रक्तदाता क्रांति समूह में 212 सदस्य जुड़े हुए है और लगभग 400 स्वैच्छिक रक्तदाता नि:स्वार्थ सेवा भावना से जरूरतमन्दों को रक्तदान कर जीवनदान देने का कार्य कर रहे है।
जांजगीर. दीन-दुखियों की पीड़ा देखकर जिसके दिल में दर्द का अहसास होता है सही मायने में वही मानव है। मानव की मानवता उस समय जरूरतमन्दों को सेवा मुहैया उसका सर्वोच्च होता है जब जरूरतमन्दों को सबसे ज्यादा मदद की जरूरत होती है। ऐसे ही एक सेवा भावी कार्यकर्ता माँ दुर्गा जनकल्याण समिति सिवनी के सक्रिय कार्यकर्ता महेश कुमार राठौर हैं।
राठौर के द्वारा मानव सेवा एवं जरूरतमन्द मरीजों के लिए 33 बार न केवल रक्तदान किया बल्कि उसने अपना देहदान भी कर दिया है। महेश का मानना है कि उसका जीवन मानव एवं समाज सेवा के लिए समर्पित है। यदि मरने के बाद भी उसका शरीर किसी के काम आ जाये तो इससे अच्छा और कुछ नही हो सकता। श्री राठौर कई वर्षों से विभिन्न संगठनों से जुड़कर समाजसेवा का कार्य कर रहा है।
राठौर 20 सितम्बर 2008 से नेहरू युवा साथी प्रशिक्षण शिविर रायगढ में प्रथम बार रक्तदान किया और अब तक गरीब वर्ग के जरूरतमन्दों को 33 बार रक्तदान कर चुका है। इतना ही नही रक्तदाता क्रांति समूह का गठन में महेश राठौर का अहम योगदान है। रक्तदाता क्रांति समूह में 212 सदस्य जुड़े हुए है और लगभग 400 स्वैच्छिक रक्तदाता नि:स्वार्थ सेवा भावना से जरूरतमन्दों को रक्तदान कर जीवनदान देने का कार्य कर रहे है।
जन्मदिन की पूर्व संध्या अपने जीवन का 33 वां रक्तदान एवं देहदान की घोषणा
महेश राठौर ने अपने जन्मदिन के पूर्व संध्या 14 जून को विश्व रक्तदान दिवस पर जिला चिकित्सालय जांजगीर में आयोजित रक्तदान शिविर में गरीब वर्ग के जरूरतमन्दों के लिए 33वीं बार रक्तदान किया। इसके अलावा सिम्स मेडिकल कालेज बिलासपुर को मृत उपरांत अपना देहदान करने का घोषणा पत्र भर दिया है।
सर्वश्रेष्ठ युवा सम्मान, युवा रत्न एवं रक्तदाता गौरव अलंकरण सम्मान से सम्मानित
राष्ट्रीय एकता सदभावना, राष्ट्रीय विकास एवं सामाजिक सेवा के क्षेत्र में किये गए उत्कृष्ट कार्य को मान्यता देते हुए वर्ष 2010-11 में जिला स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। राठौर को मां दुर्गा जनकल्याण समिति सिवनी द्वारा रक्तदाता गौरव अलंकरण सम्मान एवं नवोदय कला मंच चाम्पा द्वारा युवा रत्न से सम्मानित किया जा चुका है।
15 बार अस्थि विसर्जन में किया सहयोग
गरीब वर्ग के साथ अस्थि विसर्जन कराने इलाहाबाद जाने में भी महेश राठौर जरूरतमन्दों की मदद करते है। राठौर का दिव्यांग होने के कारण इलाहाबाद जाने वालों को रेल किराया भी नाममात्र का लगता है क्योकि रेल्वे के नियमानुसार दिव्यांगों का रेल किराया नि:शुल्क है जबकि उसके साथ जाने वाले व्यक्ति को नाममात्र का रेल किराया लगता है। राठौर अब तक 15 बार अति गरीब वर्ग के लोगों को अपने साथ ले जाकर अस्थि विसर्जन कराने में सहयोग कर चुका हैं। महेश का कहना है कि इस दुनिया में सहयोग करने का मौका हर किसी को नहीं मिलता। भगवान यदि उसे किसी की मदद के लिए चुनता है तो वह उसके लिए तत्पर रहता है।