अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी करने के दौरान 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर में मोबाइल फोन सेवा तथा इंटरनेट पर पाबंदी लगा दी गई थी। केन्द्र सरकार के इस कदम का आतंकियों पर...
श्रीनगर. अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी करने के दौरान 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर में मोबाइल फोन सेवा तथा इंटरनेट पर पाबंदी लगा दी गई थी। केन्द्र सरकार के इस कदम का आतंकियों पर विनाशकारी प्रभाव पड़ा। इससे आतंकियों की कमर टूट गई और वे जहां थे वहीं थमे रह गए और किसी बड़ी आतंकी घटना को अंजाम नहीं दे पाए। हालांकि अब आतंकियों ने आपस में संपर्क साधने और इंटरनेट के लिए एक नया ही ‘जुगाड़’ ढूंढ निकाला है। आतंकियों के इस नए जुगाड़ ने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। कश्मीर घाटी में आतंकी इंटरनेट के लिए सैटेलाइट फोन का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसी कुछ घटनाएं हैं, जिनमें सुरक्षाबलों को सैटेलाइट फोन मिले हैं और कुछ घटनाओं में सिग्नल भी ट्रेस किए गए हैं। पिछले महीने उत्तर कश्मीर में आतंकियों से हुई मुठभेड़ के दौरान सुरक्षाबलों ने 2 सैटेलाइट फोन बरामद किए थे। ऐसे ही एक फोन के सिग्नल को श्रीनगर के एक इलाके से भी ट्रेस किया गया था और उसके बाद सर्च ऑपरेशन चलाया गया था। बीएसएफ के अनुसार इससे निपटने के लिए हम काम कर रहे हैं। हमारे पास इस तरह के ट्रांसमिशन को ट्रेस और इंटरसेप्ट करने के लिए उपकरण उपलब्ध हैं।
जांच में जुटीं सुरक्षा एजेंसियां
सूत्रों के अनुसार ये सैटेलाइट फोन स्मार्टफोन की तरह ही हैं, लेकिन ये मोबाइल टावर के बजाय सीधे सैटेलाइट से कनेक्ट होते हैं। सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले की जांच कर रही हैं और पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि किस पैमाने पर घाटी में सैटेलाइट फोन का उपयोग किया जा रहा है। घाटी में पहले भी सैटेलाइट फोन का इस्तेमाल किया जाता था।
डिटेक्ट की गई सैटेलाइट फोन की लोकेशन
बीएसएफ ने कहा कि सैटेलाइट फोन का इस्तेमाल सुरक्षा के लिहाज से बड़ा संकट माना जा रहा है। इसके जरिए आतंकी सरहद पार से आतंकी गतिविधियों के लिए निर्देश लेते हैं। गांदरबल के जंगलों में हुई मुठभेड़ में दो आतंकवादियों के मारे जाने के बाद उनके पास से सैटेलाइट फोन बरामद हुए थे। वहीं श्रीनगर के बाहरी इलाके से भी एक सैटेलाइट फोन की लोकेशन डिटेक्ट की गई थी।