जांजगीर चंपा

प्रशासन का खौफ नहीं, स्थगन आदेश के बाद भी शासकीय भूमि पर तान दिया आलीशान बिल्डिंग

- तहसीलदार के आदेश को सारागांव थानेदार ने भी रद्दी की टोकरी में डाल दिया।

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अफसरों का खौफ नहीं, स्थगन आदेश के बाद भी शासकीय भूमि पर तान दिया आलीशान बिल्डिंग

जांजगीर-अफरीद. चांपा तहसील अंतर्गत गौरव ग्राम अफरीद में भरत लाल राठौर द्वारा शासकीय भूमि में आलीशान बिल्डिंग तान दिया। इसकी शिकायत ग्रामीण तहसीलदार चांपा से करते हुए स्थगन आदेश लाये। इसके बाद भी अनावेदक द्वारा मकान बनाया जा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि इस मामले में तहसीलदार चांपा के द्वारा खुद कार्रवाई करने के बजाए सारागांव थाना प्रभारी को कार्रवाई करने के लिए आदेशित किया गया है। इसके चलते मामला ठंडे बस्ते में चला गया है। वहीं अनावेदक द्वारा आलीशान बिल्डिंग बना लिया गया है।

राजस्व मामले का कामकाज किस कदर लापरवाहीपूर्वक किया जाता है इसका जीता जागता उदाहरण गौरव ग्राम अफरीद में आपको देखने को मिल जाएगा। लोग गांव के शासकीय भूमि में आए दिन आलीशान मकान बना रहे हैं, लेकिन राजस्व अफसर मुकबधिर बनकर बैठे हैं। बड़ी बात यह है कि शिकायत के बाद भी अफसरों की कान में जूं तक नहीं रेंग रही है। कुछ ऐसे ही मामले में राजस्व अफसरों द्वारा जमकर भर्राशाही की जा रही है। गांव के अनिल राठौर का गढ़पारा के पास निजी भूमि है। वहीं पर एक शासकीय भूमि भी है जहां से उनका आवागमन होता है।

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इस शासकीय भूमि खसरा नंबर १८३० रकबा ३० डिसमिल में पास के ही भरत लाल राठौर द्वारा अनाधिकृत रूप से मकान बनाया जा रहा है। इस मामले को लेकर अनिल राठौर ने तहसीलदार के कार्यालय में आवेदन प्रस्तुत किया था। जिसमें कहा था कि शासकीय भूमि में उसके द्वारा मकान बनाया जा रहा है। इस मामले में तहसीलदार ने भरत लाल राठौर को नोटिस देकर स्थगन आदेश दिया था। जिस पर भरत लाल राठौर को तहसीलदार ने नोटिस देकर ६ जनवरी २०१८ को न्यायालय में उपस्थित होने कहा था। भरत लाल राठौर न्यायालय में उपस्थित जरूर हुआ, लेकिन वह मकान बनाना बंद नहीं किया। इसके बाद अनिल राठौर ने तहसीलदार को फिर रिमाइंडर किया था। लेकिन रिमाइंडर का तहसीलदार पर कोई असर नहीं पड़ा। अलबत्ता भरत लाल राठौर का मकान पूरी तरह से बन गया।

चांपा टीआई को किया आदेशित
इस मामले में मजेदार बात यह है कि तहसीलदार को राजस्व मामले की कार्रवाई खुद करनी चाहिए थी, लेकिन उन्होंने टीआई सारागांव को आदेशित करते हुए कहा था कि इस मामले में मौके पर पहुंचे और निर्माण कार्य बंद कराकर दंडात्मक कार्रवाई करें। लेकिन तहसीलदार के आदेश को सारागांव थानेदार ने भी रद्दी की टोकरी में डाल दिया। आखिरकार इस मामले में गांव तनाव का माहौल है। वहीं प्रशासनिक अधिकारी चुप्पी साधे बैठे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि शासकीय भूमि ने मकान नहीं टूटा तो गांव में अप्रिय घटना घट सकती है।

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Published on:
25 Jun 2018 01:56 pm
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