हैं, लेकिन कई चक्कर काटने के बादकिसान दुकानों से ही यूरिया खरीदने को विवश है।
आहोर में 1200 मांगा था 200 ही आया
आहोर व जालोर ब्लॉक में उर्वरक कंपनियों ने काफी समय से आपूर्ति रोक रखी है। आहोर में तो करीब चार माह से माल नहीं आ रहा। प्रारंभ में 1200 मीट्रिक टन (एमटी) की मांग भेजी गई थी, जिस पर केवल दो सौ एमटी यूरिया की मिल पाया था। यह माल जल्द ही खत्म हो गया। इसके बाद आसपास के गांवों से आए लोग जालोर ब्लॉक का माल भी खरीद ले गए। अब दोनों जगह यूरिया नहीं है।
मांग पत्र भेज रखा है...
यूरिया के लिए मार्केटिंग सोसायटियों से मिली मांग के अनुरूप उर्वरक कंपनियों को मांग पत्र भेज रखा है। कंपनियों में उधारी कितनी बकाया है इसकी जानकारी नहीं है। पता लगाकर कार्रवाई की जाएगी।
- नारायणसिंह देवल, उप रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां, जालोर
कलक्टर बोले-यूरिया आपूर्ति में नहीं आनी चाहिए समस्या, दिए निर्देश
जालोर. सहकारी समितियों में यूरिया नहीं मिलने के मामले को जिला कलक्टर बीएल कोठारी ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने यूरिया की आपूर्ति निर्बाध रूप से किए जाने को लेकर निर्देश जारी किए। जिला कलक्टर ने सहकारी बैंक के अधिकारियों को निर्देशित किया हैं कि क्रय-विक्रय सहकारी समिति में यूरिया आपूर्ति में कोई समस्या नहीं आनी चाहिए। मांग अनुसार उर्वरक कंपनियों को बकाया राशि का भुगतान करवाया जाए, ताकि यूरिया की आपूर्ति निर्बाध रूप से बनी रहें। उल्लेखनीय है कि सहकारी समितियों में यूरिया नहीं मिलने से किसान निजी दुकानों से खरीद रहे हैं। किसानों की इस समस्या को लेकर राजस्थान पत्रिका ने १४ दिसम्बर को 'जिलेभर में किसानों को चाहिए यूरिया, फिर भी सीजन में सहकारी समितियों ने हाथ झटकेÓ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। जिला कलक्टर ने सहकारी बैंक अधिकारियों को निर्देश जारी किए, ताकि किसान गांव में ही समितियों से यूरिया खरीद सके।
निजी में मिल रहा यूरिया
कृषि विभाग अधिकारी भी मानते हैं कि सहकारी समितियों में मांग के अनुसार शीघ्र ही आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। कृषि उप निदेशक आरबी. सिंह ने बताया कि यूरिया की कोई कमी नहीं हैं। निजी क्षेत्र में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है।किसानों से आग्रह किया है कि वे आवश्यकता अनुसार ही यूरिया क्रय करें तथा संग्रहण न करें।