जांजगीर चंपा

घटिया मटेरियल से बन रहा शासकीय कर्मचारियों का भवन, अनियमितता ऐसी कि जानकर रह जाएंगे हैरान

- ठेकेदार लोकल कंपनी का लोहा कर रहा उपयोग
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घटिया मटेरियल से बन रहा शासकीय कर्मचारियों का भवन, अनियमितता ऐसी कि जानकर रह जाएंगे हैरान

जांजगीर-बलौदा. जिले के बलौदा विकासखंड अंतर्गत पहरिया रोड में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल संभाग कोरबा द्वारा सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों कर्मचारियों के लिए आवास व विकास कार्य के लिए 6 एफ टाइप, 18 जी टाइप 20 एच टाइप क्वार्टर बनाए जा रहे हैं। इसके लिए विभाग ने ठेकेदार मेसर्स साहू एसोसिएट्स को 4.73 करोड़ की लागत से टेंडर दिया है। ठेकेदार शासन से अपने रोट पर काम लेने के बाद भी गुणवत्ताहीन कार्य कर रहा है और विभागीय सहायक अभियंता और उप अभियंता इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हंै। हालांकि विभाग के कार्यपालन अभियंता एके निखरा ने इसकी जांच कराकर कार्यवाही करने की बात कही है।

जानकारी के मुताबिक पहरिया रोड में बन रही इस बिल्डिंग में कई अनियमितताएं होने की शिकायत मिली थी। इसके चलते जब पत्रिका की टीम ने मौके पर पहुंच कर हकीकत जाना तो चौकाने वाली सच्चाई सामने आई। ठेकेदार पास स्थित फ्लाई ऐश ब्रिक प्लांट से कच्ची यानि कम स्ट्रेंथ की ईंट की सप्लाई लेकर उसे बिल्डिंग बनाने में लगा रहा है, जबकि ऐसा करने से भवन कमजो होगा और इसकी दीवारों में जल्द दरारें आ जाएगी।

ठेकेदार द्वारा माल भाड़े व कुछ रुपए के रेट के अंतर के चलते वह यहां मानक का ध्यान नहीं दे रहा और न ही विभाग के इंजीनियर कुछ बोल रहे हैं। वहां निर्माण कर रहे लोगों का कहना है कि ठेकेदार ने भवन निर्माण के दौरान जो फिलिंग मटेरियल यूज किया है उसमें भी मिट्टी का उपयोग किया है, जबकि नियम के मुताबिक यहां मुरुम या रेत भरा जाना है। ऐसा न करने से बिल्डिंग की फर्स भी जल्द ही बैठ जाएगी और लोगों को यहां रहने में परेशानी होगी।

घटिया स्तर की छड़ का उपयोग
कॉलम सिस्टम की बिल्डिंग में मजबूती के लिए मुख्य भूमिका उसमें लगने वाला लोहा अदा करता है। ऐसे में ठेकेदार यह जानते हुए भी सूरज, डॉलर या अन्य लोकल कंपनी को सामान्य लोहा उपयोग कर रहा है। इससे इस लोहे की मजबूती कम आ रही है। ठेकेदार अधिक रेट होने से बीएसपी, टाटा या जिंदल का लोहा उपयोग नहीं कर रहा है।

कालम पर नहीं दिया ध्यान
कॉलम सिस्टम से बन रहे इस भवन की मजबूती का आधार कॉलम होते हैं। ब्रिक्स की जोड़ाई तो एक परदे या दीवार बनाने के लिए किया जाता है। लेकिन ठेकेदार के पास कोई इंजीनियर न होने से राजमिस्त्री ही पूरा निर्माण कर रहे हैं। ऐसे में भवन के कई कालम तिरछे हो गए हैं, जिसमें लीपापोती करके उसे सीधा करने की कोशिश की गई है।

Published on:
01 Mar 2018 12:42 pm
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