jammu kashmir : कश्मीर के दिव्यांग इरशाद चार साल पहले एक सिलाई केंद्र खोला था जहां वे आज अन्य दिव्यांग लोगों को भी सशक्त बना रहे हैं।
jammu kashmir : जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर स्थित हैदरपोरा के निवासी दिव्यांग इरशाद ने दिव्यांगता की कठिनाइयों को पार करते हुए एक सिलाई केंद्र की स्थापना की। इसके माध्यम से उन्होंने अपनी आजीविका को सुनिश्चित किया। साथ ही 25 अन्य दिव्यांगजनों को भी रोजगार उपलब्ध कराया। इरशाद ने बताया कि यदि दिव्यांगजनों को समय पर उचित मार्गदर्शन प्रदान किया जाए तो वे समाज के समग्र विकास और प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। इरशाद ने न केवल सिलाई केंद्र की स्थापना में अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है, बल्कि राष्ट्रीय व्हीलचेयर क्रिकेट टीम की कप्तानी करके अपनी नेतृत्व क्षमता को भी सिद्ध किया है। इरशाद परिवार का सबसे बड़ा सदस्य होने के नाते अपने तीन छोटे भाइयों और मां की देखभाल करता है। वह दृढ़ संकल्प के साथ पारिवारिक जिम्मेदारियां निभा रहा है। इरशाद ने सिलाई केंद्र में लैपटॉप बैग, पाउच, घरेलू सजावट की वस्तुएं और अन्य सहायक उपकरण बनाने में कुशलता प्राप्त की है। इरशाद ने बताया कि मेरा उद्देश्य उन लोगों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है जिन्हें नजरअंदाज किया गया है। ताकि वे दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय आत्मनिर्भर बन सकें।
यह ध्यान देने योग्य है कि इरशाद ने 2021 में अपना सिलाई केंद्र स्थापित किया और समाज में इस धारणा को चुनौती दी कि शारीरिक रूप से दिव्यांग व्यक्ति कोई कार्य नहीं कर सकते। इरशाद ने बताया कि मैंने अपनी योजना के बारे में शफकत पुनर्वास केंद्र से चर्चा की, जिन्होंने मुझे पूर्ण समर्थन प्रदान किया। इसके बाद मैंने सिलाई केंद्र की स्थापना की और कार्य आरंभ किया। किसी भी कार्य की शुरुआत में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन 'हिम्मत-ए-मर्दा, मदद-ए-खुदा' का सिद्धांत आपको आगे बढ़ने में सहायता करता है।
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इरशाद ने शफकत पुनर्वास केंद्र के तहत आयोजित अलग अलग प्रदर्शनी में अपनी कला का प्रदर्शन किया और ऐसे उत्पाद प्रदर्शित किए जिनसे न केवल उन्हें बढ़िया कमाई हुई बल्कि लोगों को संदेश भी गया कि दिव्यांग व्यक्ति भी समाज में प्रमुख भूमिका निभा सकते हैं। उसने दावा किया कि हम भी पूरे देश में ऑनलाइन उत्पादों को वितरित करते हैं। इरशाद ने युवाओं को अपने भविष्य की जिम्मेदारी स्वयं संभालने के लिए प्रोत्साहित करते हुए उनसे आग्रह किया कि वे केवल सरकारी नौकरियों पर निर्भर न रहें, बल्कि स्वयं नौकरी सृजक बनें। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी दिव्यांगता मानसिक दिव्यांगता है। हमें इस पर काबू पाना होगा, अपनी छिपी हुई क्षमता को तलाशना होगा और समाज में अपनी जगह बनानी होगी।