क्रशर संचालक पर खनिज विभाग के अधिकारियों का कोई दबाव नहीं है। इसके कारण क्रशर संचालक अपने मनमर्जी कर रहे है। जब मन कर रहा है गिट्टी के दाम को बढ़ा दे रहे है। इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ रहा है। वर्तमान में फिर से सीधे ५ हजार रुपए तक प्रति ट्रक गिट्टी के दाम को बढ़ा दिया गया है। इधर खनिज विभाग के अफसर मूकदर्शक बने हुए है।
अकलतरा और आसपास के बिल्डिंग मटेरियल मार्केट में सस्ती गिट्टी की सप्लाई पूरी तरह रोक दी गई। क्रशर वालों ने सिंडीकेट बना लिया और साफ कर दिया कि गिट्टी 26 रुपए वर्गफीट के रेट पर ही लेनी होगी। इस कीमत पर हफ्तेभर पहले एक ट्रक 500 फीट गिट्टी 7 हजार रुपए में बाजार में उपलब्ध थी। रेट बढ़ाने के बाद एक ट्रक गिट्टी की कीमत 13 से 14 हजार रुपए पर पहुंच गई है। कारोबार से जुड़े लोगों को अंदेशा है कि सिंडीकेट पर काबू नहीं हुआ तो गिट्टी और महंगी होगी। तमाम सरकारी और गैर-सरकारी बिल्डिंग प्रोजेक्ट्स पर इसका बुरा असर पड़ सकता है। जिले सहित अकलतरा क्षेत्र में क्रशर कारोबारियों ने सिंडीकेट बनाकर रेट बढ़ा दिया है। इससे प्रोजेक्ट महंगे होने की आशंका है। गिट्टी खदान वालों के सिंडीकेट पर खनिज विभाग के अफसर खामोश बैठे हैं। गिट्टी एवं रेत के बेतहाशा बढ़ोतरी पर प्रशासन कोई कोई कार्रवाई करने के मूड में नजऱ नहीं आ रही है। क्रेशर एवं रेत सिंडीकेट के सामने भी खनिज अमले ने घुटने टेके हैं। अब गिट्टी की बढ़ती कीमतों पर कार्रवाई नहीं की जा रही है। उल्टा, कुछ अफसरों ने दोहराया कि रेत की तरह उनका गिट्टी पर भी कोई नियंत्रण नहीं है। विभाग सिर्फ रायल्टी तय करता है, कार्रवाई नहीं कर सकती है। खनिज विभाग के अफसरों पर लेनदेन का भी आरोप लगाया जा रहा है। इसी कारण क्रशर संचालक को खुली छूट मिल रही है। अगर समय पर कार्रवाई होती तो आज दाम आसमान नहीं छूता।
गऱीबों के प्रधानमंत्री आवास पर पड़ रहा असर
देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा गऱीबों को प्रधानमंत्री आवास दिया जा रहा है। इसमें गऱीबों को एक छत प्राप्त हो सके, परन्तु उद्योगपतियों द्वारा बिना किसी नियम कानून के भवन सामग्री को दोगुना किया जा रहा है। इससे गऱीबों को इस महंगाई की मार सबसे ज़्यादा झेलनी पड़ रही है। ऐसे में गऱीबों को कैसे उनको आवास मिलेगा। गरीबों का आवास का सपना अधूरा रह जा रहा है। गिट्टी के दाम सुनकर मकान को पूरा नहीं कर पा रहे है।
खर्च 4 हजार वसूली 13 हजार रुपए
एक ट्रक पर 500 फीट या 20 टन गिट्टी लोड की जा सकती है। क्रेशर संघ का मानना है कि क्रशर खदान, लेबर और डीजल का खर्च जोड़ा जाए तो एक ट्रक गिट्टी 5 हजार रुपए से अधिक नहीं होती। यही गिट्टी अब 13 हजार रुपए में बेची जा रही है।
वर्जन
मांग और आपूर्ति के आधार पर रेत, गिट्टी आदि की कीमत तय होती है। बाजार में बेवजह रेट बढ़ाया जा रहा है तो इसकी जांच की जाएगी। गिट्टी खदान वाले मनमानी करेंगे तो कार्रवाई होगी।
हेमंत चेरपा, जिला खनिज अधिकारी
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