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प. बंगाल में भाजपा का बढ़ता दायरा बना नई चुनौती, नए कार्यकर्ताओं को संगठन के देंगे संस्कार

पश्चिम बंगाल में भाजपा की बढ़ती लोकप्रियता के बीच संगठन के विस्तार की नई चुनौती सामने है, पार्टी नए कार्यकर्ताओं को जोड़ने और उन्हें विचारधारा व कार्यसंस्कृति से परिचित कराने के लिए विशेष प्रशिक्षण अभियान चलाने की तैयारी कर रही है।

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भारत

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Satya Brat Tripathi

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अभिषेक सिंघल

Jun 13, 2026

BJP expanding its base in West Bengal.

भाजपा नेता और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी। (File Photo- IANS)

West Bengal BJP: पश्चिम बंगाल में भाजपा के चुनाव जीतने के बाद उसके प्रति आमजन में रुझान तेजी से बढ़ा है। यह बढ़ती लोकप्रियता अब भारतीय जनता पार्टी नेतृत्व के सामने एक नई संगठनात्मक चुनौती के रूप में सामने आ रहा है। भाजपा जहां नए कार्यकर्ताओं को संगठन से जोड़ना भी चाहती है, वहीं उसके सामने यह भी चुनौती है कि उन्हें किस तरह से पार्टी से जोड़ा जाए। चुनाव जीतने के तुरंत बाद भारतीय जनता पार्टी यानी भाजपा में नए लोगों के शामिल होने पर रोक लगा दी गई थी। वहीं, पार्टी नेतृत्व का मानना है कि नए कार्यकर्ताओं को मौका दिया जाने की आवश्यकता है। इस संबंध में भाजपा के अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि पार्टी को निचले और मंझले स्तर पर समाज में उचित भूमिका निभाने वाले लोगों को शामिल करना होगा।

विशेष प्रशिक्षण अभियान चलाने की तैयारी

पार्टी सूत्रों के अनुसार, भाजपा इसको लेकर विशेष रणनीति पर काम कर रही है। इसका उद्देश्य पार्टी में आ रहे नए कार्यकर्ताओं और नेताओं को संगठन की भाजपा की रीति-नीति, विचारधारा और कार्य संस्कृति से व्यवस्थित रूप से जोड़ना है। इसके लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों, कार्यशालाओं और वैचारिक परिचर्चाओं की श्रृंखला आयोजित किए जाने की योजना है।

क्लबों-यूनियनों को भी साथ लेने की तैयारी

भाजपा ने अपने चुनाव अभियान के दौरान फुटबॉल क्लबों और युवा क्लबों के जरिए युवाओं में अपना आधार बढ़ाया था। अब पार्टी की जीत के बाद वहां पहले से सक्रिय क्लबों और यूनियनों के पदाधिकारियों की ओर से पार्टी के नेताओं से संपर्क किया जा रहा है। सरकार बनने के बाद से इनसे अपार समर्थन मिला है।

पहले से ही टीएमसी के कुछ नेता संपर्क में

भाजपा के एक उच्च पदस्थ सूत्र के अनुसार, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के दौरान और उससे पहले से ही चार सांसद भाजपा के संपर्क में थे। इनमें से एक के पास अभी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में विद्रोह का नेतृत्व भी है। भारतीय जनता पार्टी का यह भी मानना है कि सभी विधायकों और सांसदों का पिछली सरकार यानी ममता बनर्जी सरकार की नीतियों और कारनामों से सीधा संपर्क नहीं था। नेतृत्व ने उन्हें तीन महीने इंतजार करने को कहा है।

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