
मीडिया को जानकारी देते हुए कथा वाचक अनिरुद्धाचार्य जी महाराज ( Photo - Patrika )
Aniruddhacharya in chhattisgarh: प्रसिद्ध कथा वाचक अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि समाज में प्रेम, सद्भाव और भाईचारा बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने चर्चित पंक्ति ‘मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना’ पर अपनी असहमति जताते हुए कहा कि इसके स्थान पर ‘सनातन नहीं सिखाता आपस में बैर रखना’ कहना अधिक उचित होगा। ( Chhattisgarh News) वे जयपुरिया परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में शामिल होने जांजगीर जिले के बम्हनीडीह पहुंचे हैं। कथा के दौरान उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस में विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक मुद्दों पर अपनी बात रखी।
अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि सनातन परंपरा में सभी के कल्याण की कामना की गई है। हमारे ऋषि-मुनियों ने ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः’ का संदेश दिया, जिसका भाव सभी के सुखी और निरोग रहने की कामना करना है। उन्होंने कहा कि धार्मिक पहचान के आधार पर किसी के प्रति घृणा या बैर रखना सनातन की मूल भावना नहीं है।
कथा वाचक ने इतिहास में मंदिरों के विध्वंस का उल्लेख करते हुए कहा कि जहां ऐतिहासिक रूप से मंदिर तोड़े गए हैं, वहां मंदिरों की पुनर्स्थापना की मांग को गलत नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस विषय पर किसी को आहत होने की जरूरत नहीं है और ऐतिहासिक तथ्यों को सामने रखकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी जानी चाहिए।
कथा के मंच से साइबर ठगी पर कथा वाचक अनिरुद्धाचार्य ने प्रहार किया है। हजारों श्रद्धालुओं से कहा कि विवेक और संयम ही साइबर ठगी से बचाव की सबसे बड़ी ढाल। इस दौरान अनिरुद्धाचार्य ने श्रद्धालुओं को दिलाया सुरक्षित डिजिटल व्यवहार का संकल्प दिलाया।
Updated on:
14 Sept 2026 05:20 pm
Published on:
14 Sept 2026 05:20 pm
