Handwara Encounter: जब कोरोना योद्धाओं के जज्बे को सेना (Handwara Encounter Martyred Soldiers Courageous History) की ओर से सलाम किया जा रहा था तब कश्मीर से भारतीय सेना के (Colonel Ashutosh Sharma) कर्नल, मेजर (Major Anuj sud), (Indian Army Naik Rajesh Kumar) दो जवानों (Indian Army Lance Naik Dinesh Singh) और एक पुलिस अधिकारी के शहीद होने की खबर आई...

योगेश सगोत्रा
जम्मू: भारतीय सुरक्षाबलों के जज्बे की जितनी दात दी जाए उतनी कम है। कोरोना संकटकाल में जहां वह कोरोना वारियर्स के सम्मान में फूल बरसा रहे हैं वहीं आतंकियों और सीमा पर दुश्मनों से निपटने के लिए भी पूरी तरह सतर्क है। या यूं कहे कि हमारे सेना के जवान हर मोर्चे पर अपनी भूमिका को पूरी शिद्दत से निभाते है। आज कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला जब कोरोना योद्धाओं के जज्बे को सेना की ओर से सलाम किया जा रहा था तब कश्मीर से भारतीय सेना के कर्नल, मेजर, दो जवानों और एक पुलिस अधिकारी के शहीद होने की खबर आई। हंदवाड़ा में आम लोगों की जान बचाते हुए दो आतंकियों को ढेर करने के बाद सभी शहीदों ने देश पर प्राण न्यौछावर कर दिए। सभी शहीदों की कहानी उनके साहस को बखूबी बयां करती है।
कईं तूफानों का रुख मोड़ चुका हूं— कर्नल
हंदवाड़ा में आतंकियों से स्थानीय लोगों को बचाते हुए शहीद होने वाले 21 राष्ट्रीय राइफल्स (आरआर) के कमांडर कर्नल आशुतोष शर्मा आतंकियों के खिलाफ अभियान में पहले भी कई बार बहादुरी दिखा चुके थे। उन्हें दो बार वीरता पदक से सम्मानित किया गया था। यह उत्कृष्ट सेवा और बहादुरी के कार्यों के लिए मिलने वाला चौथा सर्वोच्च शांति काल वीरता पुरस्कार है। कश्मीर घाटी में तैनात श्रेष्ठ कमांडिंग ऑफिसर्स में उनकी गिनती थी। उनके जिंदगी पर बारिकी से नजर डाले तो उनका देशप्रेम और जज्बा साफ झलकता है। उनके आखिरी व्हाट्सएप्प स्टेटस में कर्नल आशुतोष शर्मा ने लिखा था कि "हिम्मत परखने की गुस्ताखी मत करना, पहले भी कई तूफानों का रुख मोड़ चूका हूँ। उनकी यही बात बिलकुल सत्य भी है। कर्नल आशुतोष शर्मा का जन्म 3 जुलाई 1975 को हुआ था। उनके पत्नी पल्लवी शर्मा और बेटी तम्मान है। वह मूलत: उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के गांव इलना परवान रहने वाले थे। वह पिछले 15 सालों से राजस्थान के जयपुर में रह रहे थे। वह पिछले दो वर्षों से 21 आरआर के साथ तनैत थे। उनका पहला वीरता पुरस्कार 2018 में गणतंत्र दिवस पर घोषित किया गया था, जब वह लेफ्टिनेंट कर्नल थे और 21 आरआर की कमान में दूसरे स्थान पर थे। यह घाटी में किए गए एक ऑपरेशन के लिए था। 2019 में स्वतंत्रता दिवस पर सिर्फ 18 महीने बाद, सरकार ने आतंकवादियों का मुकाबला करने के लिए किए गए एक और ऑपरेशन के लिए उन्हें दूसरा वीरता पुरस्कार प्रदान किया।
कॉर्पोरेट जॉब छोड़ चुनी आर्मी, मेजर सूद की बहन भी सेना में
मेजर अनुज सूद का जन्म 17 दिसंबर 1989 में हुआ। वह महाराष्ट्र पुणे के रहने वाले थे। उनकी पत्नी का नाम आकृति सिंह सूद है। उनके पिता सी. के सूद भी सेना में कार्यरत थे। वह ब्रिगेडियर के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। मेजर अनुज सूद ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद एमबीए किया। सेना में आने से पहले उन्होंने एक अच्छी खासी कॉर्पोरेट जॉब छोड़ी थी। उनकी बहन भी सेना में अधिकारी हैं। शहीद मेजर के पिता ने कहा कि यह एक बड़ी कुर्बानी है। उसने अपनी ड्यूटी निभाई जिसके लिए उसे ट्रेनिंग दी गई थी। उसने लोगों की जान बचाई। लेकिन मुझे दु:ख है उसकी पत्नी के लिए, जिसकी शादी उससे तीन—चार महीने पहले हुई थी।
देश सदैवा याद रखेगा वीरता और बलिदान...
नायक राजेश कुमार का जन्म 10 जुलाई 1990 में हुआ। कुमार मनसा पंजाब से ताल्लुक रखते थे। लांस नायक दिनेश सिंह का जन्म 30 सितंबर 1995 में हुआ। लांस नायक दिनेश सिंह अल्मोड़ा उत्तराखंड के थे। दोनों जवानों ने अपने उच्च अधिकारियों के निर्देशों का पालन करते हुए मुठभेड़ में अहम भूमिका निभाई। उनकी गोलियों से हंदवाड़ा गूंज उठा। इन नौजवानों की वीरता और बलिदान के देश सदैवा याद रखेगा।
शेर—ए—कश्मीर सगीर काजी...
मुठभेड़ में शहीद जम्मू—कश्मीर पुलिस के बहादुर सब इंस्पेक्टर सगीर अहमद पठान काजी का जन्म 1978 में कुपवाड़ा जिले के करनह में हुआ था, उन्हें 1999 में जम्मू-कश्मीर पुलिस की सशस्त्र शाखा में कांस्टेबल के रूप में नियुक्त किया गया था। उन्होंने 2006 में एक आतंकवाद-रोधी बल पुलिस एसओजी में काम करने के लिए स्वेच्छा जताई। योग्यता को देखते हुए उन्हें तीन बार आउट ऑफ टर्न प्रमोशन दिए गए और वे एक कांस्टेबल के पद से उप-इंस्पेक्टर के पद तक बढ़ गए। इस साहसी अधिकारी को विभिन्न पदकों से सम्मानित किया गया, जिसमें शामिल हैं - 2009 में शेर—ए—कश्मीर पुलिस वीरता पदक और 2011 में भारत के राष्ट्रपति द्वारा वीरता के लिए पुलिस पदक हामिल है। डीजीपी जम्मू—कश्मीर पुलिस कमेंडेशन मेडल और सेना की 'उत्तरी कमान कमेंडेशन डिस्क' भी शामिल है। मरते दम तक उन्होंने सेवा के दौरान अपना उत्कृष्ट प्रदर्शन जारी रखा।