जांजगीर चंपा

पूर्व CMHO को आय से अधिक संपत्ति मामले में जमानत

60 लाख 63129 रुपए खर्च करना पाया गया

2 min read
60 लाख 63129 रुपए खर्च करना पाया गया

जांजगीर-चांपा. जिले में वर्ष 2010 से 2016 तक मुख्य चिकित्सा व स्वास्थ्य अधिकारी के पद पर रहे डॉ. रामलाल धृतलहरे को आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में प्रथम एडीजे के न्यायालय में अभियोग पत्र दाखिल करने के बाद स्वास्थ्यगत कारणों से जमानत मिल गई।

इस संबंध में अतिरिक्त लोक अभियोजक रेवतीरमण तिवारी से मिली जानकारी के अनुसार डॉ. धृतलहरे पर अपने कार्यकाल के दौरान अपने पुत्र व पत्नी के नाम से आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगा था। इस संबंध में छानबीन करने पर वैध स्रोतों से आय एक करोड़ 10 लाख 64532 रुपए के एवज में अधिकारी द्वारा दो करोड़ 60 लाख 63129 रुपए खर्च करना पाया गया। इस तरह डॉ. धृतलहरे की संपत्ति 135 प्रतिशत अधिक एक करोड़ 49 लाख 98597 रुपए असमानुपातिक पाई गई। मामले को लेकर जांच उपरांत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13-1 ई, 13-2 के तहत उपलब्ध साक्ष्यों के साथ अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम संघरत्ना भतपहरी के न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।

ये भी पढ़ें

बच्चों की छात्रवृत्ति में 75 लाख का घोटाला करने वाले अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज

मामले में आरोपी डॉ. आरएल धृतलहरे द्वारा ह्रदयरोग संबंधी प्रमाण के आधार पर जमानत आवेदन प्रस्तुत किया गया। दोनों पक्षों की सुनवाई उपरांत डॉ. धृतलहरे का आवेदन स्वीकार करते हुए 25 हजार रुपए के जमानत पर छोडऩे का आदेश दिया गया।

------------

किसान को नहीं मिल रहा न्याय
जांजगीर-चांपा. जिले के अकलतरा तहसील अंतर्गत ग्राम अमोरा के एक किसान के खेत के इर्द-गिर्द बेजाकब्जा कर लिया गया है, जिससे वह दो वर्षों से खेती नहीं कर पा रहा है। कब्जा हटाने हाईकोर्ट से आदेश होने के बाद भी किसान को अब तक न्याय नहीं मिल पाया है।


ग्राम अमोरा के किसान रामनाथ साहू के पास दो एकड़ जमीन है, जिसके पास सरकारी जमीन है। उक्त सरकारी जमीन पर गांव के ही कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया है, जिसके चलते साहू अपने खेत तक नहीं पहुंच पा रहा है। इससे वह विगत दो वर्षों से खेती नहीं करा पा रहा है। इसको लेकर साहू ने तहसीलदार के पास बेजाकब्जा हटाने आवेदन किया, जहां से सीमांकन भी कराया गया, लेकिन उसके बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे क्षुब्ध किसान मामले को लेकर हाईकोर्ट चला गया।


हाईकोर्ट से बेजाकब्जा हटाने निर्देश मिलने के बाद भी अब तक संबंधित स्थल से कब्जा नहीं हटाया गया है। इस संबंध में साहू ने तहसीलदार के पास पुन: कब्जा हटाने आवेदन लगाया, जिस पर भी कोई सुनवाई नहीं हुई, जिससे उसने मामले को लेकर हाईकोर्ट में अवमानना का केस दाखिल किया है। इस तरह किसान को हाईकोर्ट से आदेश के बाद भी न्याय नहीं मिल पाना स्थानीय अधिकारियों की लापरवाही की ओर इंगित कर रहा है।

ये भी पढ़ें

पेंशन विभाग का चपरासी एक हजार रुपए की घूस लेते गिरफ्तार

Published on:
03 Aug 2018 12:50 pm
Also Read
View All