निजी स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबों
जांजगीर-चांपा. निजी स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबों के प्रयोग करने का निर्देश मिलते ही विषय में बढ़ोतरी हो गई है। इन बढ़े विषयों को सामान्य शिक्षा के अलावा एडवांस एक्टिविटिज व नैतिक शिक्षा बताया जा रहा है। इसके लिए पालकों को निजी प्रकाशन की महंगी पुस्तकें खरीदनी पड़ रही है, जिससे निजी स्कूलों में सस्ते एजुकेशन की उम्मीद फिर खत्म हो गई है।
प्राइमरी से मीडिल स्तर के कक्षाओं में सामान्यत: छह विषय की पढ़ाई होती रही है। इन सभी छह विषयों की किताबें 50 रुपए प्रति विषय के हिसाब से एनसीईआरटी उपलब्ध करा रही है,
लेकिन अब शहर के निजी स्कूलों ने विषयों की संख्या बढ़ाकर 9 से 10 कर दी है, जिसमें ड्राइंग, पेंटिंग, इंग्लिश ग्रामर, पोयम, रिजनिंग जैसे विषय को शामिल किए गए है। इन विषयों की पढ़ाई रोजाना अल्टरनेट ढंग से कराई जा रही है। इनकी पढ़ाई निजी प्रकाशन की पुस्तकों से किया जाना है, जिसके लिए पालकों को मोटी रकम खर्च करनी पड़ रही है। स्पेशल सब्जेक्ट के रुप में बढ़ी किताबों की कीमत ही प्रति विषय 200 से 250 रुपए है। ऐसे में एनसीईआरटी के पुस्तकों की अनिवार्यता के बीच निजी स्कूल संचालकों ने कमाई का नया जरिया खोज निकाला है। साथ ही यह तरीका अपना कर अपने चहेते बुक सेलर्स को सहयोग करने लगे हैं।
चार विषय की पुस्तकें 200 रुपए में
पहले नर्सरी से पांचवी तक की निजी प्रकाशन की किताब खदीरने में पालकों को 15 से 17 सौ रुपए खर्च करने पड़ रहे थे, जो एनसीईआरटी के लागू होते ही 400 रुपए तक आ गई। विषय बढ़ते ही पुरानी स्थिति दोबारा निर्मित हो गई। तय छह विषयों के अलावा बढ़ाए गए चार विषय की पुस्तक खरीदने में पालकों को औसत 200 रुपए प्रति पुस्तक कीमत चुकानी पड़ रही है, जिससे बुल सेलर्स की सेलिंग वापस पहले की तरह हो गई।
खरीदी के लिए दुकान फिक्स
शहर सहित जिले के सभी निजी स्कूलों में एडवांस एक्टिविटिज के विषय संचालित किए जा रहे है, जिनकी कितबों के लिए एक बुल सेलर्स को तय किया गया है। उक्त दुकान संचालक के मुताबिक एनसीईआरटी के सेट तो कम दाम में है, लेकिन अन्य विषयों की किताबों के दाम अधिक है। विक्रेताओं ने यह भी बताया कि हर क्लास के सेट के साथ इन पुस्तकों को व कापियों को खरीदना भी अनिवार्य कर दिया गया है
समय पर नहीं मिलती पुस्तकें
निजी स्कूल संचालकों द्वारा विद्यार्थियों के लिए पुस्तकें तय की जाती है, फिर खरीदने के लिए दुकान का एड्रेस भी दिया जाता है, लेकिन हर साल पुस्तकें बदलते रहने के कारण दुकान संचालक समय पर पुस्तकें नहीं मंगवाते, जिससे पालकों के लिए अनावश्यक इंतजार करना पड़ता है। इस बात को बच्चे नहीं समझते और समय पर पुस्तकें नहीं उपलब्ध कराने के लिए पालकों को दोष देते हैं। खासकर छोटे बच्चे तो जिद्द उतर जाते हैं, जिससे पालकों के सामने विकट स्थिति उत्पन्न हो जाती है। पुस्तक बदलने के पीछे का कारण पुरानी पुस्तकों को प्रचलन में नहीं लाना है।