राउलकेला से संबलपुर तक बन चुकी है राखड़ से रोड
जांजगीर-चांपा. जिले में हर जगह राखड़ का पहाड़ बनता जा रहा है। हालत यह है कि पॉवर प्लांट के पास इतनी जगह ही नहीं है कि वह फ्लाई ऐश को डंप कर सके।
इसके चलते अब वह लोग उसे कहीं भी डाल रहे हैं और इससे जमीन बंजर हो रही है। ऐसै में यदि जिले में बनने वाली सड़कों के बेस में राखड़ डाली जाए तो जिले से राखड़ की समस्या भी खत्म हो जाएगी और सड़क मजबूती भी बढ़ेगी। इस बात को लेकर जब पत्रिका ने जिले के प्रभारी मंत्री अजय चंद्राकर और कलेक्टर नीरज कुमार बनसोड़ से बात की तो दोनों ने इसे बेहतर सुझाव बताया, लेकिन पीडब्ल्यूडी के ईई वायके गोपाल अपनी इंजीनियरिंग का पेंच बताकर ऐसा नहीं कर रहे हैं।
जिले के प्रभारी मंत्री अजय चंद्राकर जब सीएम की विकास यात्रा के संबंध में जांजगीर पहुंचे थे तब पत्रिका से खास बातचीत के दौरान उन्होंने जिले से राखड़ की समस्या का हल निकालने के लिए सड़क का बेस राखड़ से बनाने को बेहतर विकल्प बताया। जब उन्हें बताया गया कि डीएमएफ फंड से कलेक्टोरेट मोड़ से जिला पंचायत को जोड़ती हुई सड़क बन रही तो उन्होंने पीडब्ल्यूडी के ईई वायके गोपाल से यहां राखड़ का उपयोग करने को लेकर चार्चा की, लेकिन वायके गोपाल ने वहां तकनीकी पेंच बता दिया। इसके बाद इस संबंध में कलेक्टर नीरज बनसोड़ भी चर्चा की गई तो उन्होंने इसे बन रही सड़क के कुछ मीटर हिस्से में प्रयोग करने की बात कही है।
200 किलोमीटर लंबी बन चुकी है सड़क
राउलकेला से संबलपुर तक २०० किलोमीटर लंबी सड़क का बेस फ्लाई ऐश से ही तैयार किया गया है। हाकीकत यह है कि उस सड़क की मजबूरी भी दूसरी सड़कों से बेहतर है। ऐसी सड़कें बनाने के लिए पीडब्ल्यूडी के अधीक्षण अभियंता संजय सूर्यवंशी दूसरे राज्य में जाकर ट्रेनिंग भी ले चुके हैं।
-यह एक बेहतर विकल्प है। पीडब्ल्यूडी के ईई से बात की गई है। इसे जिले में प्रयोग के तौर पर जरूर किया जा सकता है। इससे राखड़ की समस्या से निजात मिल पाएगी।
-अजय चंद्राकर, प्रभारी मंत्री, छत्तीसगढ़ शासन