पंचायतों में शुरू की गई जनसुनवाई ग्रामीण क्षेत्रों में फ्लॉप
बम्हनीडीह. ग्रामीणों की शिकायत सुनने राज्य शासन द्वारा पंचायतों में शुरू की गई जनसुनवाई ग्रामीण क्षेत्रों में फ्लॉप साबित हो रही है। ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधि सिर्फ जरूरत पडऩे पर ही दफ्तर का ताला खोलते हैं। लोगों की समस्याएं सुनने के लिए सोमवार, बुधवार और शुक्रवार का दिन निर्धारित है।
प्रशासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार इस दिन पंचायत सचिव को कार्यालय में मौजूद रहना अनिवार्य है। लेकिन इसका पालन बम्हनीडीह ब्लाक के पंचायतो में नही हो रहा है। बम्हनीडीह विकास खण्ड अंतर्गत ग्राम पंचायत पिपरदा, पचोरी, सोठी व खपरीडीह में सोमवार को यहां दिनभर ताला बंद रहा।
ग्राम पंचायतों में आवेदन लेना तो दूर सरपंच, सचिव बैठते ही नहीं। पिपरदा, पचोरी, सोठी व खपरीडीह ग्राम पंचायत की पत्रिका टीम द्वारा पड़ताल करने में सामने आई कि सरपंच, सचिव कब आते जाते हैं लोगों को पता ही नही है। बम्हनीडीह ब्लाक के 54 ग्राम पंचायतों में 40 पंचायतों में रोज ताला लगा रहता है।
एक ओर जहां शासन द्वारा ग्रामीणों की मदद के लिए पंचायत कार्यलय का भवन लाखों खर्च कर बनाया गया है। वहीं दूसरी तरफ कार्यालय का केवल ताला ही सुरक्षित रखता है। पंचायत स्तर के जनप्रतिनिधियों की लापरवाही के कारण ग्रामीण अपनी शिकायत पंचायत को नही दे पाते। जिस कारण पंचायत के विकास कार्य से लेकर ग्राम की सारी योजनाओ का कार्य ठप है। ग्रामीण अपने पंचायत के कार्य के लिए इधर उधर भटकते रहते हैं।
सचिव कर रहे जनपद मे बाबूगिरी
ग्राम पंचायत खपरीडीह के सचिव बुधेश्वर सूर्यवंशी आए दिन जनपद कार्यालय मे बाबू की तरह बैठे रहते हैं। जिससे खपरीडीह के ग्रामीणों को काफी परेशानी होती है। सचिव को जैसे अधिकारीयों का आशीर्वाद प्राप्त है। इस वजह से सचिवों के हैसले बुलंद होते जा रहे हैं।
समस्या होने पर सरपंच के घर जाते हैं ग्रामीण
खपरीडीह पंचायत के ग्रामीणों ने कहा कि पंचायत का कार्यालय महीने में कभी कभार ही खुलता है। पंचायत में हमेशा ताला लगा रहता है। छोटी-मोटी समस्याओं का सुलह करने व काम के लिए सरपंच के घर जाना पड़ता है।
नोटिस जारी किया जायेगा
पंचायत बंद रहने के कारण सचिवों को कारण बताओ नोटिस जारी किया जायेगा साथ ही वेतन मे भी काटा जायेगा ।
-मुकेश रावटे
सीईओ, जनपद पंचायत बम्हनीडीह