23 फ़रवरी 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Tamil Nadu Elections: तमिलनाडु में एक झटके में क्यों कटे 74 लाख मतदाताओं के नाम, जानिए वजह

Voter List :तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग ने बड़ा कदम उठाते हुए फाइनल वोटर लिस्ट जारी कर दी है। इस विशेष संशोधन अभियान में 74 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं।

2 min read
Google source verification

भारत

image

MI Zahir

Feb 23, 2026

Tamil Nadu Elections

तमिलनाडु फाइनल वोटर लिस्ट जारी। (फोटो: पत्रिका)

Election Commission: तमिलनाडु में आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले चुनाव आयोग (Election Commission ) ने एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य की मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) अर्चना पटनायक ने सोमवार को स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस फाइनल लिस्ट (Voter List 2026) से 74 लाख से ज्यादा वोटर्स के नाम काट दिए गए हैं। चुनाव (Tamil Nadu Elections) से पहले इतने बड़े पैमाने पर नामों का कटना सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। ध्यान रहे कि इस सघन संशोधन अभियान से पहले, 27 अक्टूबर 2025 तक तमिलनाडु में कुल मतदाताओं की संख्या 6.41 करोड़ थी। लेकिन 23 फरवरी 2026 को जारी हुई नई सूची के अनुसार, अब यह संख्या घटकर 5.67 करोड़ रह गई है। फाइनल लिस्ट के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में अब 2.8 करोड़ महिला मतदाता, 2.7 करोड़ पुरुष मतदाता और 7,617 थर्ड जेंडर मतदाता बचे हैं।

किस सीट पर सबसे ज्यादा और कहां सबसे कम वोटर?

​विभाग के अनुसार चेंगलपट्टू जिले की शोलिंगनल्लूर (Shozhinganallur) विधानसभा सीट पर सबसे ज्यादा 5.36 लाख मतदाता पंजीकृत हैं। वहीं, हार्बर (Harbour) विधानसभा क्षेत्र में सबसे कम 1.16 लाख वोटर्स हैं। आपको बता दें कि इस साल गर्मियों में तमिलनाडु के साथ-साथ केरल, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी और असम में भी विधानसभा चुनाव होने हैं।

नाम कटने पर क्या करें मतदाता ?

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन लोगों के नाम सूची से हटा दिए गए हैं या जिन्हें कोई आपत्ति है, वे अभी भी संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 24(A) के तहत, मतदाता जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) के समक्ष पहली अपील दायर कर सकते हैं। यदि वहां समाधान नहीं होता, तो मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के पास दूसरी अपील की जा सकती है।

राजनीतिक दलों की मिली-जुली प्रतिक्रिया

इस बड़े बदलाव पर राजनीतिक दलों ने मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है। कुछ पार्टियों ने इसे फर्जी मतदाताओं को हटाने का एक पारदर्शी कदम बताया है, जबकि विपक्ष ने चिंता जताई है कि बिना उचित जांच के लाखों असली मतदाताओं के नाम भी काटे जा सकते हैं। चुनाव आयोग ने सभी राजनीतिक दलों को यह नई सूची सौंप दी है, जिसके बाद बूथ स्तर पर चेकिंग शुरू हो गई है।

जुलाई में बिहार में भी ऐसा ही अभियान चलाया गया था

यह पहली बार नहीं है जब स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत इतने बड़े पैमाने पर नाम काटे गए हैं। पिछले साल जुलाई में बिहार में भी ऐसा ही अभियान चलाया गया था, जिसमें करीब 69 लाख नाम हटाए गए थे और 21 लाख नए नाम जोड़े गए थे। आजादी के बाद से देश में यह नौवां ऐसा व्यापक मतदाता सूची संशोधन अभियान है।