
जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला (Photo-IANS)
Omar Abdullah Government Crisis: जम्मू कश्मीर में कैबिनेट विस्तार के बाद उमर अब्दुल्ला सरकार और नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर असंतोष के संकेत मिलने लगे है। दरअसल, कैबिनेट विस्तार से पार्टी के कई विधायक नाराज हो गए है। इसके अलावा विधायकों ने एक गुट ने पूरे कैबिनेट के इस्तीफे की भी मांग की है। उनका कहना है कि नए सिरे से सर्वसम्मति, योग्यता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के आधार पर दोबारा मंत्रिमंडल का गठन किया जाना चाहिए। इसी बीच पार्टी के सांसद आगा रुहुल्ला मेहदी ने भी इस्तीफे का ऐलान कर दिया है। उन्होंने कहा कि वे 3 नवंबर को पार्टी और सांसद पद से इस्तीफा दे देंगे। इसके बाद प्रदेश की राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
NC सांसद मेहदी ने 3 नवंबर को पार्टी और सांसद पद से इस्तीफा देने का ऐलान किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि वह 3 नवंबर को नेशनल कॉन्फ्रेंस और लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे देंगे। उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर परिवारवाद और जनता से किए गए वादों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाया।
सांसद मेहदी ने कहा कि चुनाव के दौरान NC ने अनुच्छेद 370 की बहाली, राजनीतिक बंदियों की रिहाई और लोगों के अधिकारों की रक्षा का वादा किया था। सत्ता में आने के बाद इन वादों को पूरा करने के बजाय पार्टी नेतृत्व ने जनता की उम्मीदों को नजरअंदाज किया।
मेहदी ने कहा कि वह इस कथित विश्वासघात में भागीदार नहीं बनना चाहते। जिस सीट पर वह चुने गए, वह जनता से किए गए वादों के आधार पर मिली थी। इसलिए वह उस जनादेश के साथ समझौता करने के बजाय अपनी लोकसभा सदस्यता छोड़ना बेहतर समझते हैं।
बता दें कि इस साल सांसद मेहदी का नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला से भी टकराव हो चुका है। पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्ला ने कहा था कि पार्टी के समर्थन बिना मेहदी लोकसभा चुनाव नहीं जीत सकते थे।
अब्दुल्ला ने कहा था कि यदि सांसद मेहदी को लगता है कि जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 बहाल हो सकता है, तो इसके लिए उन्हें संघर्ष करना चाहिए। पार्टी ने कभी उन्हें ऐसा करने से नहीं रोका।
उस समय फारूक अब्दुल्ला ने उन्हें सलाह दी थी कि यदि वह पार्टी के रुख से सहमत नहीं हैं तो इस्तीफा देकर अपने दम पर चुनाव लड़ें। इसके जवाब में रुहुल्लाह ने कहा था कि फारूक अब्दुल्ला ने पहली बार उनसे कुछ मांगा है और वह उन्हें निराश नहीं करेंगे।
कैबिनेट विस्तार के बाद विधायकों का एक गुट नाराज हो गया है। शुक्रवार को विधायक कैसर जमशेद लोन के आवास पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के एक दर्जन से अधिक विधायकों ने बैठक की। कुछ विधायक ऑनलाइन माध्यम से भी इसमें शामिल हुए।
बताया जा रहा है कि इस बैठक में विधायकों ने पूरी मंत्रिपरिषद से इस्तीफा लेने और योग्यता, आपसी सहमति तथा लोकतांत्रिक सिद्धांतों के आधार पर नए मंत्रिमंडल के गठन की मांग उठाने का फैसला किया। इसके अलावा मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर अहमद वानी के इस्तीफे की मांग करने पर भी सहमति बनी।
इसी बीच नेशनल क्रॉन्फ्रेंस पार्टी ने मुबारक गुल के खिलाए एक्शन लिया है। उन्हें पार्टी महासचिव पद से हटा दिया है। दरअसल, गुल भी कैसर जमशेद लोन के आवास पर हुई बैठक में शामिल हुए थे।
मंगलवार को उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने चार नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इनमें अली मोहम्मद सागर, शमीमा फिरदौस, मीर सैफुल्लाह और अल्ताफ अहमद कालू शामिल हैं।
इस विस्तार के बाद मुख्यमंत्री समेत मंत्रिपरिषद में कुल नौ सदस्य हो गए हैं। वहीं, उमर अब्दुल्ला ने मंत्री सतीश शर्मा को मंत्रिमंडल से बाहर कर दिया। सतीश शर्मा के पास खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, परिवहन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, सूचना प्रौद्योगिकी, युवा मामले, खेल और प्रशिक्षण जैसे विभाग थे।
बता दें कि जम्मू कश्मीर में 90 विधानसभा सीटें है। इसमें से 41 विधायक नेशनल कॉन्फ्रेंस पार्टी के हैं। पार्टी को छह निर्दलीय विधायकों का समर्थन प्राप्त है, जबकि कांग्रेस के छह विधायक सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे हैं।
Updated on:
31 Oct 2026, 10:43 AM IST
Published on:
31 Oct 2026, 10:24 AM IST
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