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यहां कमीशनखोरी की भेंट चढ गई 10 लाख रूपए की एलईडी बल्ब वाली योजना

विधायक मद से यहां कई कार्य हुए

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विधायक मद से यहां कई कार्य हुए

विधायक मद से यहां कई कार्य हुए

देवेंद्र यादव/पामगढ़. जिले की सबसे बड़ी विधान सभा जहां से भाजापा विधायक अंबेश जांगड़े संसदीय सचिव भी है और उसके विधायक मद से यहां कई कार्य हुए हैं।

यहां हाल ही में 10 लाख रुपए की लागत से पामगढ़ विधायक के मद से पामगढ़ के चौक चौराहों में एलईडी हाई मास्क लाइट लगाई गई थी। विधायक ने दावा किया था कि वह उनकी निधि से हुए कार्यों में सबसे बेहतर कार्य है, लेकिन दुर्भाग्य की यह कार्य भी कमीशन की भेंट चढ़ चुका है। यहां बिजली के खंभों में लगी हाई मास्क लाइटें आधे से अधिक खराब हो चुकी हैं।

बल्ब की रोशनी को देखकर ही लोगों ने कयास लगाना कर दिया था कि जिम्मेदारों ने खुलकर भर्राशाही की है। पामगढ़ में रात को एलईडी हाई मास्क लाइट से भरपूर रोशनी नहीं मिल पाने से यह कयास अब हकीकत में तब्दील हो चुका है।

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मुख्यालय के ग्राम पंचायत को रोशन करने के उद्देश्य से विधायक एवं संसदीय सचिव अंबेश जांगड़े ने 14 अप्रैल को ग्राम पंचायत पामगढ़ को लगभग 10 लाख रुपए प्रदान किया था। इसके लिए निर्माण एजेंसी ग्राम पंचायत पामगढ़ को ही बनाया गया था। पामगढ़ के चौक चौराहों में रोशनी के लिए अंबेडकर चौक, जांजगीर मोड़, तहसील चौक एवं ग्रामीण बैंक के पास बिजली के खंभे लगाकर उसमें एलईडी हाई मास्क लाइट को लगाया गया है। बिजली के तीन पोल ही साढ़े 8 लाख रुपए में लगे हैं।

वहीं एक सिस्टम 1.65 लाख रुपए में बना है। यानी चार सिस्टम में 10 लाख रुपए खर्च किया गया है। पहले तो निर्माण एंजेंसी ने जरूरत के हिसाब से खंभे में बल्ब ही नहीं लगाए। बताया जा रहा है कि खंभे में छह-छह नग बल्ब लगाना था, लेकिन छह के बजाए चार-चार बल्ब ही लगाए गए। जरूरत के हिसाब से बल्ब में कमी कर खुलेआम कमीशन निकाली गई।

हद तो तब हो गई जब यहां उच्च कोटि का बल्ब लगाने के बजाए लोकल ब्रांड का बल्ब लगाया गया। जो चौक चौराहों को 2 माह भी रोशन नहीं कर पाया और आधे से अधिक बल्ब समय से पहले फ्यूज हो गए। जिसके चलते शहर के लोगों को अंधेरे में बिताना पड़ रहा है।


विधायक के बेहतर कार्यों में से है एक
क्षेत्र के संसदीय सचिव अंबेश जांगड़े ने पामगढ़ को सवांरने के लिए इसे अपने बेहतर कार्यों में शामिल किया था। यही वजह है कि उन्होंने अपने विधायक मद से 10 लाख रुपए दिए थे। यदि जिम्मेदारों ने इसे बिना कमीशन के काम किया होता तो निश्चित ही पामगढ़ के लोगों को बेहतर बिजली सुविधा मिलती, लेकिन जिम्मेदारों ने ऐसे नेक कार्य के लिए भी नीयत साफ नहीं रखा और कमीशन की भेंट चढ़ा दी।


10 लाख रुपए का लगा सिस्टम
ठेकेदार शंकर अग्रवाल के मुताबिक एक बिजली खंभे लगाने के लिए उसे एक लाख 65 हजार रुपए प्रदान किए गए थे। वहीं दो विभिन्न मदों में 4 अलग- अलग तरह के सिस्टम लगाने के लिए 10 लाख रुपए खर्च की गई है, लेकिन ठेकेदार ने मानकों को नजर अंदाज करते हुए एक तो घटिया सामान लगाया, वहीं दूसरी ओर जो बल्ब लगाए हैं वह लोकल कंपनी के थे।

यही वजह है कि यह बल्ब 2 माह भी नहीं टिक पाया। जबकि अन्य ठेकेदारों का कहना है कि यदि अच्छे क्वालिटी का बल्ब लगाया गया होता तो कम से कम एक बल्ब एक साल तक टिकता है। इससे साफ जाहिर होता है कि एलईडी बल्ब लगाने में जिम्मेदारों ने बतौर कमीशन खुलकर भर्राशाही की है।


-एलईडी लाइट लगाने में मनमानी की गई है इसकी जानकारी नहीं है। यदि ऐसा है तो मामले की जांच कराएंगे और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए कहा जाएगा।
-अंबेश जांगड़े, संसदीय सचिव