
(श्रीनगर):सुप्रीम कोर्ट में अनुच्छेद 35-ए पर सुनवाई के विरोध में अलगाववादियों के दो दिवसीय बंद के दूसरे दिन भी कश्मीर में जन जीवन अस्त व्यस्त रहा। अलगाववादी नेताअों सैयद अली शाह गिलानी, उमर फारूक और यासीन मलिक के बंद के आह्वान को कश्मीर के कई संगठनों ने समर्थन दिया था। प्रशासन ने शैक्षणिक संस्थान बंद कर कुछ स्कूलों में परीक्षा स्थगित कर दी। बंद के दौरान घाटी में तनाव बरकरार रहा। उपद्रवियों ने कुछ जिलों में माहौल बिगाडने के लिए प्रदर्शन और सुरक्षा बलों पर पथराव भी किए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई को अगले साल 19 जनवरी तक टाल दिया है।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के मद़देनजर सुरक्षा बलों ने घाटी के सभी जिलों में कडी सुरक्षा व्यवस्था की। अफवाहों पर रोक के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद कर दीं। सुरक्षा बलाें ने संवेदनशील क्षेत्रों में कठोर पाबंदियां लगाईं।
आतंकियों के निशाने पर पुलिसवालों के परिजन
अनुच्छेद 35-ए पर सुनवाई को लेकर जम्मू कश्मीर में जन जीवन थम सा गया है। इधर कश्मीर के अन्य इलाकों में पुलिसकर्मियों के परिजन आतंकियों के निशानों पर आ गए है। पुलिस विभाग में काम करने वालों के परिवार जनों को आतंकियों द्धारा अगवा करने की खबरें सामने आई है। बताया जा रहा है कि पिछले 48 घंटों में 10 लोगों को दहश्तगर्दों द्धारा अगवा किया गया हैं। यह सभी पुलिसकर्मियों के परिजन है। सभी मामले दक्षिण कश्मीर के बताए जा रहे है। अपहरण की इन घटनाओं के बाद से राज्य में अलर्ट जारी कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि घाटी में सुरक्षबलों की ओर से कि गई कार्रवाई के कारण बौखला कर आतंकी ऐसी घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं।