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50 सीट में से 42 मुस्लिमों को मिलने के बाद इस कॉलेज की मान्यता हुई रद्द, हिंदू संगठनों ने किया था विरोध प्रदर्शन

कॉलेज के पहले बैच में 50 MBBS छात्रों में से 42 मुस्लिम थे, जिसे लेकर कुछ हिन्दू संगठनों ने विरोध किया। उनका आरोप था कि जम्मू और कश्मीर में हिंदू अल्पसंख्यक हैं और मुस्लिम छात्रों को सीटें देने से हिंदू छात्रों का हक मारा जा रहा है।
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जम्मू

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Ashib Khan

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Updated: 7 Jan 2026, 6:04 PM IST

SMVDIME MBBS seats controversy, National Medical Commission (NMC), Medical Assessment and Rating Board (MARB),

हिंदू संगठनों के प्रदर्शन के बाद कॉलेज की मान्यता हुई रद्द (Photo-IANS)

एमबीबीएस की 50 में से 42 सीट मुस्लिम छात्रों को मिलने के बाद चर्चा में आई जम्मू स्थित वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज की मान्यता रद्द हो गई है। दरअसल, मुस्लिम छात्रों की संख्या अधिक होने के बाद विवाद खड़ा हो गया था और हिंदू संगठनों ने इसको लेकर प्रदर्शन भी किया था। अब राष्ट्रीय मेडिकल आयोग ने संस्थान को संगठनात्मक कमियों और अन्य कारणों से कॉलेज को MBBS सीटों के आवंटन की अनुमति वापस ले ली है।

हिंदू संगठनों ने किया था विरोध

बता दें कि कॉलेज के पहले बैच में 50 MBBS छात्रों में से 42 मुस्लिम थे, जिसे लेकर कुछ हिन्दू संगठनों ने विरोध किया। उनका आरोप था कि जम्मू और कश्मीर में हिंदू अल्पसंख्यक हैं और मुस्लिम छात्रों को सीटें देने से हिंदू छात्रों का हक मारा जा रहा है। यह कॉलेज पिछले साल सितंबर में 50 MBBS सीटों के लिए मंजूरी प्राप्त हुआ था और विवाद नवंबर में शुरू हुआ था। 

RBD ने उठाए थे सवाल

बता दें कि कॉलेज में सीटों के वितरण पर राष्ट्रवादी बजरंग दल (RBD) ने सवाल उठाए थे। इसके अलावा, उन्होंने हिंदू छात्रों के लिए आरक्षण की भी मांग की थी। हालांकि, कॉलेज प्रशासन और सीएम उमर अब्दुल्ला ने इसे नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट (NEET) के आधार पर की गई भर्ती प्रक्रिया बताया था। हालांकि, 85% सीटें मुस्लिम बहुल यूनियन टेरिटरी के लिए आरक्षित थीं, जिससे मुस्लिम छात्रों की संख्या ज्यादा थी क्योंकि उनके NEET स्कोर उच्च थे।

क्यों रद्द की मान्यता?

राष्ट्रीय मेडिकल आयोग (NMC) ने MBBS सीटों के आवंटन की अनुमति वापस लेते हुए संस्थान के इंफ्रास्ट्रक्चर की खामियों, शिक्षकों की कमी, और पर्याप्त चिकित्सकीय सामग्री की कमी का हवाला दिया। 

आयोग ने यह भी कहा कि पिछले दो हफ्तों में संस्थान के खिलाफ कई शिकायतें मिली थीं, जिनमें संस्थान के इंफ्रास्ट्रक्चर और चिकित्सा सेवाओं को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए थे। वहीं आयोग ने आगे कहा कि अब तक प्रवेशित छात्र अन्य मेडिकल संस्थानों में समायोजित किए जाएंगे।