जांजगीर चंपा

फसल की पैदावार बढ़ाने किसान पंजाब की तर्ज पर कर रहे धान की खेती, जानें किस पद्धति का कर रहे इस्तेमाल

-जिले के किसान पहले श्री पद्धति अनजान थे, लेकिन यह पद्धति भी जिले में कारगर साबित होते दिखाई दे रहा है।

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फसल की पैदावार बढ़ाने किसान पंजाब की तर्ज पर कर रहे धान की खेती, जाने किस पद्धति का कर रहे इस्तेमाल

जांजगीर-चांपा. जिले के किसान अब पंजाब की तर्ज पर धान की बोनी करना शुरू कर दिया है। अधिक उपज के लिए कड़ी मेहनत करते हुए धान की कतार बोनी के अलावा श्री पद्धति से करने लगे हैं। ऐसे में प्रगतिशील किसानों को अधिक उपज मिलना स्वभाविक है। पंजाब में खेती किसानी का काम हाईटेक पद्धति से होती है।

अत्याधुनिक संसाधनों से लैस किसान अच्छी उपज के लिए जी तोड़ मेहनत तो करते ही हैं। साथ-साथ नई तकनीक का भी इस्तेमाल करते हैं। यही नई तकनीक अब जिले में भी इस्तेमाल हो रहा है, जिले के किसान अभी कतार बोनी कर रहे हैं। इसके बाद श्री पद्धति से बोनी करना शुरू कर दिए है। जिले के किसान पहले श्री पद्धति अनजान थे, लेकिन यह पद्धति भी जिले में कारगर साबित होते दिखाई दे रहा है। जिले के 10 प्रतिशत कृषि रकबे में कतार बोनी हुई है।

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सबसे अधिक डभरा, मालखरौदा, बम्हनीडीह व जैजैपुर ब्लाक में इस पद्धति का उपयोग किया जा रहा है। इसके अलावा अब नवागढ़ क्षेत्र के किसान भी इस पद्धति का इस्तेमाल करना शुरू कर दिए है। गौरतलब है कि जिले में दो लाख 60 हजार हेक्टेयर में धान की बोनी की जाती है। जिसमें तकरीबन 60 हजार हेक्टेयर में किसानों ने इस साल श्री पद्धति से धान की बोनी की है।

हालांकि इस तरह की अलग हटकर खेती प्रगतिशील किसान ही करते हैं। जिन्हें फसल की जानकारी होती है। बम्हनीडीह ब्लाक के लखुर्री के किसान राम प्रकाश केशरवानी ने बताया कि वह हर साल 50 एकड़ में धान की खेती करते हैं। जिसमें 20 फीसदी हिस्से में श्रीपद्धति से धान की बोनी करते हैं। इससे उन्हें 15 से 20 प्रतिशत अतिरिक्त आमदनी होती है। इसी तरह नवागढ़ ब्लाक कामता गांव के किसान रामफल कश्यप ने बताया कि वह श्रीपद्धति से ही धान की बोनी करते हैं। जिससे उन्हें कम से कम 10 प्रतिशत अधिक आय होती है।
क्या है पद्धति
कतार बोनी यानी अत्याधुनिक हल के माध्यम से कतार में धान की बोनी करते हैं। धान के पौधे भी कतार में उगता है। वहीं श्री पद्धति वह पद्धति है जिसमें कतार में रोपा लगाया जाता है। इस तरह के बोनी से किसानों को 10 से 15 प्रतिशत अधिक फसल होता है। यही वजह है कि किसानों का रुझान इस पद्धति पर अधिक है।

यह होता है लाभ
- उपज डेढ़ 10 प्रतिशत अधिक
- खरपतवार निकालना आसान
- पौधे अधिक फैलते हैं
- खेती के हर काम में सुविधा
- पानी की समस्या कम
- प्रकाश अधिक मिलता है
- बीज चमकीला व मजबूत होता है

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Published on:
24 Jul 2018 08:25 pm
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