जांजगीर जिला कमीशन लेकर हर कार्य होने, परीक्षा में नकल के लिए तो पूरे राज्य में पहले ही चर्चित है,
लेकिन
अब यहां बुजुर्गों को मिलने वाली महज 350 रुपए की पेंशन में भी कमीशन लिया
जाने लगा है। यह कार्य और कोई नहीं बल्कि हमारे देश के राष्ट्रीकृत बैंको
की शाखा द्वारा कराया जा रहा है।
इनके द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों
में जो भी घर जाकर वृद्धा पेंशन दी जाती है उसमें 30-50 रुपए तक कमीशन लिया
जा रहा है। जब बैंक मैनेजर से इसकी शिकायत की गई तो मैनेजर ने इसे सुविधा
शुल्क बताया,
जबकि ऐसा कोई सरकारी प्रावधान नहीं है। ऐसा ही एक
मामला बम्हनीडीह विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत चोरहादेवरी के आश्रित ग्राम
बरकुट में सामने आया है। इस कमीशन खोरी का पत्रिका टीम ने लाइव कवरेज किया
है।
गरीब बुजुर्गों से की जा रही इस कमीशनखोरी का पर्दाफाश करने के
लिए पत्रिका की टीम मंगलवार को बरकुट गांव पहुंची। यहां बैंक ऑफ इंडिया की
चांपा शाखा के अंतर्गत बिर्रा च्वाइज सेंटर से कुछ लोग वृद्धा पेंशन
बांटने पहुंचे थे। पेंशन बांटने वाले लोगों जिस बुजुर्ग से आईपैड में फिंगर
ले रहे थे
उसे प्रतिमाह मिलने वाली राशि 350 की जगह 300 रुपए ही
दे रहे थे। पूछने पर उनके द्वारा बताया गया कि 350 रुपए से 20 रुपए उनके
खाते में जमा रहता है और 30 रुपए वह लोग घर जाकर पेंशन देने का कमीशन ले
रहे हैं, लेकिन उनके द्वारा इस 30 रुपए की कोई भी
रशीद बुजुर्गों
को नहीं दी गई। पत्रिका ने जब इस बारे में बैंक ऑफ इंडिया चांपा के स्केल
वन अधिकारी जूनियर मैनेजर मिस्टर मजूमदार से बात किया तो उसने बताया कि अब
घर जाकर पेंशन देंगे तो सुविधा शुल्क लेंगे ही। हालांकि मजुमदार की
ईमानदारी इतनी दिखी कि उसने कहा कि उसे 30 नहीं 20 रुपए कमीशन लेना था। 10
रुपए अधिक लिया गया है, लेकिन यह कमीशन लेने का कहीं कोई न आदेश है न ही
कोई प्रावधान।
तीन माह का पेंशन, लिया 90 रुपए कमीशन
- इस
कमीशन के खेल में जमकर फर्जीवाड़ा हो रहा है। बैंक का एजेंट यदि किसी
बुर्जुग को तीन माह का पेंशन देता है और उसे भले ही पेशन देने एक बार घर
जाना पड़ा हो, लेकिन वह उससे कमीशन तीन बार का ले रहा है।
यानि
बुजुर्ग को 900 रुपए पकड़ाकर 90 रुपए कमीशन अपनी जेब में डाल लिया जा रहा
है। एजेंट ने बरकुट गांव में 166 हितग्राहियों को पेंशन दिया और एक ही झटके
में 5-6 हजार रुपए कमीशन बना लिया। इतनी कमाई तो शायद कलेक्टर साहब की भी
रोज की नहीं होगी।